सुबह 11 से शाम 5 बजे तक भूखे-प्यासे बैठे रहे कोरोना पॉजिटिव BSP कर्मी दंपती, कोई बताने वाला ही नहीं था कि क्या करें

सेक्टर-9 अस्पताल में अव्यस्था का कुछ ऐसा ही आलम है। जांच करवाने आए मरीजों के बेहोश हो जाने की घटना भी आए दिन संज्ञान में आती रही है। (covid-19)

By: Dakshi Sahu

Published: 08 Apr 2021, 11:44 AM IST

भिलाई. यह भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन द्वारा संचालित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर-9 है। सुबह के लगभग 8 बजे हैं। प्लांट का एक कर्मचारी जो सीटू यूनियन से जुड़े हैं, अपनी पत्नी के साथ कोरोना टेस्ट कराने आए हैं। जांच के बाद सुबह 11 बजे दोनों को कोरोना पॉजिटिव बताया गया। इसके बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। कोई कुछ बताने वाला ही नहीं था कि कहां जाएं, क्या करें, किससे मिलें। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक दोनों पति-पत्नी चेस्ट वार्ड के पास भूखे- प्यासे और बदहाल बैठे रहे। बाद में सीटू नेताओं को खबर मिली और दोनों का इलाज शुरू करवाया। सेक्टर-9 अस्पताल में अव्यस्था का कुछ ऐसा ही आलम है। जांच करवाने आए मरीजों के बेहोश हो जाने की घटना भी आए दिन संज्ञान में आती रही है। सीटू ने संयंत्र प्रबंधन को चेतावनी भरे लहजे में ज्ञापन सौंपा है कि कर्मियों की जान से खिलवाड़ बंद करें। समय रहते हर जरूरी और उचित कदम उठाएं। सेक्टर 9 अस्पताल में कोविड-19 परीक्षण एवं इलाज के दौरान अव्यवस्था को दूर नहीं किया तो यूनियन उच्च स्तर पर प्रबंधन के खिलाफ शिकायत करेगी।

टेक्निशियंस की कमी का निकाले समाधान
सेक्टर-9 अस्पताल में रेडियोलोजी को छोड़कर जांच के संदर्भ में काम करने वाले विभिन्न लैब में लगभग 24 टेक्नीशियन कार्यरत हैं जिन्हें कोरोना संक्रमण जांच की ड्यूटी में लगाया गया है। वहीं ट्रेसिंग, टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट के लिए और ज्यादा जांच सेंटरों की आवश्यकता है ताकि लॉकडाउन के दौरान ही कोरोना पर नियंत्रण किया जा सके। ऐसे में इन सेंटरों में 24 टेक्नीशियन पर्याप्त नहीं है। इसीलिए टेक्नीशियन की कमी को पूरा करने के लिए अविलंब समाधान निकाला जाना बहुत आवश्यक है।

ऊंचे मानदेय पर भर्ती करें स्वास्थ्य कर्मियों की
सेक्टर 9 में कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान यह देखने को मिल रहा है कि काबिल स्वास्थ्य कर्मी एवं डॉक्टर इलाज के पहले मरीज एवं उनके परिजनों के द्वारा भरवाए जा रहे फॉर्म की लिखा-पढ़ी में ज्यादा व्यस्त हो जा रहे हैं। जिसके कारण इलाज में देरी हो रही है। वहीं साथ ही साथ तुरंत मदद पहुंचाने के लिए आवश्यक मेडिकल स्टाफ की भी कमी साफ दिखती है। ऐसे में ऊंचे मानदेय पर स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती जरूरी है। भिलाई में इंटर्नशिप किए हुए तथा सेवानिवृत्त हुए नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन की कोई कमी नहीं है। बशर्ते कि क्रिटिकल केयर नर्सिंग को 25000 रुपए तथा इंटर्न को 16000 रु प्रतिमाह के उचित मानदेय पर काम के लिए आमंत्रित किया जाए। इसके विपरीत यह यह बात संज्ञान में आई है कि प्रबंधन ने लगभग 8500 रुपए के मानदेय पर अस्थाई कर्मियों को आमंत्रित किया है।

टेस्टिंग सेंटरों की संख्या बढ़ाने से होगा समाधान
सीटू यूनियन ने पत्र के माध्यम से प्रबंधन से मांग की है कि जांच किट की संख्या बढ़ाई जाए जिससे कर्मियों को जांच के लिए इंतजार न करना पड़े । इसके अलावा कम से कम 3 अतिरिक्त कोरोना जांच सेंटरों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है। इसके लिए रिक्त स्कूल भवनों अथवा हेल्थ सेंटरों का उपयोग किया जा सकता है। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सेक्टर-9 अस्पताल में कोरोना वार्डों एवं बेड की संख्या भी बढायी जाए। इसके अतिरिक्त सेक्टर-1 अस्पताल में ओपीडी एवं वार्डों को अन्य बीमारियों के इलाज के लिए प्रारंभ किया जा सकता है।

अस्पताल से कोरोना फैलने का बढ़ रहा है खतरा
कोरोना जांच के लिए पहुंच रहे मरीजों को जहां एक तरफ कई किस्म के फॉर्म को भरते हुए जांच तक पहुंचना पड़ रहा है। वहीं जांच के दौरान पॉजिटिव होने पर भर्ती पत्र बनवाने के लिए चेस्ट ओपीडी से लेकर केजुअल्टी तक का चक्कर काटना पड़ता है। मरीज के परिजन जो लगातार मरीज के संपर्क में रहने से उनके भी पॉजिटिव होने का खतरा बढ़ जाता है। मरीज के साथ कोरोना संक्रमित क्षेत्र में ही परिजनों अथवा अटेंडेंट के रहने से उनके भी कोरोना संक्रमित होने की गुंजाइश बन रही है। जांच के दौरान पॉजिटिव होने पर भर्ती पत्र बनवाने के लिए चेस्ट ओपीडी में ही काउंटर खोला जाए।

बैठने का पर्याप्त इंतजाम हो, पीए सिस्टम लगाया जाए
कोरोना ओपीडी सेक्टर 9 हॉस्पिटल की चेस्ट ओपीडी में बनाया गया है। यहां पर मरीजों एवं उनके परिजनों को बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। चेस्ट ओपीडी के बाहर टेंट लगा हुआ है किंतु वह पर्याप्त नहीं हैं। थोड़े से जगह में ही सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाते हुए पास-पास खड़े होने अथवा बैठने को मजबूर हैं। वहीं एक के बाद एक काउंसलिंग एवं इलाज के लिए अंदर से बुलाए जा रहे नामों को सुनने के लिए भी लोग अंदर ही झुंड लगा रहे हैं। ्र

डॉक्टर एवं स्टाफ कर रहे हैं बेहतरीन काम प्रबंधन की लापरवाही से बुरा हाल
सीटू नेता डीवीएस रेड्डी ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र 860 बेड वाला अस्पताल है जहां 400 से अधिक कोविड-19 मरीजों का इलाज चल रहा है। डॉक्टर्स, नर्स, मेडिकल स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, इंटर्न ,सैनिटेशन वर्कर, अस्पताल प्रशासन में नियुक्त नॉन मेडिकल अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उच्च प्रबंधन की ओर से समय पर निर्णय नहीं लेने की लापरवाही के कारण ही अस्पताल में अफरा तफरी की स्थिति निर्मित हो गई है।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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