आखिर क्यों आईआर के गेट पर अधिकारियों को बुलाकर सौंपा चार्टर ऑफ डिमांड

Dakshi Sahu

Publish: Dec, 07 2017 04:33:58 (IST) | Updated: Dec, 07 2017 04:48:28 (IST)

Bhilai, Chhattisgarh, India
आखिर क्यों आईआर के गेट पर अधिकारियों को बुलाकर सौंपा चार्टर ऑफ डिमांड

भिलाई इस्पात संयंत्र की प्रतिनिधि यूनियन सीटू गुरुवार को आईआर विभाग के गेट पर पहुंची। जहां एचएसएलटी श्रमिक प्रदर्शन कर रहे हैं।

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र की प्रतिनिधि यूनियन सीटू गुरुवार को आईआर विभाग के गेट पर पहुंची। जहां एचएसएलटी श्रमिक प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर यूनियन नेताओं ने उनकी मांग का समर्थन किया और विभाग के अधिकारियों को गेट पर बुलावाया और वहीं चार्टर ऑफ डिमांड सौंपा।

सेल, आरआईएनएल, खान, स्टॉक यार्ड, ऑफिस, एमएसटीसी, एफएसएनएल के सभी कर्मचारी इस समझौते के तहत शामिल किए जाएंगे। इसकी अवधि 5 साल की होगी जो कि 1 जनवरी, 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक प्रभावी रहेगी। न्यूनतम मजदूरी के लिए 31 दिसंबर 16 को न्यूनतम मजदूरी 32,000 रुपए प्रति माह 1 जनवरी 17 से तय की जाए।

वर्तमान में सेल और साथ ही पूरे स्टील उद्योग कठोर स्थिति से गुजर रहा है। हर कर्मचारी तमाम तरह की कठिनाइयों के बावजूद कठिन परिश्रम कर रहा है। कर्मचारी अच्छे कार्यबल और बेहतर मानसिक स्थिति के माध्यम से कंपनी को उबारने में मदद कर सकता है और प्रतियोगियों से आगे बढ़ सकता है।

ऐसी हालात को पार करने की कगार पर हैं, तो कंपनी को श्रमिकों की जरूरतों को यथासंभव बेहतर तरीके से पूरा करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सीटू ने अपना मांग पत्र आईआर के माध्यम से लोकल प्रबंधन को सौंपा।

विनिवेश हो बंद
सेल के मजदूरों की पूरी बिरादरी, भद्रावती, सलेम और दुर्गापुर स्थित सेल इकाइयों की सामरिक बिक्री को रोकने के साथ-साथ इसके अलावा सेल, आरआईएनएल, एमईएल, बीआरएल, ओएमडीसी, एमएसटीसी, एफएसएनएल किसी भी पीएसयू के शेयरों का विनिवेश रोकने की मांग की है।

यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के हितों के खिलाफ है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निवेश, विस्तार और आक्रामक विपणन के माध्यम से एसएसपी, एएसपी और वीआईएसएल को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासनिक कदम उठाना चाहिए।
पीएसयू इकाइयों के लिए बेहतर शासकीय नीतियां बने यूनियन ने मांग किया है।

भारत सरकार को अपने टैक्स पॉलिसी और आयात शुल्क नीति की समीक्षा करने के लिए आगे आना चाहिए ताकि भारतीय इस्पात उद्योग अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ किसी भी देश के साथ प्रतिस्पर्धी हो । इसके साथ साथ निर्बाध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों की आवधिक नवीकरण और सुधार हो।

कंपनी के प्रबंधन के लिए डेमोक्रेटिक प्रक्रिया विकसित करने की आवश्यकता जताई गई।यह भी मांग रखी है कि एनजेसीएस को सबसे प्रभावी और नियमित संयुक्त सलाहकार मशीनरी बनाना चाहिए। सभी पौधों, खानों, सीएमओ, कार्यालयों और अन्य सभी प्रतिष्ठानों में प्रमुख यूनियनों से प्रतिनिधित्व के साथ संयुक्त परामर्शदात्री समितियों को प्रभावी बनाया जा सकता है।

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