छत्तीसगढ़ के इस गांव में नए कपड़े पहनकर दिवाली की तरह मनाते हैं गणतंत्र दिवस

छत्तीसगढ़ के इस गांव में नए कपड़े पहनकर दिवाली की तरह मनाते हैं गणतंत्र दिवस

Satyanarayan Shukla | Publish: Jan, 25 2018 11:52:57 PM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

पाटन विकासखंड के ग्राम तेलीगुंडरा में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का पर्व दीपावली की तरह उत्साह के साथ मनाया जाता है।

टिकेन्द्र वर्मा भिलाई/रानीतराई. पाटन विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम तेलीगुंडरा में २६ जनवरी गणतंत्र दिवस का पर्व दीपावली की तरह खास उत्साह के साथ मनाया जाता है। ग्रामीण इस विशेष दिन के लिए नए-नए कपड़े खरीदते हैं। नौकरी करने बाहर गए लोग इस दिन गांव लौट आते हैं और मिलकर यह पर्व मनाते हैं। खास बात यह है कि गणतंत्र दिवस के दिन ही गांव में मड़ई महोत्सव होता है। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी कायम है। सन 1962-63 से पुरखों की बनाई इस परंपरा ने गांव को विशेष पहचान दी है।

आस-पास के गांव के लोग भी यहां जुटते हैं
गणतंत्र पर्व मनाने तेलीगुंडरा ही नहीं बल्कि आस-पास के गांव के लोग भी यहां जुटते हैं। हर घर में मेहमान आते हैं। इसलिए गांव मेें त्योहारी रंगत अलग ही नजर आती है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के बारे में पत्रिका संवाददाता ने गांव के ही दाऊ रामचंद्र साहू से बातचीत की, तब पता चला कि पुरखों ने गणतंत्र दिवस पर्व को खास बनाने के लिए ही मड़ई और मानस गान प्रतियोगिता के लिए इस दिन को चुना। साहू ने बताया कि सन् 1952-53 में इस गांव में राम मंडली के द्वारा रामलीला की प्रस्तुति दी जाती थी। मंडली का नाम नव ज्योति मानस मंडल था। इस मंडली के कलाकार आस-पास के गांव में जाकर रामचरित मानस का पाठ किया करते थे। मंडली के अध्यक्ष स्व. रामदयाल साहू थे।

 

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26 जनवरी के ही दिन गांव में मड़ई

हारमोनियम वादक स्व. तिहारू ठाकुर, तबला वादक स्व. सारथी लखन, टीकाकार शिक्षक नीलकंठ ठाकुर, कमलेश देवांगन सहित अन्य सहयोगी थे। इस मंडली के कलाकारों ने सोचा कि क्यंू नहीं गणतंत्र दिवस को खास बनाने के लिए २६ जनवरी के ही दिन गांव में मड़ई रखा जाए। वहीं दो दिन तक उत्साह मनाने के लिए २५ और २६ को मानस गान प्रतियोगिता रखी जाए। उस दौर में इन कलाकारों ने खुद ही राशि जुटाकर कार्यक्रम कराया, तब खर्च महज एक हजार से १५ सौ रुपए तक आता था। इन्ही कि सोच की बदौलत आज गांव में दो दिन तक पर्व सा माहौल रहता है। मानस भवन में आज भी कई शील्ड रखे हुए हैं जो कि मानस मंडली की प्रसिद्धी का प्रमाण हैं।

दीवाली की तरह रहती है रौनक
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि जिस तरह लोग अपने परिवार के सदस्यों के लिए दीपावली पर्व पर नए-नए कपड़े खरीदते हैं। वैसे ही गणतंत्र दिवस पर यहां के ग्रामीण नए-नए कपड़े पहनकर पर्व में शामिल होते हैं। नौकरीपेशा लोग जो कि गांव से बाहर रहते हैं वे इस दिन पर्व मनाने गांव जरूर पहुंचते हैं और अपनों से मेल मुलाकात कर खुशियां बांटते हैं।

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