Doctors' Day: पढि़ए 29 वर्षीय युवा डॉ. हर्षिता की कहानी, नाम, पैसा, शोहरत छोड़ कैसे बन गई गरीबों की मसीहा....

आम डॉक्टरों से अलग सोच रखने वाले दुर्ग की युवा फिजियोथेरेपिस्ट (physiotherapist) डॉ. हर्षिता शुक्ला इलाज के दौरान उनसे फीस नहीं लेती। (Doctors' Day) (Bhilai news)

By: Dakshi Sahu

Published: 01 Jul 2019, 12:48 PM IST

दाक्षी साहू@ भिलाई. बस्तर के धुर माओवादी क्षेत्र में बचपन बिताने वाली 29 वर्षीय युवा डॉक्टर (Doctor) को देखते ही गरीब, जरूरतमंद, बीमार लोगों के चेहरे खिल जाते हैं। आम डॉक्टरों से अलग सोच रखने वाले दुर्ग की युवा फिजियोथेरेपिस्ट (physiotherapist) डॉ. हर्षिता शुक्ला इलाज के दौरान उनसे फीस नहीं लेती। अपने सामथ्र्य के अनुसार हर तरीके से उन्हें मुफ्त उपचार देने का प्रयास करती है, क्योंकि पिता स्व. अनिल कुमार शुक्ला ने आखिरी सांस लेते हुए उसे सिखाया था कि जीवनभर गरीबों (Poor) की पूरे मन से सेवा करना। (Bhilai news)

रोड एक्सीडेंट में जान गवाने वाले पिता के अधूरे सपने को अपना सपना बनाकर डॉक्टर बेटी ने पढ़ाई के बाद बड़े अस्पताल, महंगी फीस, मोटी तनख्वाह, नाम, शोहरत की जगह खुद का क्लीनिक खोलकर सेवा की कठिन ठगर को चुना। दुर्ग जिले के पिछड़े गांवों, मलीन बस्तियों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ मिलकर हेल्थ कैंप लगाकर पीडि़त मानवता को नया जीवन देने का प्रयास कर रही है। युवा डॉक्टर का मानना है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा वो बुनियादी सुविधा है, जिस पर हर नागरिक का समान अधिकार है। (Bhilai news)

Dr. Harshita shukal

बचपन से तय था बनना है डॉक्टर (Doctors' Day)

डॉ. हर्षिता के पिता पीडब्ल्यूडी विभाग में इंजीनियर थे। उनकी सर्विस का लगभग 10 साल से ज्यादा समय बस्तर में बीता। इस दौरान माओवाद प्रभावित गांवों में आदिवासियों को कई बार बिना उपचार के मरते देख उनकी आंखें भर आती थी। डॉ. हर्षिता बताती है कि पिता के साथ जंगल के अंदर बसे दुर्गम गांवों में जाती थी, तब झाड़-फूंक, बीमार, गरीब, असहाय आदिवासियों को देखकर उन्हें बहुत पीड़ा होती थी। हर बार मन में यही सवाल आता था कि आखिर इन्हें कोई डॉक्टर क्यों नहीं देखने आता। बीमार होने पर इन्हें समय पर दवाइयां क्यों नहीं मिलती? कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने बचपन में ही डॉक्टर बनना तय कर लिया था। (Doctors' Day)

लोगों की मदद के लिए बनाई स्वयं की संस्था

जरूरतमंदों के लिए समय पर बुनियादी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए डॉ. हर्षिता ने परमार्थी जीवनोदक संस्थान की 2013 में दुर्ग से शुरूआत की। इस एनजीओ के जरिए उन्होंने अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टरों को जोड़ा। ताकि हेल्थ कैंप में आने वाले हर तरह के मरीजों का उपचार हो सके। संस्था से जुड़कर डॉ. मोहन अग्रवाल, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष यादव सहित आधा दर्जन से ज्यादा चिकित्सक सक्रिय होकर बिना किसी लाभ के सेवा देते हैं। युवा डॉक्टरों की यह टीम अलग-अलग हेल्थ, मेडिकल कैंपों के माध्यम से अब तक हजारों नि:सहाय, जरूरतमंद मरीजों का उपचार कर चुकी है। (Doctors' Day)

जब तक संकल्प पूरा नहीं होगा, नहीं करूंगी शादी

डॉ. हर्षिता की तरह उनका सपना भी बहुत अनोखा है। वह छत्तीसगढ़ का पहला चाइल्ड फिजिकल रिहैबिटेशन सेंटर खोलना चाहती है। जहां बीमार बच्चों का हर तरीके से उपचार, उनके परिजनों की काउंसलिंग हो सके। ताकि किसी बच्चे की बीमारी की गर्त में जाकर मौत न हो। इसके लिए उन्होंने बच्चों के अनुरूप चिकित्सकीय उपकरणों को डिजाइन करना भी शुरू कर दिया है। डॉ. हर्षिता ने बताया कि जब तक यह सपना पूरा नहीं होता वह खुद का घर नहीं बसाएंगी। इस संकल्प को पूरा करने में उनकी माता अलका और छोटे भाई भी हर संभव मदद कर रहे हैं। ताकि समाज को नई सोच के साथ सकरात्मक दिशा मिल सके। (Bhilai news)

Chhattisgarh Bhilai से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter और Instagram पर ..

ताज़ातरीन ख़बरों, LIVE अपडेट के लिए Download करें patrika Hindi News App.

Show More
Dakshi Sahu Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned