जमीन बेचकर कर्मियों को तनख्वाह बांटेगा भिलाई निगम, कभी राजस्व वसूली में प्रदेश में था अव्वल, अब वित्तीय स्थिति चरमराई

Bhilai nigam economic crisis: नगर निगम भिलाई की माली हालत बहुत ही ज्यादा खराब है। अपने कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह तक नहीं दे पा रहा है।

By: Dakshi Sahu

Published: 01 Oct 2020, 12:55 PM IST

भिलाई. नगर निगम भिलाई की माली हालत बहुत ही ज्यादा खराब है। अपने कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह तक नहीं दे पा रहा है। यहां तक कि कोविड-19 संक्रमण काल में जहां रोज मौतें हो रही है, शव को मुक्तिधाम ले जाने वाहन में डीजल भरवाने तक के लिए निगम के पास पैसे नहीं थे। कोरोना हॉस्पिटल के लिए एक जनरेटर तक नहीं खरीद पाए। दूसरे के सामने हाथ फैलाना पड़ा। स्ट्रीट लाइट का 16 करोड़ से भी अधिक बकाया है। वित्तीय संकट से उबरने निगम अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी खाली भूूमि व भूखंडों को बेचेगा। बताया गया कि इसके लिए शासन से मंजूरी मिल गई है।

कभी राजस्व वसूली में पूरे प्रदेश में अव्वल और पुरस्कृत होने वाले नगर पालिक निगम भिलाई की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। यहां तक कि कर्मियों को वेतन देने तक के लाले पड़ गए हैं। अब तक तीन बार संचित निधि जो कि निगम की अपनी स्थाई पंूजी होती है, से वेतन देना पड़ा है। इस महीने (सितंबर देयक अक्टूबर) फिर इसके लिए राज्य शासन से मंजूरी मांगी गई है। कंगाल हो चुके निगम के पास अब शहर के विभिन्न क्षेत्रों में रिक्त पड़े आवासीय व व्यावसायिक भूखंड ही एक सहारा है।

ज्यादातर भूखंड नेहरू नगर, दक्षिण गंगोत्री, मदर टेरेसा नगर में
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अवर सचिव एचआर दुबे की ओर से जारी पत्र में उक्त भूखंडों व भूमि के अंतरण के लिए कलेक्टर का अधिकृत किया गया है। कलेक्टर ही इसकी क्रियान्वयन एजेंसी होगी। पत्र में लिखा है कि मध्यप्रदेश शासन के आदेश पृष्ठांकन 18 सितंबर 2000 के द्वारा 3800 वर्ग मीटर भूमि लीज पर दिए जाने के प्रतिबंध को समाप्त किया जाता है।

भूमि व भूखंडों का अंतरण छग शासन राजस्व व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 11 सितंबर 2019 के निर्देशों एवं छग नगर पालिक निगम (अचल संपत्ति का अंतरण ) नियम 1994 में निहीत प्रावधान के अनुसार की जाएगी। इससे प्राप्त राजस्व अनुपातिक रूप से राजस्व मद एवं नगर पालिक निगम मद में जमा कराई जाएगी। इनमें से ज्यादातर भूखंड नेहरू नगर, दक्षिण गंगोत्री, मदर टेरेसा नगर क्षेत्र में है। भूखंडों का विवरण नगर निगम की ओर से जल्द उपलब्ध कराने की बात कही है।

डेढ़ अरब आय होने का अनुमान
नगर पालिक निगम भिलाई के विभिन्न क्षेत्रों में रिक्त 1248 आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों में फिलहाल 445 को बेचने की योजना है। अनुमान है कि इससे निगम को लगभग डेढ़ अरब रुपए की आय हो सकती है। इससे निगम कर्मियों के वेतन-भत्ते के साथ ईंधन खर्च व रोजमर्रा के जरूरी देयक जो हर महीने लगभग 9 करोड़ रुपए होता है भुगतान कर पाएगा।

वित्तीय अप्रबंधन का खामियाजा भुगत रहे कर्मी
इससे पहले तक वित्तीय मामले में भिलाई निगम की प्रदेश में बहुत अच्छी स्थिति थी। पिछले लगभग एक साल से ही सबकुछ गड़बड़ाया है। निगम के जानकारों और कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है कि कोरोना व अन्य परिस्थितियों से ज्यादाअधिकारियों का वित्तीय अप्रबंधन इसके लिए जिम्मेदार है। अधिकारियों ने अपनो को खुश करने निगम का खजाना ही खाली कर दिया।

ऐसे हुआ निगम का खजाना खाली
0. राज्य शासन से पैसा नहीं आने के बावजूद ठेकेदारों से काम करवाकर नगर निगम मद से भुगतान कर दिया।
0. गैर जरूरी चाजों में अनाप-शनाप और बेहिसाब खर्च किए गए।
0. वाहवाही के लिए संपत्तिकर 50 फीसदी घटा दिया गया। यहां तक कि पूर्व में भुगतान टैक्स का भी समायोजन किया गया।
0. बाजार नीलामी बंद हो गई। आय के कुछ अन्य मदों में भी कर्टौती हो गई।
0. जब से कोविड-19 का बुरा दौर शुरू हुआ है टैक्स वसूली अनियमित है।
0 शासन से बार और मुद्रांक शुल्क नहीं मिल रहा। चुंगी क्षतिपूर्ति भी अनियमित है।

खत्म हो रही संचित निधि
नगर निगम गठन से लेकर हर दिन की वसूली का 5 फीसदी संचित निधि में जमा होते रहा है। निगम की यह अपनी पंूजी है। अब इसे भी खर्च करने की नौबत आ पड़ी है। बताया जाता है कि लगभग 80 करोड़ जमा हो गया था जिसमें 56 करोड़ ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। पिछले तीन बार से कर्मियों को वेतन इसी निधि से दे रहे हैं। इससे निगम को ब्याज के रूप में लगभग एक करोड़ की आय होती उससे भी वंचित हो गया है।

Show More
Dakshi Sahu Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned