बदला समाज सेवा का तरीका, अब राशन की बजाए ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचा रहे घर, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे सांसों के लिए हुए एक

हमारा भिलाई यूं तो प्रदेश के साथ-साथ देश के कई राज्यों में प्राणवायु बांट रहा है, लेकिन शहर में कई लोग ऐसे भी है जो सिलेंडर तक रिफिल कराने की हिम्मत नहीं कर पा रहे, ऐसे लोगों के लिए भी शहर के लोग मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं।

By: Dakshi Sahu

Published: 02 May 2021, 04:02 PM IST

भिलाई. इस लॉकडाउन (Lockdown in Durg) में समाज सेवी संस्थाओं और लोगों के मदद करने का नजरिया वक्त और जरूर के साथ बदल गया है। क्योंकि इस बार लोगों को राशन से ज्यादा जरूरत सांसों की है। चंद उधार की सांसों के लिए दम तोड़ते लोगों को देख शहर के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और समाजसेवी संस्थाओं ने अपनी सेवा का ढंग बदल दिया। अब वे लोगों को सांसें बांट रहे हैं। जी हां वे उन सब लोगों को ऑक्सीजन पहुंचा रहे हैं, जिनकी सांसें कोरोना ने धीमी कर दी है। हर दिन एक नया ग्रुप और नई संस्था ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ लोगों की मदद के लिए सामने आ रही है। हमारा भिलाई यूं तो प्रदेश के साथ-साथ देश के कई राज्यों में प्राणवायु बांट रहा है, लेकिन शहर में कई लोग ऐसे भी है जो सिलेंडर तक रिफिल कराने की हिम्मत नहीं कर पा रहे, ऐसे लोगों के लिए भी शहर के लोग मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं।

गुरुद्वारा में ऑक्सीजन सिलेंडर की सेवा
शहर के नेहरूनगर और दुर्ग के श्री सिंघ सभा गुरुद्वारा स्टेशन रोड में जरूरतमंदों को घर में ऑक्सीजन सिलेंडर देने की व्यवस्था की गई है। स्टेशन रोड़ गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष अरविंदर खुराना ने बताया कि उनके गुरुद्वारे से 40 सिलेंडर की सेवा की जा रही है। जिसमें लोगों को सिर्फ रिफिल का खर्च करना होता है, बाकी सिक्यूरिटी मनी सिलेंडर जमा करने के बाद वापस दे दी जाती है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन बढऩे के बाद कमेटी ने सिख समाज के करीब 100 परिवारों के लिए राशन का भी इंतजाम किया। वहीं रोजाना गुरुद्वारा के आसपास गरीबों के लिए भी लंगर की व्यवस्था की गई है।

जाति धर्म नहीं केवल मानव सेवा का उद्देश्य
नूरी मस्जिद केलाबाड़ी के सदस्य पिछले 20 दिनों से मानवता की सेवा में जुटे हुए हैं। अप्रैल के शुरुआती दौर में अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की कमी को देख उन्होंने 2 सिलेंडर खरीदरकर ऑक्सीजन सेवा शुरू की। मस्जिद के अब्दुल वाहिद अशरफी बताते हैं कि जब लगातार ऑक्सीजन की जरूरत को देखा तो उन्होंने दोस्तो ंके संग मिलकर करीब सवा लाख रुपए जमा किए और उन रुपयों से एक ऑक्सीजन इंडस्ट्रीज से सिलेंडर बुक किए और लोगों को नि:शुल्क बांटने लगे। उन्होंने बताया कि वे लोगों से केवल रिफिलंग का पैसा ही लेते हैं और कोई डिपोजिट भी नहीं कराते। खासबात यह है कि मस्जिद से ऑक्सीजन ले जाने वाले 70 फीसदी से ज्यादा लोग हिन्दू परिवार है। वे कहते हैं कि अल्लाह ने उन सभी को सेवा का मौका दिया है। खासकर रमजान के इस पाक महीने में यदि उनकी सेवा से एक की भी जान बचती है तो उनके लिए इससे बड़ा पुण्य का काम दूसरा नहीं होगा।

ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर भी उपलब्ध
घर में मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ-साथ कुछ संस्थाएं ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर मशीन भी दे रही है। शहरे साज फाउंडेशन के साथ ही एमजे कॉलेज एवं पत्रकार अनुभूति भाखरे ठाकुर अपने पिता की स्मृति में ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर मशीन लोगों को नि:शुल्क उपलब्ध करा रहे हैं। उद्योगपति रमेश अग्रवाल अपने ऑक्सीजन प्लांट से गरीबों को निशुल्क आक्सीजन उपलब्ध करा रहे हैं। अस्पतालों को शासकी दर पर उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने 50 सिलेंडर भी शासकीय जिला अस्पताल को निशुल्क उपलब्ध कराया है।

Dakshi Sahu
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