दुर्ग RTO में कमीशनखोरी का खेल, 500 का रिफ्लेक्टिव टेप बेच रहे 5000 में, बार कोड स्केन करते ही अधिकारी को मिलता है कमीशन

आपकी गाड़ी का फिटनेस तभी होगा, जब आप आरटीओ विभाग के उस दलाल से वह रेडियम पट्टी अपनी गाड़ी में लगवाएंगे जिसका विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ है।

By: Dakshi Sahu

Published: 01 Mar 2021, 12:24 PM IST

बीरेंद्र शर्मा @भिलाई. अगर आपने अपने व्यावसायिक वाहन में रिफ्लेक्टिव टेप लगवा लिया है तो समझिए आपके पैसे बर्बाद हो गए। कारण यह कि परिवहन विभाग इसे नहीं मानेगा और आपकी गाड़ी का फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं देगा। क्योंकि आपने रिफ्लेक्टिव टेप उस कंपनी से नहीं लगवाया है जिससे परिवहन विभाग ने कांन्ट्रेक्ट किया है। परिवहन विभाग ने दो बड़ी कंपनियों से रेफ्लेक्टिव टेप लगाने के लिए करार किया है और इसकी आड़ में जमकर धांधली की जा रही है। वाहन मालिकों की जेब खाली की जा रही है। दलाल और आरटीओ विभाग के अधिकारी रोजाना लाखों का वारा न्यारा कर रहे हैं। आपकी गाड़ी का फिटनेस तभी होगा, जब आप आरटीओ विभाग के उस दलाल से वह रेडियम पट्टी अपनी गाड़ी में लगवाएंगे जिसका विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ है। जिसका रेट बाजार दर से 50 गुना ज्यादा है।

हर गाड़ी मालिक से 5000 की वसूली
पत्रिका की टीम गाड़ी मालिक बनकर दलाल से बात करने पहुंची तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। शुक्रवार को दोपहर 2.30 बजे का वक्त था। शिवनाथ टोल प्लाजा के पास सर्विस रोड में करीब 100 की संख्या में व्यावसायिक वाहन के मालिक और उसके चालक सिर्फ इस इंतजार में खड़े थे कि कब आरटीओ विभाग के अधिकारी वहां पहुंचेंगे। क्योंकि वे आकर फिटनेस प्रमाण पत्र देंगे तभी वे आगे रवाना होंगे। अधिकारी के आने के पहले दलाल गाड़ी मालिकों से रिफ्लेक्टिव टेप लगाने के नाम पर हर गाड़ी मालिक से 5 हजार रुपए ऐंठ चुका था।

टीम को समझा गाड़ी वाले, रिफ्लेक्टिव टेप लगाने वाले ने खोल दी पोल
वहां पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाने का काम कर रहे समीर नाम के लड़के से पत्रिका की टीम ने जब बात की तो उसने जबाव दिया कि जब आप उससे और आरटीओ के निर्धारित एजेंट से रिफ्लेक्टिव टेप लगवाकर उसके साइन की रसीद लेंगे तभी आरटीओ विभाग के साहब उसका फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करेंगे।

आप 500 में भी लगवा सकते हैं पर आरटीओ में मान्य नहीं होगा
एजेंट ने यह भी कहा कि आप 500 से 1000 रुपए में यह रिफ्लेक्टिव टेप लगवा सकते है, लेकिन वह आरटीओ आफिस में मान्य नहीं की जाएगी। क्योंकि 50 गुना रेट अधिक लेकर आरटीओ विभाग जो रेफ्लेक्टिव टेप जारी कर रहा है उसमें तय की गई कंपनी द्वारा एक बार कोड लगाया गया है। उस बार कोड को संबंधित आरटीओ विभाग का अधिकारी अपने मोबाइल से स्केन कर पास करेगा। आरटीओ विभाग के अधिकारी जितनी बार कोड स्कैन करेंगे उतना कमीशन अधिकारी के खाते में चला जाएगा।

110 रुपए मीटर की पतली पट्टी भी लगाते हैं
इसके अलावा एक पतली पट्टी 110 रुपए मीटर के रेट से भी लगवाई जा रही है। इसका कोई हिसाब किताब लिखित या ऐप में दर्ज नहीं होता है। इस तरह से आरटीओ विभाग दलालों से मिलकर वाहन मालिकों से जमकर उगाही कर रहे है। रिफ्लेक्टिव टेप लगाने की वजह दुर्घटना पर नियंत्रण करने के लिए बताया जा रहा है। यह टेप रात में दूर से चमकता है। इससे दूसरे लोगों को वाहन होने की जानकारी मिल जाती है। कई बार सड़क किनारे खड़ी गाड़ी से भी लोग टकरा जाते हैं। यह चमकीला टेप दूर से दिखेगा और दुर्घटना रोकने में मदद मिलेगी।

दुर्ग RTO में कमीशनखोरी का खेल, 500 का रिफ्लेक्टिव टेप बेच रहे 5000 में, बार कोड स्केन करते ही अधिकारी को मिलता है कमीशन

दूसरे जिला में नहीं किया गया है अनिवार्य
खुर्सीपार के क वाहन चालक ने बताया कि रिफ्लेक्टिव टेप लगाने के लिए सिर्फ दुर्ग जिले में ही अनिवार्य किया गया है। पड़ोसी जिले राजनांदगांव, रायपुर समेत अन्य जिलों में इसे अनिवार्य नहीं किया गया। वे गाडिय़ों की फिटनेस करके दे रहे है।, लेकिन यहां रिफ्लेक्टिव टेप की आड़ में दलालों के माध्यम से वाहन मालिको से सीधे उगाही की जा रही है।

दूसरे स्टेट में दर अधिकतम 900, दुर्ग में ले रहे हैं 3200 रुपए
भिलाई तीन के ट्रांसपोर्टर मदन सिंह ने बताया कि आरटीओ विभाग का कहना है कि मुख्यालय से एब्री डेंशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और थ्री एम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अनुमति दी है। सेम मानक की यहीं कंपनी महाराष्ट्र में भी रिफ्लेक्टिव टेप लगा रही है। वहां सिर्फ 600 से 900 की दर पर लगा दिए जा रहे है। लेकिन दुर्ग जिला में 3200 रुपए लिया जा रहा है।

आरटीओ बोले, रिफ्लेक्टिव टेप लगाया जा रहा है पर रेट मुझे नहीं मालूम
दुर्ग आरटीओ अतुल विश्वकर्मा से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि बार कोड की रिफ्लेक्टिव टेप विभाग द्वारा लगवाया जा रहा है, लेकिन उसका दर क्या है इस बारे में वेअंजान हैं। साथ में एक और रेडियम पट्टी लगाई जा रही है उसके बारे में कहा कि वह किस लिए लगाई जा रही है, उसका दर क्या है इसके बारे में उनको जानकारी नहीं है। परिवहन मंत्रालय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस संबंध में क्या आदेश दिया गया है इसको लेकर भी आरटीओ ने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने अन्य राज्यों से कई गुना दर पर रिफ्लेक्टिव टेप की बेचने को गलत बताया।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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