छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा नेताओं ने नम आंखों से दिया श्रद्धांजलि

1 जुलाई 1992 को पावर हाउस रेलने पटरी पर रोटी की मांग को लेकर बैठे साथियों के सीने पर पुलिस ने गोलियां उतार दी, याद कर नम हुई आंख.

By: Abdul Salam

Published: 01 Jul 2019, 07:19 PM IST

भिलाई. 1 जुलाई 1992 को पावर हाउस रेलने स्टेशन की पटरी पर रोटी की मांग को लेकर बैठे जिन साथियों के सीने पर पुलिस ने गोलियां उतार दी। उस गोलीकांड की बरसी के मौके पर छत्तीसगढ़ मुक्ती मोर्चा के साथियों ने पावर हाउस प्लेटफार्म में सोमवार को दोपहर 2 बजे पहुंचकर नम आंखों से उन १७ साथियों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर ओडीसा और पश्चिम बंगाल से आए साथियों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मजदूरों में संघर्ष के लिए जोश भरा। वे इस आंदोलन से जुड़े श्रमिकों को भूमि अधिग्रहण बिल जैसे मामलों के खिलाफ होने वाले देशव्यापी आंदोलन से जोडऩे और एक जुट होने का आह्वान किए।

तस्वीर पर माल्यार्पण करते परिवार के सदस्य हुए भाव विभोग
27 वीं बरसी के मौके पर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता भीमराव बागड़े, जनक लाल ठाकुर, एजी कुरैशी, कलादास डेहरिया के नेतृत्व में रैली एसीसी चौक जामुल के शंकर गुहा नियोगी चौक से निकलकर पावर हाउस पहुंची। यहां ओवर ब्रिज से बचत स्तंभ में आकर सभा का रूप ली। इसके बाद पावर हाउस स्टेशन में जाकर साथियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

केन्द्र सरकार के खिलाफ बरसे श्रमिक नेता
सभा बचत चौक के पास हुई जिसमें लोकतांत्रिक इस्पात एवं इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कलादास ढहरिया ने केन्द्र सरकार द्वारा मजदूरों के खिलाफ तैयार किए जा रहे कानून को पूरी तरह से गलत बताया। वहीं पश्चिम बंगाल से आए राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ मित्रा ने केंद्र सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव कॉरपोरेट के कुछ बड़े चेहरों ने भाजपा को जिताने के लिए करोड़ों खर्च कर लड़ा है। यह आम जनता का चुनाव नहीं था।

कड़ी सुरक्षा का इंतजाम
पावर हाउस के बाहर से लेकर भीतर रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म तक किसी प्रकार की कोई गंभीर घटना न हो इसके लिए सुबह से ही पुलिस बल को तैनात कर दिया गया था। जीआरपी, आरपीएफ, भट्ठी थाना प्रभारी यहां मौजूद थे।

पुरानी मांगों को दोहराया
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा को नेताओं ने इस मौके पर फिर से पुरानी मांगों को दोहराया। सभा के दौरान छमुमो के अध्यक्ष भीमराव बागडे ने कहा कि नए श्रम कानूनों के सहारे श्रमिकों का शोषण करने की तैयारी की जा रही है। 12-12 घंटे काम करवाने के लिए सरकार उद्यमियों को छूट दे रहे हैं। प्रदेश में उद्योगपतियों व ठेकेदारों को लूटने की खुली छूट मिली हुई है। यही नहीं कर्मचारी भविष्यनिधि की राशि के साथ भी घपला किया जा रहा है।

फिर से हो जांच
उन्होंने कहा कि श्रमिक नेता शंकरगुहा नियोगी हत्याकांड की जांच फिर से की जानी चाहिए। इसको लेकर राष्ट्रपति दिल्ली कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को पत्र 19 दिसंबर 2014 को भेजा गया था। अब तक राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की है। सरकार जांच शुरू नहीं करती है तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। आईआर एक्ट से उद्यमियों को फायदा हो रहा है। वहीं जेके लक्ष्मी प्लांट ने जिन 850 किसानों की जमीन लिया था, उनके एक सदस्य को नौकरी और वेतन देने की मांग की गई। इसको लेकर सीएम से भी वे मांग कर चुके हैं।

यह हुआ था 1 जुलाई 1992 को
1 जुलाई 1992 को श्रम कानून का पालन कराने व काम से निकाले गए 4200 श्रमिक साथियों को काम पर वापस रखने की मांग क ो लेकर पावर हाउस रेलवे स्टेशन पर जमकर प्रदर्शन किया गया था। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सैकड़ो कार्यकर्ता पटरी पर बैठकर रेल भी रोकी। हंगामे के बीच पुलिस ने गोलीबारी शुरू कर दी जिससे की 17 श्रमिकों की मौत हो गई। जिन साथियों की मौत हुई, उनमें पुरानिक लाल, कुमार वर्मा, प्रेमनारायण, केशव गुप्ता, लक्ष्मण वर्मा, असीम दास, किशोरी वर्मा, रामाज्ञा चौहान, जोगा राव, मनहरण वर्मा, धीरपाल, प्रदीप कुट्टी, मधुकर नाई, हिरऊ राम, रामकुपाल, इंद्रदेव चौधरी व ह्दय राम हैं। पुलिस की गोलियों का शिकार हुए श्रमिक प्रेमनारायण का परिवार श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

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