दो साल में 25 करोड़ खर्च करने के बाद भी सेक्टर 9 अस्पताल से छिन गई प्री-एनएबीएच की मान्यता

पांच साल प्रयाास किया तब जाकर 5 जून 2015 को क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया(क्यूसीआई) ने अस्पताल को एनएबीएच का प्री एक्रिडिएशन जारी किया था।

निर्मल साहू@भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा संचालित सेक्टर-9 अस्पताल को मिली एंट्री लेवल नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) की मान्यता खत्म कर दी गई है। 2010 से लगातार पांच साल प्रयाास किया तब जाकर 5 जून 2015 को क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया(क्यूसीआई) ने अस्पताल को एनएबीएच का प्री एक्रिडिएशन जारी किया था। एंट्री लेवल के बाद अब तक दो साल में इस अस्पताल को प्रोग्रेसिव लेवल हासिल कर लेना था। तब 2018 तक फाइनल सर्टिफिकेट दिया जाता, मगर इससे पहले ही अस्पताल प्रबंधन मानकों पर खरा नहीं उतर पाया।

3 जून 2017 से प्री एक्रेडिशन एन्ट्री लेवल सर्टिफिकेशन छिन ली गई है। अस्पताल को एनएबीएच प्रमाण पत्र के स्तर तक ले जाने के लिए प्रबंधन अब तक तकरीबन 25 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। अस्पातल में पहले सात सदस्यीय एक कोर कमेटी बनाई गई। फिर डॉक्टरों और सीनियर नर्सों का एक क्वॉलिटी मैनेजमेंट दल बनाया गया। जो पूरे अस्पातल स्टाफ को इसके लिए प्रेरित और प्रशिक्षित करते थे। अलग से एनएबीएच सेल का गठन किया गया था।

इसलिए भी फजीहत
१. बीते तीन-चार वर्षों में अस्पातल को स्वतंत्र नेतृत्व नहीं मिला। पांच-पांच डायरेक्टर बैठाकर जिम्मेदारी बांट दी गई। इससे चिकित्सकीय सेवाओं एवं सुविधाओं से संबधित किसी विषय पर ठोस निर्णय लेने के बजाए आपस में खींचतान मची रही।
२. चिकित्सा सेवा को भी संयंत्र की उत्पादन इकाई की तरह सीईओ ऑफिस से संचािलत किए जाने लगा। ओवर पॉवर होने से अस्पातल की व्यवस्थाएं बाधित होने लगीं।
३. अस्पातल में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अस्पातल व मरीज हित में निर्णय लेने के बजाए अपना टेन्योर पूरा करने प्रबंधन की चाटुकारिता करते रहे। जब भी कड़वे फैसले व निर्देश की पारी आती थी, यही सोचते कि मैं क्यों किसी की आलोचना का पात्र बनंू। सबके लिए अच्छा बने रहने की चाह ने अस्पताल का कबाड़ा कर दिया।

एनएबीएच के मानकों के आधार अस्पातल मेंं एथेक्सि कमेटी, फार्मेसी, इंफेक्शन कंट्रोल, स्टेरलाइजेशन, सेफ्टी, क्वालिटी एश्योरंस, मैनेजिंग एश्योरंस सहित 11 कमेटियां गठित की गई थी। ये कमेटियां गुणवत्ता पर नजर रखती थीं। जब से एनएबीएच की एंटी लेवल मान्यता समाप्त हुई है, अस्पताल में पूरी व्यवस्था फिर ढर्रे पर आ गई है। क्वालिटी कंट्रोल, प्रोसेस डॉक्यूमेंटेशन, पेशेंट डिलिंग सबकुछ फिर पहले जैसा हो है। नहीं तो अभी तक दवाइयां रखने से लेकर आईबी कैनुला लगाने और निकालने तक में मानदंड का पालन किया जा रहा था।

कभी मध्य भारत का सबसे बड़ा, लोगों का भरोसेमंद और जीवनदायिनी कहे जाने वाले सेक्टर-9 अस्पताल इन दुर्दिन के दौर से गुजर रहे हैं। यहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा रही है। उलटा प्रबंधन ने सार्वजनिक उपक्रम का संस्थान होने के बावजूद सभी प्रकार के इलाज शुल्क में निजी बड़े अस्पातलों से भी अधिक वृद्धि कर दी है। मरीजों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं हो रहा है। बेड खाली नहीं है, कहकर लौटा दिए जा रहे हैं। अब इस अस्पताल से लोगों को भरोसा उठ जाएगा।

100 मानकोंं के आधार पर मिलती है मान्यता
इसके लिए अस्पतालों में क्वालिटी कंट्रोल, मरीजों के अधिकार, उसका देखभाल, साफ-सफाई, रोकथाम, डिस्प्ले बोर्ड, मानव संसाधन, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कीपिंग, वेटिंग एरिया, मैनजमेंट ऑफ मेडिकेशन, फैसिलिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड सेफ्टी, मॉड्यूलर ओटी, सभी प्रोटोकॉल का पालन जैसी व्यवस्थाएं होना अनिवाार्य है। बोर्ड 100 मानकों और 500 बिंदुओं के आधार पर मान्यता देती है।

क्या है एनएबीएच
एनएबीएच का गठन क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से किया गया है। यह बोर्ड अस्पतालों के लिए चिकित्सकीय सेवाओं का मानक तय कर उनका मूल्यांकन करता है। मानकों में खरा उतरने वाले अस्पतालों को सबसे पहले एंट्री लेवल, इसके बाद प्रोग्रेसिव और बाद में फाइनल सर्टिफिकेट दिया जाता है।

जनसंपर्क, भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने बताया कि जेएलएनएच एवं आरसी को एनएबीएच द्वारा प्रदत्त प्री एक्रिडिशन एन्ट्री लेवेल सर्टिफिकेशन की समय सीमा 3 जून, 2017 को समाप्त हुई। एनएबीएच की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई है। प्रबंधन द्वारा पुन: प्री एक्रिडिशन एन्ट्री लेवेल सर्टिफिकेशन के साथ अन्य एनएबीएच एक्रिडिशन सर्टिफिकेशन प्राप्त करने का विचार किया जा रहा है।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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