सेल की सभी यूनिटों में डिप्लोमा इंजीनियर्स पदनाम की मांग को लेकर करेंगे आंदोलन

5 नवंबर 2020 को काला झंडा भी दिखाने की तैयारी, अन्य कर्मियों से भी शामिल होने किया अपील.

By: Abdul Salam

Updated: 28 Oct 2020, 05:47 PM IST

भिलाई. डिप्लोमा इंजीनियर्स पदनाम की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। अब वे फिर एक बार सड़क पर उतरने जा रहे हैं। डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन ऑफ इस्पात ने सेल की सभी यूनिटों में 5 नवंबर 2020 को सड़क पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर मांग पूरी नहीं की जाती है तो वे उत्पादन भी ठप करने से पीछे नहीं हटेंगे। आंदोलन को लेकर बीएसपी आईआर को सौंपा ज्ञापन.

अफसरों के बदले पदनाम
डिप्लोमा इंजीनियर्स कह रहे हैं कि 4 साल पहले इस्पात मंत्रालय ने डिप्लोमा इंजीनियरों को जूनियर इंजीनियर पदनाम देने के लिए आदेश जारी किया था। आज तक यह लागू नहीं हो पाया है। प्रबंधन सिर्फ आश्वासन देता रहा है। सेल चेयरमैन ने एक बार नहीं कई बार घोषणा भी किया है कि जल्द ही कर्मचारियों का पदनाम परिवर्तित किया जाएगा, लेकिन आज तक सम्मानजनक पदनाम न डिप्लोमा इंजीनियरों ना ही अन्य कर्मचारियों को मिल पाया। प्रबंधन अपने अधिकारियों के पदनाम को जूनियर मैनेजर से लेकर सीईओ तक परिवर्तित कर चुका है। यहां तक कि डॉक्टरों को भी पदनाम देने की प्रक्रिया अंतिम स्तर पर है। वहीं यूनियन का बहाना बनाकर प्रबंधन डिप्लोमा इंजीनियरों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है।

जूम मीटिंग कर रहे डिप्लोमाधारी
बीएसपी में भी 5 नवंबर को होने वाले आंदोलन की तैयारियां तेज हो गई है। जूम मीटिंग के माध्यम से डिप्लोमा इंजीनियर के साथ चर्चा की जा रही है। एसोसिएशन ने अन्य कर्मचारियों को अपनी मान सम्मान स्वाभिमान के इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने साफ किया कि डिप्लोमा इंजीनियर किसी अन्य कर्मचारियों के सम्मानजनक पद नाम पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने प्रबंधन से डिप्लोमा इंजीनियर के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों को भी बेहतर पदनाम देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन यूनियन का बहाना बनाकर इस विषय को टालने की कोशिश कर रही है हकीकत यह है कि अधिकांश यूनियन कर्मचारियों को सम्मानजनक पदनाम देने के पक्ष में है।

प्रबंधन की गलत नीतियों के खिलाफ संघर्ष
एसोसिएशन के महासचिव अभिषेक सिंह ने कहा है कि यह लड़ाई यूनियन से नहीं बल्कि प्रबंधन की गलत नीतियों से है। जब प्रबंधन को कुछ देना होता है तो यूनियन को दरकिनार कर समझौता करा लेता है। इसका ताजा उदाहरण कर्मचारियों को 16500 का बोनस मिलना है। और जब मुद्दे को टालना और कर्मचारियों को हतोत्साहित करना रहता है तो यूनियन का बहाना बनाकर प्रबंधन गुमराह करने लगती है। अब डिप्लोमा इंजीनियर सहित सेल के समस्त कर्मचारी प्रबंधन के इस भावना को समझ चुके हैं और वह किसी भी स्थिति में अपनी सम्मान की लड़ाई लडऩे के लिए तैयार बैठे हैं।

दिखाया जाएगा काला झंडा
सचिव पवन साहू ने कहा है कि 5 नवंबर को काले झंडे के साथ डिप्लोमा इंजीनियर प्रदर्शन करेंगे और काले गुब्बारे भी छोड़े जाएंगे कर्मचारियों विरोधी नीतियों के खिलाफ। डिप्लोमा इंजीनियर्स किसी भी संस्थान की रीढ़ की हड्डी होती है जिसका सेल प्रबंधन ने आज तक शोषण ही किया है। अब आगे ऐसा किसी भी शर्त पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Abdul Salam
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