Breaking news 7.5 लाख के लिए 88 साल के बुजुर्ग को चार साल से चक्कर कटवा रही समिति

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लगाया गुहार.

By: Abdul Salam

Published: 07 Sep 2021, 11:22 PM IST

भिलाई. जलेबी चौक, प्रगति नगर, कैंप-1 में रहने वाले बुजुर्ग एससी भारती (88 साल) बीएसपी इम्पाइज को-ऑपरेटिव सोसायटी, सेक्टर-1 के सदस्य हैं। समिति के बंद पड़े पेट्रोल पंप का संचालन करने डिप्टी रजिस्ट्रार ने 2009 में इनको जिम्मा दिया। जिसके बाद उन्होंने 2016 तक इसका संचालन किया। इसके बाद पंप को सील कर उनको हटा दिए। तब संस्था के रिकार्ड के मुताबिक 14 मार्च 2017 को लेन दारी और देनदारी के हिसाब में पूर्व संचालक को 7,53,127 रुपए देना शेष निकला। यह रकम अब तक बुजुर्ग को नहीं मिली है।

सीएम को लिखा पत्र
इसको लेकर पीडि़त ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मांग किया है कि यह राशि उन्हें जल्द दिलाए। बुढ़ापे में यह रकम उनके लिए जीवनयापन करने का जरिया बनेगा। सीएम से मांग किया है कि उनकी राशि दिलाने में मदद करे। इसके लिए प्रशासन को निर्देश दे। जिससे लगातार चार साल से संस्था और डिप्टी रिजस्ट्रार के दफ्तर का चक्कर लगाना बंद हो।

लेना था तब समिति ने जारी किया था दो नोटिस
बुजुर्ग ने बताया कि 2014 में जब पंप संचालन शुल्क दो लाख रुपए जमा करना था, तब सोसायटी ने दो बार नोटिस जारी किया था। अब सोसायटी को पैसा देना है तो डीआर ऑफिस का चक्कर लगवा रहे हैं। वहीं देना निकलता तो सोसायटी तमाम तरह से दबाव बनाकर पैसे ले लेती। अब देना है तो जिम्मेदार घुमा रहे हैं।

दो के बीच चक्कर लगा रहे बुजुर्ग

पीडि़त बुजुर्ग ने बताया कि जिस वक्त संस्था भंग थी, तब डीआर प्रशासन के तौर पर काबिज थे। तब बीएसपी इंपलाइज को-ऑपरेटिव सोसायटी, सेक्टर-1 का पेट्रोल पंप 2007 से 09 तक बंद था। डिप्टी रजिस्ट्रार ने तब ही एससी भारती को पंप संचालन करने कहा। वहीं जब सोसायटी अस्तित्व में आ गई, तब पूरी बकाया का भुगतान करने की जिम्मेदारी सोसायटी की है। सोसायटी के पदाधिकारी राशि मांगने पर कहते हैं कि डिप्टी रजिस्ट्रार ही दिलाएंगे यह राशि। वहीं डीआर कहते हैं कि चुनी हुई कमेटी है, उसकी जिम्मेदारी है कि जो भी लेन-देन है वह करे। इस तरह से दो के बीच चक्कर लगा रहे बुजुर्ग

चुनी हुई कमेटी को देखना है सबकुछ
ए. सिंह, डिप्टी रजिस्ट्रार, दुर्ग ने बताया कि बीएसपी इंपलाइज को-ऑपरेटिव सोसायटी, सेक्टर-1 में इस वक्त चुनी हुई कमेटी है। जब चुनी हुई कमेटी अस्तित्व में है तब प्रशासक का रोल खत्म हो जाता है। अब उनको ही सबकुछ लेन-देन करना है।

Abdul Salam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned