सेल बीएसपी में फिर से वीआर स्कीम लागू, यूनियन ने जताई आपत्ति

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआर स्कीम) को लेकर सर्कुलर फिर जारी किया है।

By: Abdul Salam

Published: 25 Apr 2018, 12:14 AM IST

भिलाई. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआर स्कीम) को लेकर सर्कुलर फिर जारी किया है। प्रबंधन हर हाल में उत्पादन के लागत को कम करने के लिए इस दिशा में ठोस पहल कर रहा है। प्रबंधन की इस पॉलिसी के विरोध में सीटू आ गई है। भिलाई इस्पात संयंत्र में पहले ही कर्मियों की कमी का रोना हर विभाग में रोया जा रहा है, इस बीच कर्मियों को वीआर के माध्यम से बाहर करने से बड़ी दिक्कत खड़ी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

इस मामले में प्रबंधन की योजना का विरोध करते हुए सीटू ने कहा कि एक तरफ भिलाई इस्पात संयंत्र सहित सेल की सभी इकाइयां कर्मियों की संख्या पहले ही कम होने का मार झेल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रबंधन वीआर स्कीम को ले आकर कर्मियों की छटनी कर संयंत्र के अंदर समस्या को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

यह है सर्कुलर में
सेल ने 23 अप्रैल 2018 को एक सर्कुलर जारी करते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की स्कीम लागू किया है। जिसमें कर्मियों की न्यूनतम सेवा अवधि 15 वर्ष व न्यूनतम आयु 45 साल रखी गई है। इसको 1 मई 2018 से लागू किया जाएगा, 30 जून 2018 तक जारी रहेगा।

आउट सोर्स को प्रोत्साहित करना है उद्देश्य
यूनियन का कहना है कि इसका मूल उद्देश्य प्रबंधन ने मानव संसाधन, उत्पादकता गुणवत्ता, उत्पादन लागत में कमी और कार्य शैली में सुधार बताया है। हकीकत उद्देश्य कुशल मानव संसाधन को कम कर आउट सोर्स को प्रोत्साहित करना प्रतीत होता है।

वीआर से गिना रहे हैं फायदा
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मियों को प्रतिपूर्ति के रूप में किए गए सेवा अवधि का 35 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से व बचे हुए कार्यकाल का 25 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से किया जा रहा है जो न्यूनतम 25000 व अधिकतम 250 दिन कि राशि (जो इसमें से अधिक हो) दिया जाएगा। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति राशि की गणना करीब के आधार पर तय की जाएगी। अर्थात जिन कर्मियों का अधिक कार्यकाल बचा हुआ है उनका सीधा नुकसान होना तय है।

केवल मूल वेतन व महंगाई भत्ते पर होगी गणना
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति स्कीम में वेतन से तात्पर्य केवल मूल वेतन व महंगाई भत्ते को माना गया है, इसमें किसी अन्य तरह के भत्ते को शामिल नहीं किए हैं। जो कि निश्चत ही कर्मियों का एक बड़ा नुकसान है।

लंबित वेतन समझौते का जिक्र नहीं
सीटू के महासचिव डीवीएस रेड्डी ने कहा है कि इस वीआर स्कीम में लंबित वेतन समझौते से मिलने वाले के किसी भी लाभ का का उल्लेख सर्कुलर में नहीं किया गया है, जो कि 1 जनवरी 2017 से लंबित है। इससे साफ है कि इस स्कीम से सेल के कर्मियों का फायदे की अपेक्षा नुकसान ज्यादा होगा, जिसका विरोध किया जा रहा है।

Abdul Salam
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