BSP कर्मियों को इस साल के आखिर में मिलेगा वेतन समझौते का तोहफा, कैबिनेट कमेटी को भेजी गई बैलेंस सीट

वेतन समझौते को लेकर बीएसपी कर्मचारियों के 43 माह का इंतजार अब खत्म हो सकता है। लंबित वेतन समझौते के लिए नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) के दूसरे दौर की बैठक अगले महीने सितंबर में होने जा रही है। उ

By: Dakshi Sahu

Published: 13 Aug 2020, 01:51 PM IST

भिलाई. वेतन समझौते को लेकर बीएसपी कर्मचारियों के 43 माह का इंतजार अब खत्म हो सकता है। लंबित वेतन समझौते के लिए नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (एनजेसीएस) के दूसरे दौर की बैठक अगले महीने सितंबर में होने जा रही है। उम्मीद है कि तीन-चार दौर की वार्ता के बाद नवंबर आखिर तक वेतन समझौते के मसौदे पर केंद्रीय यूनियनों और सेल (SAIL) प्रबंधन के बीच अंतिम सहमति बन जाएगी। (Bhilai steel plant worker)

बताया जाता है कि दोनों पक्षों की मंशा है हर हाल में नवंबर 2020 तक वेतन समझौता हो जाए। यही वजह है कि विश्व इस्पात बाजार में मंदी की विपरीत परिस्थितियों और अब कोरोना संक्रमण की चुनौती पूर्ण स्थिति से जूझने के बाद भी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में 2022 करोड़ रुपए (कर पूर्व लाभ 3170.66 करोड़ ) से भी अधिक मुनाफा कमाया है।

बीएसपी के लगभग 16 हजार सहित सेल के तकरीबन 70 हजार कर्मियों का वेतन समझौता जनवरी 2017 से लंबित है। पहले विश्व इस्पात बाजार में लगातार मंदी और सेल के घाटे में होने के कारण यह मामला अब तक लंबित रहा। पिछले माह जुलाई में सेल का सालाना 2019-20 का वार्षिक वित्तीय परिणाम जारी होने और सेल तीन हजार करोड़ से भी अधिक कर पूर्व लाभ होने के बाद अब एनजेसीएस में शामिल श्रमिक संगठनों के घटक दलों ने वेतन समझौते के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। सितंबर के दूसरे सप्ताह में दोनों पक्षों के बीच वेतन पुनरीक्षण को लेकर वार्ता शुरू होगी।

20 फीसदी एमजीबी और 35 फीसदी पक्र्स की मांग
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 20 फीसदी मिनिमम गारंटेड बेनिफिट (एमजीबी) और 35 फीसदी पक्र्स की मांग की है। अपने प्रस्ताव का चार्टर ऑफ डिमांड संयुक्त यूनियन की तरफ से सेल प्रबंधन को पहले ही सौंपा जा चुका है। यूनियन नेताओं की माने तो इस बार बैठकों का दौर पर दौर नहीं चलेगा। दो-तीन वार्ता में ही सार्थक चर्चा करते हुए वेतन पुनरीक्षण के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

इसलिए है कर्मियों को पूरी उम्मीद
1. वित्तीय वर्ष 2019-20 में सेल ने 3170.66 करोड़ रुपए कर पूर्व लाभ व 2022 करोड़ शुद्ध मुनाफा कमाया।
2. सेल ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में न केवल उत्पादन, उत्पादकता बल्कि विक्रेय में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
3. भारत में सबसे ज्यादा क्रूड स्टील का उत्पादन कर कंपनी नंबर वन पर है। साथ ही इस्पात बनाने की सामग्री के लिए सबसे बड़ा खननकर्ता भी।
4. सेल ने भारतीय रेलवे को आर-260 प्राइम रेल की पहली रेक रवाना की।
5. सेल देश में फायर रेसिस्टेंट स्ट्रक्चरल स्टील विकसित करने वाला पहला स्टील उत्पादक बन गया है।

दो साल से लगातार मुनाफे में है सेल
लगातार दो साल वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 में घाटे में रहने के बाद अब सेल बीते दो वर्ष से मुनाफे में है। वर्ष 2018-19 में 2179 और अब 2019-20 में 2022 करोड़ मुनाफा कर पश्चात हुआ है। बीते तीन का साल का कर पूर्व लाभ करीब 1759 करोड़ है। जिसका 20 प्रतिशत करीब 300 करोड़ होता है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि अब वेतन समझौता लगभग तय है।

सरकार से जवाब आते ही तय होगी बैठक की तारीख
वार्षिक वित्तीय परिणाम में जो मुनाफा सेल को हुआ है, उसका अंतिम आय-व्यय का हिसाब कैबिनेट कमेटी की ओर से जारी बैलेंस सीट से होगा। बताया जाता है कि बैलेंस शीट सरकार के पास भेज दी गई है। वहां से जवाब आते ही वेतन समझौता के लिए एनजेसीएस की बैठक की तारीख तय हो जाएगी।

एसी भी चर्चा है: जाते-जाते सेल चेयरमैन चौधरी ही करेंगे हस्ताक्षर
संयंत्र बिरादरी में चर्चा है कि सेल को संकट से उबारने में चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी की बड़ी भूमिका रही है। उनके कुशल नेतृत्व क्षमता के कारण सेल कठिन दौर से उबरकर मुनाफे पर आया है। वे दिसंबर 2002 मेंं अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। इससे पहले वे वेतन समझौते को अंतिम रूप दे जाएंगे।

सेल व उनकी प्रमुख इकाइयों का मुनाफा
ईकाई- 2016-17/2017-18/2018-19/2019-20
बीएसपी-2-646-509-1799
डीएसपी-(-)951-(-) 270-279-(-)442
आरएसपी- (-)1357-(-)180-1472-(-)409
बीएसएल-(-)203-526-1916-48
इस्को-(-)1946-(-)988-(-)402-(-)1092
अन्य इकाइयां- (-)395-(-)492-(-)436-3267
सेल कर पूर्व-(-)4850-(-)758-3338-3171
सेल कर- (-)1663-(-)276-1159-1149
सेल कर पश्चात-(-)3187-(-)482-2179-2022

वेतन समझौता हो, सौदेबाजी नहीं
अफोर्डेबिलिटी क्लाज के आधार पर वेतन समझौता नहीं होना चाहिए। इसमें कंपनी के लगातार तीन साल मुनाफे के औसत का 20 फीसदी ही राशि देय होगी। इसके अलावा आगामी तीन साल तक फिर कंपनी मुनाफे में रहनी चाहिए नहीं तो समझौता वापस भी लिया जा सकता है। मजदूर निर्माण करता है। वह देश को गढ़ता है। मुनाफे के आंकड़े से उनके परिश्रम को आंकना गलत है। वेतन समझौता होना चाहिए, सौदेबाजी नहीं।
डीवीएस रेड्डी, सीटू नेता

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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