संयुक्त यूनियन की आपत्ति के बाद, सीटू ने की सीपीएफ ट्रस्ट से हटने की पेशकश, मचा हड़कंप

सीटू ने संयुक्त यूनियन की ओर से उठाए जा रहे सवाल के बाद प्रबंधन से कहा है कि यूनियन से दो दिन में चर्चा कर बताए। सीटू सीपीएफ ट्रस्ट से हटने को तैयार है। अब संयुक्त यूनियन के नेता सकते में आ गए हैं।

By: Naresh Verma

Published: 15 Nov 2018, 12:26 AM IST

भिलाई . सीटू ने संयुक्त यूनियन की ओर से उठाए जा रहे सवाल के बाद प्रबंधन से कहा है कि यूनियन से दो दिन में चर्चा कर बताए। सीटू सीपीएफ ट्रस्ट से हटने को तैयार है। अब संयुक्त यूनियन के नेता सकते में आ गए हैं। सीटू के हटने से कर्मियों की सुविधा पर सीधा असर पड़ेगा। प्रबंधन को चार यूनियनों ने सीटू के कार्यकाल खत्म होने के बाद भी सीपीएफ ट्रस्ट में पहले की तरह शामिल रहने पर सवाल खड़ा किया था। जिसका जवाब सीटू ने उस सहमति पत्र की प्रतिलिपि के साथ दिया है।

25 करोड़ का भुगतान प्रभावित होगा

सीटू की आेर से जारी बयान में कहा गया है कि भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन में पिछले मान्यता चुनाव से पहले संयंत्र में कार्यरत 10 यूनियन ने उप मुख्य श्रमायुक्त को 4 जनवरी 2016 को एक सर्वसम्मति पत्र पर हस्ताक्षर किया था। जिसके मुताबिक मान्यताकाल पूरा हो जाने के बाद भी अगले चुनाव तक मान्यता प्राप्त यूनियन सभी संविधिक द्विपक्षीय समितियों में प्रतिनिधित्व करता रहेगा। इस सहमति का मूल उद्देश्य यह था कि कर्मियों का कोई काम प्रभावित न हो। सीपीएफ ट्रस्ट का कर्मियों के लिए बेहद संवेदनशील और अहम योगदान रहता है। इसीलिए सीटू के ट्रस्टी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह पूरी कर्ताव्यष्ठिा से कर रहे थे। इसके बाद भी अगर यूनियन चाहे तो वे सीपीएफ ट्रस्ट से हटने को तैयार हैं। इससे कर्मियों को दिए जाने वाला करीब २५ करोड़ का भुगतान प्रभावित होगा।

सेवानिवृत्ति के दिन मिल जाती है सीपीएफ की राशि

सीटू ने सीपीएप ट्रस्ट सुधारों को अंतिम भुगतान के लिए फार्म भरने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है तथा सेवानिवृत्ति कर्मी के खाते में उसकी संपूर्ण राशि का भुगतान सेवानिवृत्ति की तिथि को ही करने का प्रावधान किया गया है।

अटकेगा करोड़ों का निवेश

प्रोविडेंट फंड के नियमानुसार डीए व बेसिक का 12 फीसदी हर कर्मचारी तथा अधिकारी का ट्रस्ट में जमा करना अनिवार्य होता है। इस मद में करीब 50 से 60 करोड़ की राशि कर्मियों के प्रोविडेंट फंड की कटौती के रूप में हर माह जमा होते हैं। इसके अलावा ब्याज तथा ऋण का मूलधन मिलाकर यह राशि कम से कम 100 करोड़ के पास पहुंच जाएगी। कर्मचारियों के प्रतिनिधि ट्रस्टी नहीं होंगे तो इस धनराशि का निवेश नहीं हो पाएगा और इससे करोड़ों का मासिक नुकसान होगा।

रुक जाएगा कर्मियों को दिए जाने वाला २५ करोड़ का लोन

सीपीएफ ट्रस्ट नियम से कर्मचारियों को दिए जाने वाले टेप्ररी लोन व नॉन रिफंडेबल लोन की स्वीकृति तभी हो सकती है, जब मैनेजमेंट का एक ट्रस्टी तथा श्रमिकों का एक प्रतिनिधि ट्रस्टी उसे अधिकृत करे। ऐसी स्थिति में कर्मियों तथा अधिकारियों के करीब 25 करोड़ रुपए के लोन रुक जाएंगे। कार्मिकों के तय शादी- ब्याह और बच्चों के फीस जैसे अहम कार्य धनाभाव में रुक जाएंगे।

किसी भी ट्रस्टी को हटाने की बात भ्रामक

किसी भी ट्रस्टी को हटाने संबंधी आरोप को सीटू ने सिरे से खारिज किया है, उनका कहना है कि ट्रस्ट के नियमानुसार मान्यता प्राप्त यूनियन के तीन प्रतिनिधि बतौर ट्रस्टी कार्य कर रहे थे। शेख महमूद भी मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू, भिलाई के नामित प्रतिनिधि के रूप में ट्रस्टी थे। उन्होंने सीटू, भिलाई की सदस्यता छोडऩे की घोषणा कर त्यागपत्र दिया। इस स्थिति में वे मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू, भिलाई के नामित प्रतिनिधि के रूप में ट्रस्टी रहने की पात्रता भी खुद खो चुके हैं। ऐसी स्थिति में प्रबंधन द्वारा यह सूचना जारी करना कि शेख महमूद ट्रस्टी की तरह कार्य नहीं करेंगे एक सामान्य वैधानिक प्रक्रिया है।

Naresh Verma
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