एक माह में भी ठीक नहीं हुआ कोविड-19 का मरीज, एम्स रवाना

ऑक्सीजन के साथ ला रहे थे बाहर, मांगा कोविड-19 ठीक होने का दस्तावेज.

By: Abdul Salam

Updated: 16 Oct 2020, 12:20 AM IST

भिलाई. कोविड केयर सेंटर, शंकराचार्य, जुनवानी में 17 सितंबर 2020 को एक मरीज दाखिल किया गया। जब परिजनों ने उसे कोविड-19 जांच कर छुट्टी देने की मांग किए। तब अस्पताल से उसे एम्स, रायपुर के लिए रवाना कर दिया गया। जहां उनकी हालत को देख चिकित्सकों ने वेंटिलेटर में रखकर उपचार करना शुरू किया है। परिवार के लोग इस बात से नाराज हैं कि एक माह में पिता की हालत और बिगड़ते हुए नजर आ रही है।

पैदल चलकर गए थे अस्पताल
मरीज के छोटे बेटे ने बताया कि कोविड-19 की जांच कराने के बाद पॉजिटिव आने पर वह अपने पिता (55 साल) को शंकराचार्य कोविड केयर सेंटर, जुनवानी लेकर आया। 17 सितंबर को वे अस्पताल के गेट से पैदल चलते हुए भीतर वार्ड तक गए हैं। वे आराम से बात कर रहे थे, कोई दिक्कत नहीं थी। जिसकी वजह से परिवार के लोग परेशान नहीं थे।

फोन पर कहा यहां से ले चलो
बेटे ने बताया कि जब पिता से फोन पर बात करते तो वे कहते कि यहां से ले चलो। इस पर उनको समझाते रहे। करीब 10 दिन पहले उनको वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसके बाद वहां से ठीक होकर बाहर आ गए। परिवार वालों को लगा कि अब घर आ जाएंगे।

ऑक्सीजन के साथ ला रहे थे बाहर
उन्होंने बताया कि कोविड केयर सेंटर, शंकरा से मंगलवार को फोन आया कि डॉक्टर ने डिस्चार्ज के लिए लिख दिया है। आकर अपने पिता को घर ले जाओ। इस पर भागते हुए अस्पताल गया। वहां देखा कि पिता को ऑक्सीजन सपोट में अस्पताल के वार्ड से निकालकर नीचे ला रहे हैं। तब बेटे ने अस्पताल के स्टाफ से पूछा कि बिना ऑक्सीजन के वे घर तक जा सकेंगे। इस पर स्टाफ ने बताया कि जब डॉक्टर ने देखा था, तब इनका ऑक्सीजन का लेवल बेहतर था। अब लेवल घट गया है, ऐसे में बिना ऑक्सीजन सपोट के लेकर नहीं जा सकते। यह कहते हुए वापस वार्ड में लेकर चले गए।

मांगा कोविड-19 ठीक होने का दस्तावेज
अगले दिन पिता ने कहा कि इस अस्पताल से लेकर दूसरे जगह ले चलो। इस पर बेटे ने चिकित्सक से कहा कि कोविड-१९ ठीक हो गया है क्या। वहां से बताया गया कि हां ठीक हो गया है, दूसरी दिक्कत है, उसका उपचार करवा लो। इस पर बेटे ने कहा कि कोविड-19 ठीक हो गया है, यह दस्तावेज दो, तब दूसरे अस्पताल में दाखिल लेगा। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया।

कर दिया एम्स के लिए रवाना
मरीज को गुरुवार की दोपहर करीब 1 बजे शंकरा, कोविड केयर सेंटर, जुनवानी से एम्स, रायपुर के लिए रवाना किया गया। जहां चिकित्सकों ने मरीज के हालात को देखने के बाद तुरंत वेंटिलेटर में रखकर उपचार शुरू किया।

उठ रहे सवाल
सवाल उठ रहा है कि क्या एक माह तक कोविड-19 का इलाज किया जाता रहा। इतने लंबे समय में मरीज ठीक होने के स्थान पर और बीमार होता चला गया। चिकित्सक जब कह रहे थे कि कोरोना से ठीक हो चुका है, तब उसे जांच रिपोर्ट क्यों नहीं दिए। मरीज को निजी अस्पताल में दाखिल करने के लिए वह रिपोर्ट जरूरी होती है।

रिस्क नहीं ले सकते
चीफ हेल्थ मेडिकल ऑफिसर, दुर्ग, डॉक्टर गंभीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मरीज की तबीयत ठीक है, ऑक्सीजन हटाने से वह घबरा रहा है। काउंसलिंग की जरूरत है, जिसके लिए एम्स, रायपुर भेज रहे हैं। परिवार को इस वजह से नहीं सौंप रहे हैं क्योंकि अभी रिस्क हो जाएगा।

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