स्लास्टर हाउस आधुनिकीकरण : पर्यावरण विभाग से इंसीनरेटर मशीन लगाने की अनुमति मिली है और न ही स्वास्थ्य सर्वे हुआ

स्लास्टर हाउस आधुनिकीकरण : पर्यावरण विभाग से इंसीनरेटर मशीन लगाने की अनुमति मिली है और न ही स्वास्थ्य सर्वे हुआ

Naresh Verma | Publish: Sep, 08 2018 09:50:13 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

निगम प्रशासन राधिका स्लास्टर हाउस के आधुनिकीकरण को लेकर जानकारी छुपा रहा है। आधुनिकीकरण के प्रोजेक्ट में कई खामियां है।

भिलाई. निगम प्रशासन राधिका स्लास्टर हाउस के आधुनिकीकरण को लेकर जानकारी छुपा रहा है। आधुनिकीकरण के प्रोजेक्ट में कई खामियां है। इसके बावजूद निगम प्रशासन गुपचुप तरीके से स्लाटर हाउस का आधुनिकीकरण करने जा रहा है ताकि रहवासी क्षेत्र के लोग इसका विरोध न कर पाए। निगम प्रशासन अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि स्लाटर हाउस में वध किए जाने वाले जानवरों के वेस्ट को कहां डिस्पोज किया जाएगा। आधुनिकीकरण का जो ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें वेस्ट को डिस्पोज करने इंसीनरेटर मशीन अनिवार्य है। स्लाटर हाउस में इंसीनरेटर मशीन लगाने से पहले क्षेत्रीय पयार्वरण विभाग की अनुमति और आसपास के रहवासियों का स्वास्थ्य सर्वे रिपोर्ट जरूरी है। इसके बिना छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल निगम इन्वायरमेंट सर्टिफिकेट (इसी) जारी नहीं कर सकता, लेकिन शासन ने पहले जिन एजेंसिायों को प्रोजेक्ट बनाने का ठेका दिया था उसने राधिका नगर, न्यू कृष्णा नगर के रहवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर कोई भी कार्य नहीं किया है। कार्यालय में बैठकर खाका तैयार कर शासन को भेज दिया गया। शासन से वैसे ही स्वीकृति मिल गई।

पर्यावरण विभाग से क्लीयरेंस नहीं?

स्लाटर हाउस के लिए निगम प्रशासन को पर्यावरण विभाग से ईन्वायरमेंट सर्टिफिकेट (ईसी.) नहीं मिला है। पहले निगम प्रशासन ने जामुल ट्रेचिंग ग्राउंड में इंसीनरेटर मशीन स्थापित करने के लिए विभाग में आवेदन भी किया था, लेकिन विभाग ने इंसीनरेटर से निकलने वाले धुआं से वातावरण प्रदूषण की वजह से अनुमति नहीं दी।

इसी मामले में भोपाल निगम पर एनजीटी ने लगाया था जुर्माना

इसी तरह के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) ने नगर पालिक निगम भोपाल प्रशासन पर जुर्माना लगाया था। स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ एनजीटी में आपत्ति दर्ज कराई थी। स्लाटर हाउस को शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग की थी। एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लिया। समय-सीमा में स्लाटर हाउस को शहर से बाहर शिफ्ट नहीं करने पर जुर्माना लगाया गया।

ऐसा है आधुनिकीकरण का प्रोजेक्ट

१७ करोड़ के प्रोजेक्ट के मुताबिक से स्लाटर लाइन मशीनों से एक साथ कई जानवरों का वध किया जाएगा। इसके अलावा हलाल और झटका सिस्टम से जानवरों का वध किया जाएगा। ८ घंटे के अंदर एक हजार से बकरे का हाइजीनिक तरीके से मांस तैयार किया जा सकता है। इसे रेफ्रिजरेटेड वैन से मार्केट में सप्लाई की जाएगी।
जानवरों के वेस्ट को डिस्पोज करने के लिए रेंडरिंग प्लांट, ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनें लगाई जाएगी।

प्लांट लगाने से ये दिक्कतें आएंगी

क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी मानते हैं कि शहर के भीतर रहवासी क्षेत्र में स्लाटर हाउस का संचालन से दिक्कतें हैं। रेंडरिंग प्लांट, ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनें पर्यावरण प्रदूषित होगा। इसका असर लोगों के सेहत पर पड़ेगा।

हर गली मोहल्ले में मटन चिकन सेंटर

अभी शहर के हर चौक-चौराहे पर खुलेआम बकरा काटकर बेचा जा रहा है। इसे बंद कराने के लिए लोग कई बार निगम प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अभी तक इस पर रोक नहीं लगी है। प्रोजेक्ट के मुताबिक स्लाटर हाउस का संचालन का ठेका किसी एजेंसी को दिया जाएगा। फिर एजेंसी अपने हिसाब से काम करेगी। इससे न तो खुलेआम बिक रहे मटन पर रोक लगेगी और न ही राधिका नगर के लोगों को बदबू की समस्या से राहत मिलेगी।

इस संबंध में क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण विभाग अजय सिंह मालू ने बताया कि शहर के अंदर इंसीनरेटर मशीन लगाने की अनुमति जारी नहीं हुई है। ऐसी मेरी जानकारी में है। अवकाश से आने के बाद ही अनुमति के बारे में स्पष्ट कह पाउंगा।

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