हाई स्पीड कार्गो और मेट्रो ट्रैक में बिछाने हेड हार्डेन रेलपांत का उत्पादन करेगा BSP, जर्मन विशेषज्ञों की निगरानी में ट्रायल शुरू

Bhilai Steel Plant में हेड हार्डेन रेलपांत उत्पादन के लिए जर्मन तकनीक से लैस मशीनों को संचालित करने के लिए छह सदस्यीय जर्मन एक्सपर्ट की टीम एक बार फिर भिलाई पहुंच चुकी है।

By: Dakshi Sahu

Published: 14 Sep 2021, 11:39 AM IST

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में हेड हार्डेन रेलपांत उत्पादन के लिए जर्मन तकनीक से लैस मशीनों को संचालित करने के लिए छह सदस्यीय जर्मन एक्सपर्ट की टीम एक बार फिर भिलाई पहुंच चुकी है। यूनिवर्सल रेल मिल में नियमित उत्पादन के बीच रोजाना एक-दो हेड हार्डेन रेलपांत का हॉट ट्रायल किया जा रहा है। कुछ पटरियों का सैंपल क्वालिटी जांच के लिए जर्मनी भी भेजी गई है। हालांकि अभी उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। विश्व की सबसे लंबी और बेहतर क्वालिटी की रेल पटरी बनाने वाला भिलाई इस्पात संयंत्र अब हाई-स्पीड कार्गो लेन और मेट्रो ट्रैक में बिछाई जाने वाली हेड हार्डेन रेलपांत उत्पादन की योजना पर काम शुरू कर दिया है। हेड हार्डेन रेलपांत उत्पादन के लिए लिए जर्मन तकनीक व मशीनरी से बनी यूनिवर्सल रेल मिल में एचएच रेल की कोल्ड कमिशनिंग की गई है।

हेड हार्डेन रेलपांत उत्पादन की योजना
पहले वित्तीय वर्ष 2020-21 फिर बाद में 2021-22 के शुरुआती दौर में हेड हार्डेन रेलपांत के व्यावसायिक उत्पादन की योजना थी। इस साल मार्च में हॉट ट्रायल भी लिया गया था। व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की पूरी प्रक्रिया विदेशी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और देख-रेख में चल रही थी कि इस बीच अप्रैल में कोविड-19 की दूसरी लहर और संयंत्र में संक्रमण व कार्मिकों मौत के आंकड़ों को देखते हुए जर्मन विशेषज्ञों का यह दल स्वदेश लौट गया था। इसके बाद प्रबंधन को अपनी यह महत्वकांक्षी योजना स्थगित करना पड़ गई थी। स्थिति अनुकूल होते ही विशेषज्ञ लौट आए हैं और एक बार फिर काम शुरू हो गया है।

हेड हार्डेन रेल पटरी की खासियत
एचएच ट्रैक हाई-स्पीड कार्गो लेन और मेट्रो ट्रैक में उपयोग किए जाने वाले विशेष ट्रैक है। ऐसी रेलें सामान्य रेल की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक दबाव वहन करने के लिए हेड हार्डनिंग तकनीक का उपयोग करके निर्मित की जाती है। सलेक्टिव कूलिंग तकनीक से रेल पांत के अन्य गुणधर्म को बदलते हुए भार वहन करने की क्षमता में भारी इजाफा हो जाता है।

भारतीय रेलवे को फायदा
कम दूरी पर ही मेट्रो स्टेशन पर ब्रेक लगने और फ्रेट कॉरिडोर में चलने वाली मालगाड़ी का भार पटरी पर अधिक होता है। घर्षण अधिक होने से रेलवे को जल्द ही पटरी बदलना पड़ता है। यह पटरी ट्रेनों की गति को तुरंत बढ़ाने और तुरंत ही ब्रेक लगाने में बिना क्षति के मददगार साबित होगी। इस तकनीक से बनने वाली रेलपांत माल परिवहन और यातायात दोनों में समान रूप से उपयोग में आ सकती है।

बिक्री से बढ़ेगी बीएसपी की आमदनी
समान्य पटरी की तुलना में भिलाई इस्पात संयंत्र को एचएच पटरी आपूर्ति करने से तीन गुना अधिक मुनाफा होगा। वर्तमान में समान्य रेल पटरी का भाव करीब 40 हजाार टन है, जबकि हेड हार्डेन की कीमत लगभग डेढ़ लाख प्रति टन अधिक होगी। जनसंपर्क विभाग, भिलाई इस्पात संयंत्र ने बताया कि नार्मल प्रोडक्शन के दौरान ही बीच में रोककर हेड हार्डेन रेलपांत का हॉट ट्रायल किया जा रहा है। रोजाना एक-दो रेल ले रहे हैं। कुछ सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अभी कमिशनिंग स्टेज नहीं कह सकते। प्रयास जारी है।

हर साल 40,000 टन हेड हार्डेन रेल की डिमांड है
संयंत्र के यूनिवर्सल रेल मिल की उत्पादन सुविधा में शामिल हेड हार्डनिंग एक सुविधा मॉडेक्स पैकेज 47 का अंग है। मेट्रो रेल में उपयोग होने वाली हेड हार्डनिंग रेल पांत का उत्पादन ऑनलाइन प्रक्रिया से होगी। भारतीय रेलवे की भविष्य में बढ़ती मांग और एक्सल लोड के कारण हेड हार्डनिंग रेल की अधिक आवश्यकता होगी। वर्तमान में 30 से 40,000 टन प्रति वर्ष इस रेल की डिमांड है। इस रेल का उपयोग पश्चिमी फ्रेड कारिडोर में किया जा रहा है जहां जापान की रेल का उपयोग किया जा रहा है।

यह भी जानें
बीएसपी की यूआरएम (URM) दुनिया की सबसे लंबी 130 मीटर रेल को सिंगल पीस में रोलिंग करने में सक्षम है।
यूआरएम और आरएसएम द्वारा लंबे वेल्डेड पैनलों के रूप में 260 मीटर लंबाई तक के लंबी रेल्स की आपूर्ति की जा रही है।

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