बीएसपी के कर्मचारी क्यों करने जा रहे संसद भवन के सामने प्रदर्शन करने

बीएसपी के कर्मचारी क्यों करने जा रहे संसद भवन के सामने प्रदर्शन करने

Abdul Salam | Publish: Sep, 03 2018 06:12:00 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

रामलीला मैदान से रैली मार्च करते हुए संसद भवन के सामने पहुंचेगी, जहां प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें करीब 5 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

भिलाई. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) कर्मियों के वेतन समझौते में रोक समेत अन्य केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन होना है। इसमें शामिल होने के लिए भिलाई से बड़ी संख्या में सीटू के कार्यकर्ता दिल्ली रवाना हुए हैं। बुधवार को रामलीला मैदान से रैली मार्च करते हुए संसद भवन के सामने पहुंचेगी, जहां प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें करीब 5 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

रणनीति के तहत किया जा रहा प्रदर्शन
सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सीटू का संघर्ष निरंतर जारी है। उद्योग और कर्मियों तथा आम जनता के हितों की रक्षा के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कंवेंशन, प्रदर्शन, परिवार सहित धरना, दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना, 9, 10, 11 नवंबर 2017 को संसद के सामने महापड़ाव किए थे। 7, 9 अगस्त 2018 को देशभर में सामूहिक गिरफ्तारी, स्वतंत्रता दिवस के पूर्व रात्रि में 14 अगस्त को सामूहिक जागरण के बाद 5 सितंबर को दिल्ली में किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन किया जा रहा है।

जागरण कार्यक्रम होगा 28 को
छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल स्व. बलराम दास जी टंडन के आकस्मिक निधन के कारण छत्तीसगढ़ में सामूहिक जागरण के कार्यक्रम को स्थगित कर दिए थे। भिलाई में यह कार्यक्रम अब भगत सिंह जयंती के मौके पर 28 सितंबर 2018 को होगा।

इस्पात उद्योग पर संकट
केंद्र सरकार की नीतिययों की वजह से लागत मूल्य से कम कीमत पर इस्पात का आयत हुआ, उच्च परिवहन शुल्क, उच्च बिजली दर, विभिन्न प्रकार के उपकर, भारत में इस्पात की निम्न प्रति व्यक्ति खपत (62किलो ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष) के कारण इस्पात उद्योग संकट में है।

वेतन समझौता में बाधा
प्रधानमंत्री कैबिनेट ने डीपीई के माध्यम से जारी सार्वजनिक उपक्रमों के वेतन समझौता करने के जारी निर्देश जिसमें पिछले 3 साल में लाभ अर्जित करना आवश्यक है। तीन साल के बाद समझौते की समीक्षा कर लाभ ना होने पर वेतन की वसूली. वेतन इजाफा की अधिकतम सीमा विगत 3 साल के औसत लाभ का 20 फीसदी होगी। सेल पेंशन योजना पर 4 वर्ष पूर्व हुए समझौते को लागू करने के लिए लाभ कमाने की योजना पेश करनी है।

दवाओं के दर में इजाफा
सूचीबद्ध दवाओं को 140 से घटाकर 70 कर दवा निर्माताओं को अकूत मुनाफा कमाने की छूट दी गई। गैर सूचीबद्ध दवाओं में शामिल जीवन रक्षक दवाएं मूल्य नियंत्रण से बाहर हैं।

योजना आयोग को किया भंग
सरकार ने भारत रूपांतरण के नाम पर योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन किया और 74 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विनिवेशीकरण बेचने का निर्णय लिया। सेल की टाउनशिप तथा विशेष इस्पात संयंत्र के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू।

पीपीपी मॉडल पर भी उठ रहे सवाल
सीटू के अध्यक्ष एसपी डे ने बताया कि सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत सरकारी उपक्रमों सहित हॉस्पिटल में सरकार पूंजी निवेश करके, प्रबंधन निजी हाथों को सौंप रही है। सस्ती भूमि और रियायतें देकर नीति आयोग ने निजी कारोबारियों को मेडिकल कॉलेज खोलने प्रोत्साहन दिया जा रहा है। भारतीय चिकित्सा परिषद के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का गठन प्रस्तावित है, जिसका उद्देश्य जनता के स्वास्थ्य के लिए उचित चिकित्सा पद्धत्ति तय करने वाली इस संस्था में निजी कारोबारियों के चहेतों को नामित किया जा सके। पीएफ के बाद अब ईएसआई और श्रमिक कल्याण कोष को भी शेयर बाजार निवेश किया जाएगा।

ठेका कर्मियों का अमानवीय शोषण
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि कानून, साप्ताहिक अवकाश अधिनियम, समान कार्य के लिए समान वेतन जैसे वर्तमान श्रम कानूनों पालन नहीं होने से ठेका कर्मी पहले से ही अमानवीय शोषण के शिकार है। आउटसोर्सिंग के बाद अब वे ठेका कर्मी नहीं रह पाएंगे और सभी कानूनी अधिकारों से वंचित हो जाएंगे ।
- किसानों को नहीं मिल रहा अपनी उपज का समर्थन मूल्य।
- बीमा आधारित योजनाएं।
- बैंक संकट में हैं, बड़े ऋणधारियों के ऋण नहीं चुकाने से बैंक कर्मियों का वेतन समझौता रुका।
- नोटबंदी कालेधन पर प्रहार के नाम पर की गई नोट्बंदी वास्तव में आम जनता की रोजी-रोटी पर हमला था।
- जीएसटी के माध्यम से आम जनता पर कर का बोझ थोपने के उदाहरण हैं, पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से बाहर रखकर व दवाओं को जीएसटी के दायरे में रखना।

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