मानहानि मामले में कोर्ट ने बीएसपी प्रबंधन से कहा पीएम ट्रॉफी का फ़्रेम तोड़कर सर्टिफिकेट लाइए, पढ़ें खबर

भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित स्क्रैप घोटाले के मामले में प्रबंधन ने आरोप लगाने वाले आरपी शर्मा के खिलाफ एक करोड़ की मानहानि का दावा किया है।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 04 Jan 2018, 07:09 PM IST

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित ३७.८0 करोड़ रुपए के स्क्रैप घोटाले के मामले में प्रबंधन ने आरोप लगाने वाले जन अधिकार अभियान समिति के आरपी शर्मा के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में एक करोड़ रुपए की मानहानि का दावा किया है। बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। बीएसपी के लॉ अफसरों ने यह बताने कि इससे न केवल देश बल्कि विदेशों में भी संयंत्र की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है, अब तक सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र के रूप में 11 बार मिली प्रधानमंत्री ट्रॉफी का फ्रेम में जड़ा सर्टिफिकेट लेकर न्यायालय पहुंच गए।

शर्मा के आरोप से संयंत्र की प्रतिष्ठा धूमिल हुई
शर्मा के अधिवक्ता जमील अहमद ने बताया कि बुधवार को सप्तम अपर जिला न्यायाधीश मधुसुदन चंद्राकर के न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई। बीएसपी प्रबंधन की ओर से लॉ ऑफिसर टीएस रविशंकर और आरके पाणिग्रही ने अपनी पूर्व में अपनी दलील में कहा था कि शर्मा के आरोप से संयंत्र की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। भिलाई स्टील प्लांट अब तक 11 बार सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र को दी जाने वाली प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री ट्रॉफी संयंत्र हासिल कर चुकी है। विदेशों में भी संयंत्र की साख है।

फ्रेम तोड़कर जमा कर दीजिए

यह बताने के लिए वे ट्रॉफी के साथ मिले सभी सर्टिफिकेट जिसे फे्रम में जड़कर संयंत्र के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय इस्पात भवन में टांगे थे, निकालकर एक वाहन में भरकर ले गए। न्यायाधीश ने कहा कि अदालन में मूल दस्तावेज जमा किया जाता है। फ्रेम तोड़कर जमा कर दीजिए। इसके बाद संयंत्र के अधिवक्ताओं ने समय मांगा। अब मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी।

 

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शर्मा ने सीबीआई और सीवीसी से की थी शिकायत
शर्मा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को की अपनी शिकायत में कहा था कि बाजार भाव से क्रम में स्क्रैप बेचने से बीएसपी को 37.80 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। फॉरवर्ड ऑक् शन में लगभग सवा लाख टन रिजेक्टेड ब्रोकन मोल्ड बॉटम स्टूल (बीएसआईएम) स्क्रैप को 24,850 रुपए प्रति टन के भाव से बेच दिया गया। जबकि खुले बाजार में स्क्रैप 28, 000 रुपए प्रति टन भाव बिक रहा है। इससे बीएसपी को 37.80 करोड़ की चपत लगी है।

ऑक्शन की शर्तें ऐसी जिससे पार्टी को लाभ हो

शर्मा ने अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया था कि संयंत्र के अधिकारी जानबूझकर स्क्रैप का ढेर होने देते हैं ताकि किसी बड़ी पार्टी को लाभ पहुंचाया जा सके। ऑक्शन की शर्तें ऐसी रखी गई है, जिससे पार्टी को लाभ हो। शर्त के मुताबिक हर महीने 10 हजार टन स्क्रैप उठाना है। लेकिन मार्केट में पिग आयरन का भाव बढ़ जाता है तो इससे ज्यादा स्क्रैप उठा सकते हैं। इसी ऑक् शन में प्राइज एक्सलरेशन का भी क्लॉज है यानि मार्केट में पिग आयरन का रेट गिरने पर स्क्रैप का रेट भी कम हो जाएगा। इस तरह दोनों ही स्थितियों में पार्टी को फायदा है।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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