हाईटेक व मित्तल अस्पताल में कोविड मरीज से अधिक बिल लेने की शिकायत सही पाई गई

आईसीयू के बिल के साथ डॉक्टर व स्टाफ का भी बिल जोड़कर लिया जा रहा है। गाइड लाइन डॉक्टर व स्टाफ का बिल अलग से नहीं लेना है। सभी को जोड़कर आईसीयू का बिल निर्धारित किया गया है, जांच टीम ने कलेक्टर को सौंपी रिपोर्ट.

 

 

By: Abdul Salam

Published: 01 Oct 2020, 01:39 AM IST

भिलाई . बीएसआर हाईटेक अस्पताल और मित्तल अस्पताल के खिलाफ कोरोना मरीजों के उपचार का अधिक बिल लेने की शिकायत जांच में सही पाई गई है। शासन ने इलाज के लिए गाइड लाइन जारी किया है। जिसमें चिन्हित निजि अस्पतालों के लिए टेस्ट से लेकर आइसीयू में इलाज की दर निर्धारित है। भिलाई के बीएसआर हाईटेक अस्पताल और मित्तल अस्पताल के खिलाफ मरीजों से अधिक बिल वसूलने की शिकायत की गई थी। कलेक्टर डॉ.सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने अपर कलेक्टर बीबी पंचभाई के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर जांच करने के आदेश दिए थे। जांच टीम को शिकायत सही मिली। कई अन्य खामियां भी मिली है।

राउंड लगाने वाले डॉक्टर व स्टाफ का अलग से बिल वूसला जा रहा है
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईसीयू के साथ-साथ वहां राउंड लगाने वाले डॉक्टर और स्टाफ का अलग से फीस लिया जा रहा है। जांच टीम यह जानकर हैरान रह गई कि आखिर आईसीयू के नाम पर अलग और डॉक्टर व स्टाफ के नाम पर अलग से पैसा मरीजों से किस तरह वसूला जा रहा है। शासन ने आईसीयू का चार्ज तय किया है उसमें डॉक्टर और स्टाफ की फीस शामिल है। आईसीयू का मतलब केवल एक बेड या मशीन नहीं होता।

जांच प्रतिवेदन में कार्रवाई के साथ अधिकतम जुर्माने की भी अनुशंसा
आईसीयू में भर्ती मरीज चिकित्सकों की लगातार निगरानी में रहता है। जिसके कारण चार्ज अधिक तय किया गया है। इसका अलग से बिल नहीं लिया जाना चाहिए। कोरोना महामारी काल में अस्पाताल प्रबंधन का यह अमानवीय हरकत है। जानकारी के मुताबिक जांच प्रतिवेदन में कार्रवाई के साथ दोनों अस्पताल पर अधिकतम जुर्माना लगाने की अनुशंसा भी की गई है।

बड़ा सवाल: कार्रवाई होगी या फिर घुटने टेेक देगा प्रशासन
बीएसआर हाईटेक अस्पताल में बिल व इलाज को लेकर कई बार हंगामा हो चुका है। दो दिन दिन पहले भी एक युवक की मौत पर जमकर हंगामा हुआ था। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत भी की है। इसके पहले भी एक शिकायत पर कलेक्टर ने हाईटेक अस्पताल पर कार्रवाई की थी। कलेक्टर ने बीएसआर हाइटेक अस्पताल के खिलाफ एक महिला की मौत के मामले में परिवार वालों का बयान लेने के बाद एक सप्ताह के लिए नए कोविड मरीजों की भर्ती को प्रतिबंधित किया था। राजनीतिक दवाब के आगे प्रशासन नतमस्तक हो गया और दो दिन बाद ही चुपचाप पाबंदी हटा ली गई। इस तरह प्रशासन का रवैया घुटने टेकने वाला रहा है। इस बार भी कोई ठोस कार्रवाई होती है या किसी दवाब में प्रशासन घुटने टेकता है यह आगे साफ होगा।

जानिए क्या था मामला
24 सितंबर 2020 को जिला प्रशासन को शिकायत मिली कि बीएसआर हाईटेक और मित्तल अस्पताल शासन से तय गाइड लाइन का उल्लंघन करते हुए अधिक बिल वसूल रहे हैं। इसके पहले भी कई लोगों ने शिकायत की थी पर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस शिकायत के बाद प्रशासन ने यह कहते हुए जांच करने का आदेश दिया कि इस तरह की शिकायत बार-बार मिल रही है। कलेक्टर ने अपर कलेक्टर के नेतृत्व में जांच के लिए टीम बनाई। यह टीम अस्पताल पहुंची थी। टीम पूछताछ करने के साथ ही बिल, डिस्चार्ज टिकट व अन्य संबंधित दस्तावेज जांच के लिए ले गई थी। इसी तरह से मित्तल अस्पताल से भी दस्तावेज लिया गया था।

सीएमएचओ ने कहा नसिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई कलेक्टर ही करेंगे
सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि जांच कमेटी ने जांच प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर को सौंप दिया है। कलेक्टर ही नर्सिंग एक्ट के तहत अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई तय करेंगे। बिल को लेकर कुछ खामियां मिली है। जिसको लेकर शिकायत की गई थी।

हाईटेक का दावा शासन की गाइड लाइन के मुताबिक लिया जा रहा बिल
संजय सिंघानिया, डायरेक्टर, हाई टेक अस्पताल ने बताया कि जिला प्रशासन की जांच टीम आई थी। टीम ने कोविड पेशेंट के इलाज के बिल की प्रति मांगी थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से वह उपलब्ध करवा दिया गया था। कोविड मरीजों से शासन द्वारा तय चार्ज ही लिया जा रहा है।

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