टाउनशिप की बदहाली पर खामोश है BSP अधिकारी, इधर मैत्रीगार्डन को संवारने शुरू की मुहिम

प्रबंधन ने पहले से यहां कर्मियों की संख्या को कम किया है, बावजूद इसके यहां अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग कर व्यवस्था को बेहतर करने में लगे हैं। वहीं टाउनशिप में हालात खराब हैं।

Dakshi Sahu

September, 1303:10 PM

Bhilai, Chhattisgarh, India

भिलाई. मैत्रीबाग प्रबंधन ने गार्डन में झाडिय़ों की सफाई करना शुरू कर दिया है। गुरुवार को मुख्यमार्ग के एक हिस्से की न सिर्फ सफाई की गई, बल्कि पेड़ों को भी खूबसूरत आकार दिए। गार्डन के सभी मार्ग में मौजूद झाडिय़ों को इस तरह से साफ करने की योजना है।

टाउनशिप में हालत खराब
प्रबंधन ने पहले से यहां कर्मियों की संख्या को कम किया है, बावजूद इसके यहां अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग कर व्यवस्था को बेहतर करने में लगे हैं। वहीं टाउनशिप में हालात खराब हैं। जवाहर उद्यान से सेक्टर-5 मंदिर आने वाले मार्ग में सफाई का काम शुरू कर अधूरा छोड़ दिया गया है। 7 मिलेनियम चौक से सेक्टर-6 मार्केट आने वाले मार्ग की स्थिति खराब है। यहां पेड़ घरों के भीतर तक पहुंच रहे हैं।

नील गाय का मैत्रीबाग में हो रहा बंगला तैयार
मैत्रीबाग प्रबंधन नील गाय की बढ़ती संख्या को देखते हुए, करीब आधा एकड़ के बाड़े को अलग-अलग घेरा कर रहा है। इससे पर्यटक भी नील गाय को करीब से देख सकेंगे और नील गाय के हर पेयर को पर्याप्त स्थान मिलेगा। एक बड़े बाड़े को ६ हिस्से में बांटा जा रहा है। इसके लिए एक टीम लगातार काम में जुटी है।

बोकारो जू से लाए थे एक पेयर नील गाय
मैत्रीबाग प्रबंधन ने करीब सात साल पहले बोकारो के जू से एक पेयर नील गाय लेकर आया था। प्रबंधन ने इसके बदले में सफेद बाघ का जोड़ा दिया था।बेहतर देखभाल की वजह से इसकी संख्या में धीरे-धीरे इजाफा हो गया। अब मैत्रीबाग में चार जोड़ा नील गाय हैं। चार नर व चार मादा को प्रबंधन अब अलग-अलग पेयर में रखने का इंतजाम कर रहा है। इस काम को प्रबंधन तेजी से पूरा कर रहा है।

पर्यटक भी देख सकेंगे करीब से नील गाय को
मैत्रीबाग के संचालक डॉक्टर एनके जैन ने बताया कि व्यवस्था को बेहतर करने यह कोशिश की जा रही है। अब पर्यटक सामने से भी नील गाय को देख सकेंगे। जल्द ही यह केज तैयार हो जाएगा।

सुबह छोड़ रहे हैं सफेद बाघ के बच्चों को
मैत्रीबाग प्रबंधन सुबह के समय सफेद बाघ के बच्चों को कुछसमय के लिए छोड़ता है। इन शावकों के नखरों को सुबह के समय आने वाले पर्यटक देख सकते हैं। दोपहर बाद बच्चों को जब मां (गंगा) के साथ भीतर कर दिया जाता है। तब सुल्तान को इस केज ही में बाहर किया जाता है। अलग-अलग समय में सफेद बाघ को छोड़ा जा रहा है, ताकि पर्यटक बच्चे और बड़े दोनों बाघ को देख सकें।

Dakshi Sahu
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