भिलाई इस्पात संयंत्र ने बिना ओपन टेंडर निकाले दिया काम, हो रहा करोड़ों का नुकसान

आर्थिक मंदी में यह कैसा ऑपरेशनल कांट्रेक्ट.

By: Abdul Salam

Published: 29 Jun 2020, 09:01 PM IST

भिलाई. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने बढ़ते घाटे को देखते हुए नए टेंडर पर रोक लगाने कहा है। वहीं दूसरी ओर भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के एक-एक फैसले से बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। बीएसपी के पास लोको की कमी नहीं थी, इसके बाद भी एक कंपनी से किराए में 6 लोको ले लिया। अब ठेका खत्म हुआ, तो लोको लौटा दिया, लेकिन ऑपरेशनल कांट्रेक्ट उसके साथ कर मोटी रकम उसे दिया जा रहा है। इससे उस काम पर खर्च तीन गुना अधिक लग रहा है। साफ है इससे बीएसपी को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।

पहले यहां लिए गलत फैसला
भिलाई इस्पात संयंत्र के पास खुद की करीब 93 लोको हैं। इसके बाद भी प्रबंधन ने राइट्स कंपनी से 6 लोको किराए पर लिया था। इसमें ईंधन खुद बीएसपी डालता था। बीएसपी ने ब्लास्ट फर्नेस-8 में चलने के लिए इन लोको को किराए पर लिया। सवाल उठता है कि जब पहले ही बीएसपी के पास इतनी लोको है और बहुत सारी वैसे ही खड़ी है। तब किराए पर लोको लेने की क्या जरूरत थी। अब लोको लौटा दिए तब भी काम चल रहा है। जब लोको नहीं लेते, तब भी काम चलता। इसके लिए हर माह करीब 1 करोड़ और 18 माह में 18 करोड़ दिए.

अब लिए यहां गलत फैसला
बीएसपी के अफसरों ने राइट्स की लोको लौटा दिया। इसके बाद वहां लोको संचालन के लिए ओपन टेंडर किया जाना था। जिससे बीएसपी के हर स्टेशन में जिस तरह से लोको संचालन के लिए टेंडर के दौरान प्रतिस्पर्धा होती है, उस नियम के तहत ठेका किया जाता। बीएसपी के अधिकारियों ने यह नहीं किया, बल्कि राइट्स के साथ ऑपरेशनल कांट्रेक्ट कर लिया। ओपन टेंडर के स्थान पर ऑपरेशनल कांट्रेक्ट किया जाना सही नहीं था।

बीएसपी को हो रहा बड़ा नुकसान
अफसरों के इस फैसले से बीएसपी को बड़ा नुकसान हुआ। ओपन टेंडर में प्रतिस्पर्धा के बाद जहां एक लोको का संचालन करने के एवज में बीएसपी को ठेकेदार को महज 2,500 रुपए देना होता है। वहीं राइट्स के साथ किए गए ऑपरेशनल कांट्रेक्ट में बीएसपी सीधे कंपनी को एक लोको संचालन करने का 9,000 रुपए दे रही है। एचएससीएल वर्तमान में 2,500 रुपए प्रति लोको की दर से लोको का संचालन कर रहा है। अगर वह 5 लोको चलाता है, तो उसे करीब साल का 45 लाख देना होगा। वहीं बिना ओपन टेंडर के राइट्स से काम करवाते हैं तो उसे 1.6 करोड़ रुपए 5 लोको चलवाने का देना होगा। इस तरह से जो काम 45 लाख में किया जा सकता था, उसे बीएसपी 1.6 करोड़ में करवा रही है। इससे सवाल उठता है कि प्रबंधन के हित में फैसला लेने की जगह, इस तरह के फैसले क्यों लिए जा रहे हैं।

बीएसपी कर्मियों से चलवाएं लोको
बीएमएस के डीजीएस निर्मल मिश्रा ने कहा कि बीएसपी में एसएमएस-1, बीबीएम सभी बंद होते जा रहे हैं। स्टील स्टेशन में 70 लोको ऑपरेटर और उतने शंटिंग स्टॉफ हैं। बीएसपी यहां के नियमित कर्मियों का इस्तेमाल ब्लास्ट फर्नेस-8 में अपनी लोको पर कर सकती है। यह सुरक्षित भी होगा।

राइट्स को दिया ऑपरेशन कांट्रेक्ट
बीएसपी के जनसंपर्क विभाग के मुताबिक पहले संयंत्र का राईट्स के साथ वेटलीज अनुबंध था। जिसके तहत राईट्स के लोको को संयंत्र ने लीज पर लिया हुआ था और इसे राईट्स के ही कर्मी चला रहे थे। वर्तमान में राईट्स के साथ आपरेशनल कांट्रेक्ट किया हैं, जिसमें अब संयंत्र के लोको को राईट्स के स्टाफ चला रहे हैं।

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