कोरोना ने छीन लिया परिवार का सहारा, अनुकंपा नियुक्ति के लिए भूख हड़ताल पर बैठे मृत BSP कर्मियों के बेटे-बेटियां

मृत कर्मियों के बेटे- बेटियां संयंत्र आने-जाने वाले हर कर्मी से हाथ जोड़कर बेहद भावुक अपील कर रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाने कर्मियों से समर्थन और सहयोग मांग रहे हैं।

By: Dakshi Sahu

Published: 22 Jul 2021, 12:31 PM IST

भिलाई. कोविड-19 महामारी से मृत बीएसपी कर्मचारियों (Bhilai steel plant) के आश्रित परिवार 15 जुलाई से इक्विपमेंट चौक सेक्टर-1 में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मृत कर्मियों के बेटे- बेटियां संयंत्र आने-जाने वाले हर कर्मी से हाथ जोड़कर बेहद भावुक अपील कर रहे हैं। अपनी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति का जिक्र करते अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाने कर्मियों से समर्थन और सहयोग मांग रहे हैं। बेटे- बेटियां कह रहे हैं हमारे पिता आप कर्मचारियों के साथ ही काम करते थे। वह आपके मित्र या सहयोगी रहे होंगे। मार्च से मई 2021 के बीच 4000 से भी अधिक कर्मचारी और अधिकारी संक्रमित हुए। इनमें 200 से भी अधिक कार्मिकों की जान चली गई। इनमें हमारे पिता भी शामिल हैं। संक्रमण बढऩे की वजह 2020 में कोरोना की पहली लहर के दौरान जिस तरह रोस्टर सिस्टम लागू कर कर्मियों को संक्रमित होने से बचाया गया, दूसरी लहर की विभीषिका में प्रबंधन ने ऐसा बिलकुल नहीं किया, लिहाजा हमारे पिता को अपनी जान गंवानी पड़ी। उत्पादन भी कम नहीं किया। एक स्थान पर ज्यादा कर्मी एकत्रित होने के कारण संक्रमण में वृद्धि हुई।

उचित इलाज के अभाव में हुई मृत्यु
मृत्यृ से पूर्व पिता से प्राप्त जानकारी के अनुसार वे संयंत्र के शिफ्ट रूम, कंट्रोल रूम और रेस्ट रूम से ही संक्रमित हुए थे। उस समय सेक्टर-9 अस्पताल की बइदंतजामी किसी से छुपी नहीं है। उचित इलाज के अभाव में हमारे पिता की मृत्यु हुई है। जिसे हम परिजन ने प्रत्यक्ष देखा है। ऐसी विषम परिस्थितियों से गुजरने के बाद हमें अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हमारे ऊपर कर्मचारी परिवार हित लाभ योजना लेने दबाव बनाया जा रहा है, तथा हमारे अंतिम भुगतान को रोका जा रहा है।

जब बच्चों की उच्च शिक्षा व विवाह और घर बनाने की समय आया तो कोरोना ने छीन लिया
इस महामारी में जान गंवाने वाले अधिकतर कार्मिकों की उम्र 52 से 58 वर्ष के बीच है। उम्र के इस पड़ाव में कार्मिकों के पास तीन प्रमुख जिम्मेदारी होती है। बच्चों की उच्च शिक्षा, बच्चों का विवाह और सेवानिवृत्त होने के पूर्व स्वयं का आशियाना। इन तीनों जिम्मेदारियों के बीच हमारे पालक कुछ पूरी कर पाए हैं, कुछ छोड़ गए हैं। अधिकांश पालकों ने इन जिम्मेदारियों के लिए नॉन रिफंडेबल लोन (एनआरएल ) लिया है। यदि वे जीवित रहते तो इसकी भरपाई सेवानिवृत्त तक कर लेते। वर्तमान में आश्रित परिवार को मिलने वाली अंतिम भुगतान की राशि परिवार की सभी जिम्मेदारियों को पूर्ण करते हुए घर खर्च के लिए पर्याप्त नहीं है।

यह चाहते हैं मृत कर्मियों के परिजन
1 कोविड-19 महामारी से मृत कर्मियों के एक आश्रित को नि:शर्त अनुकंपा नियुक्ति।
2 जिन मृत कर्मियों के नाम बीएसपी के आवास आवंटित है एवं उनका कोई अन्य आशियाना नहीं है, उन परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था होने तक आवास रखने की सुविधा प्रदान की जाए।
3. आवास के लिए ईएफबीएस की बाध्यता समाप्त की जाए।
4. मृत कर्मियों के आश्रित जिनको बीएसपी हॉस्पिटल में पूर्व रेफरल सुविधा प्राप्त है उनका इलाज जारी रखा जाए।
5. वर्तमान में संयंत्र प्रबंधन द्वारा अंतिम भुगतान रोका जाना उचित नहीं यदि अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है हमारी सभी मांगे स्वमेव पूर्ण हो जाएगी।

Dakshi Sahu
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