बीएसपी में अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में ठोस संशोधन की जरूरत ... वर्ना शव जिला प्रशासन व संयंत्र प्रबंधन के कांधों में पहुंचेगा मुक्तिधाम

केंद्रीय जनजाती आयोग से पीडि़त परिवार ने लगाई गुहार.

By: Abdul Salam

Published: 17 Feb 2021, 11:42 PM IST

भिलाई. बीएसपी कर्मी कार्तिकराम ठाकुर का मंगलवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। बावजूद इसके उनकी पत्नी आसन ठाकुर व समाज के लोग अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। बुधवार को वे अपने अधिकार की मांग को लेकर राज्यपाल से मिलने का समय मांगने रायपुर पहुंचे। इसके साथ-साथ केंद्रीय जनजाती आयोग के पास भी गुहार लगाने गए। जहां तमाम जानकारी प्रकरण के संबंध में दी। इसके बाद सेक्टर-1 मुर्गा चौक में प्रदर्शन भी किया।

अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में हो संशोधन
भिलाई इस्पात संयंत्र में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर मौजूदा नियमों में ठोस बदलाव की जरूरत है। जिससे संयंत्र कर्मचारी की मौत होते ही अनुकंपा नियुक्ति का प्रोसेस एक सामान्य कर्मचारी भी पूरी कर सके। नियमों में संशोधन करते हुए नियमित कर्मी की मौत किसी भी हाल में और कहीं भी होती है तो अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान होना चाहिए। इसे यूनियन नेता चुनावी मुद्दा न बनाकर केंद्र के श्रमिक नेताओं से कहकर एनजेसीएस की बैठक में लेकर आए। तब जाकर इसमें सुधार हो पाएगा। जब भी कर्मचारी की मौत होती है। तब तमाम यूनियन के नेता इस पर बड़ी-बड़ी बात कहते हैं और जब मामला सुलझ जाता है तब उसके बाद सभी चुप बैठ जाते हैं। अब तक अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में सुधार को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

पहले मिलती थी सामान्य मौत पर भी अनुकंपा नियुक्ति
सेल, बीएसपी में 1 जनवरी 1989 से पहले किसी भी तरह से कर्मचारी की मौत पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान था। इसे बाद में प्रबंधन और यूनियन ने मिलकर समझौता के दौरान परिवर्तित कर दिया। जिसका नुकसान कर्मचारियों को इस तरह हो रहा है कि पत्नी अपने पति का आखिरी मर्तबा चेहरा नहीं देख सकी।

अब उलझ रहा परिवार
अप्रैल 2015 से अब तक करीब 45 प्रकरण अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रोसेस में है। अब तक इसमें से किसी को भी नियुक्ति नहीं दी गई है। इसके अलावा दर्जनों ऐसे हैं, जिनके हाथ मेडिकल अनफिट का प्रमाण पत्र नहीं लगने की वजह से वे प्रक्रिया में आगे बढ़े ही नहीं हैं। प्रबंधन अनुकंपा नियुक्ति के लिए संयंत्र कर्मचारी को गंभीर किडनी की बीमारी, पार्किंसन, एवडांस कैंसर, सौ फीसदी अपंगता, असाध्य मानसिक रोग, गंभीर फेफड़ों की बीमारी जैसे रोगों को शामिल किया है।

यह है मेडिकल अनफिट प्रोसेस
बीएसपी कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार होने के बाद अपने को मेडिकल अनफिट (स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य) घोषित करने के लिए विभाग प्रमुख को आवेदन देता है। विभाग प्रमुख इस आवेदन को कार्मिक विभाग के माध्यम से व्यवसायिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र भेजता है। व्यवसायिक स्वास्थ्य केन्द्र आवेदन को प्राथमिक परीक्षण के बाद बीमार कार्मिक को वापस जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, सेक्टर-9 भेज देता है। बीमार कर्मचारी संबंधित चिकित्सक से एपाइंटमेंट लेकर परीक्षण करवाता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर बीमार कर्मी को मेडिकल बोर्ड में उपस्थित होने का आर्डर जारी किया जाता है। माह में एक बार होने वाले मेडिकल बोर्ड की बैठक में उस प्रस्ताव को रखा जाता है। जहां पर बीमार को मौजूद रहना होता है। इस पूरी प्रक्रिया में उसे करीब एक से दो माह का समय लग जाता है। बीमार कर्मी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मानसिक व शारीरिक पीड़ा से गुजरता है। इस बीच अगर बीमार की मौत हो जाती है और उसके परिवार के हाथ स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य घोषित वाला प्रमाण पत्र नहीं है, तो दस्तावेज पूरा नहीं होने की बात कहते हुए अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाती है।

अनुकंपा नियुक्ति में यहां होती है दिक्कत
- स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के नियमानुसार पीडि़त के जिस सदस्य का नाम आवेदन में अनुकंपा नियुक्ति के तहत नौकरी देने के लिए दिया जाता है, उसको कम से कम 12 वीं पास होना अनिवार्य है। इससे कम शिक्षा वाले को अनुकंपा के तहत नौकरी नहीं दी जाती है।
- अनुकंपा में उम्र भी बड़ी बाधा खड़ी करती है। आवेदक का 18 साल से अधिक उम्र होना चाहिए। वहीं 35 साल से कम होना जरूरी है। 2014 के गैस हादसा में सेमुअल की जान चली गई, उनके परिवार में पत्नी नौकरी करना चाहती थी, लेकिन 35 साल से अधिक उम्र होने का हवाला देकर प्रबंधन ने नौकरी देने से इंकार कर दिया।
- बीएसपी के दस्तावेजों में नामिनी के स्थान पर नाम जरूरी है। पत्नी का नाम सर्विस बुक, सीपीएफ, मेडिकल बुक, बीमा तमाम जगहों में देखे जाते हैं। इसके बाद बच्चों के नाम भी देखा जाता है। बीएसपी में कई प्रकरण में कर्मचारियों के परिवारों को दो-दो विवाह करने की वजह से अनुकंपा में दिक्कत होती है।
- बीएसपी में कर्मचारी के बच्चे ने चाहे शिक्षा डॉक्टर, इंजीनियरिंग, सीए की कर ली हो, लेकिन अनुकंपा नियुक्ति एस-6 ग्रेड में दिया जाता है। इस तरह अधिक शिक्षा हासिल कर लेने वाले भी श्रमिक के तौर पर अनुकंपा नियुक्ति लेने से मना कर देते हैं। वे शिक्षा के मुताबिक सम्मानजनक पद की मांग करते हैं।
- बीएसपी में अनुकंपा को लेकर हमेशा से विवाद होता रहा है। 2002 में प्रबंधन ने बिना कोई कारण बताए अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति के पात्र आश्रितों के परिवार से संघर्ष किया, तब उनकी ज्वाइनिंग 2010 में हुई। प्रबंधन ने तब सभी की योग्यता को दर किनार कर एस-1 ग्रेड में ज्वाइन करवा दिया।

अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत
सीटू के महासचिव एसडी डे ने कहा कि अनुकंपा नियुुक्ति देने की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। इस मामले को विभिन्न स्तर पर सीटू ने उठाया है। जिन बीमारियों में अनुकंपा नियुक्ति दी जानी है, अगर अनफिट प्रक्रिया पूरी होने से पहले मौत हो जाती है तो भी उसमें अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए।

चार्टर ऑफ डिमांड में है शामिल
इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू ने बताया कि एनजेसीएस में दिए गए चार्टर ऑफ डिमांड में कहा गया है कि सेवाकाल के दौरान सामान्य मौत होने पर भी परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। इसमें जिस तरह से शर्तों को रखा गया है, उसे भी हटाने की मांग की गई है।

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