मिलिए छत्तीसगढ़ के तीन जाबांज डॉक्टरों से जो ITBP की वर्दी पहनकर दे रहे देश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल में सेवा

दिल्ली में बने विश्व के सबसे बड़े 10 हजार बिस्तर वाले कोविड-19 के हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों को ठीक करने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को दी है। (National Doctors' Day 2020)

By: Dakshi Sahu

Published: 01 Jul 2020, 01:08 PM IST

कोमल धनेसर@भिलाई. वे चाहते तो एमबीबीएस की डिग्री लेकर किसी मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में नौैकरी कर सकते थे, लेकिन देशसेवा का जज्बा उन्हें आईटीबीपी (ITBP) तक ले आया। यूनिफार्म के साथ एक डॉक्टर की जिम्मेदारी निभाने यह सभी युवा आगे आए तो वक्त ने भी उन्हें देशसेवा का मौका ऐसा मौका दिया कि जिसे करने अच्छे-अच्छे लोग पीछे हट जाए। हाल ही दिल्ली में बने विश्व के सबसे बड़े 10 हजार बिस्तर वाले कोविड-19 (covid hospital Delhi)के हॉस्पिटल में कोरोना के मरीजों को ठीक करने की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी को दी है। जिसमें देशभर से आईटीबीपी के मेडिकल ऑफिसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें छत्तीसगढ़ से भी तीन डॉक्टर वहां पहुंचे हैं। इनमें से डॉ. परमजीत कौर रायपुर के टाटीबंध की रहने वाली है तो डॉ. दीपक ठाकुर मनेन्द्रगढ़ के निवासी है। वहीं रायपुर एम्स में अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. अरूण कुमार ने भी हाल ही में आईटीबीपी ज्वाइन किया है।

गर्व है कि हमें चुना गया-डॉ परमजीत कौर
डॉ. परमजीत कौर रायपुर में पली-बढ़ी और इंदौर के मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया। जब कॅरियर शुरू करने की बारी आई तो छत्तीसगढ़ की इस बेटी ने माओवाद प्रभावित नारायणपुर जिले को चुना। सबने कहा एक महीने रहकर देखो फिर कहना.. लेकिन वह अपने इरादे से नहीं डिगी। जिला मुख्यालय नारायणपुर से 22 किलोमीटर दूर एक प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र बेनूर में डेढ़ साल अपनी सेवा दी। डॉ परमजीत पहली चिकित्सा अधिकारी थी जो उस केन्द्र तक पहुंची थी। कुछ महीने पहले ही आईटीबीपी में बतौर मेडिकल ऑफिसर उसकी ज्वानिंग हुई।

38 बटालियन खरोरा में पोस्टिंग के तीन महीने में ही उन्हें दिल्ली में बने विश्व के सबसे बड़े कोविड-19 के हॉस्टिपल में ड्यूटी करने का मौका मिल गया। डॉ परमजीत का कहना है कि पहले वह केवल छत्तीसगढ़ के लोगों की ही सेवा कर पा रही थी,लेकिन अब आईटीबीपी से जुड़कर देश की सेवा कर पा रही है। उसे गर्व है कि कोरोना संकट के दौर में वह देश के काम आ रही है। एक डॉक्टर होने के नाते वह कोरोना योद्धा बनकर तो अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, पर जल्द ही यूनिफार्म पहनकर वह एक सैनिक की भी जिम्मेदारी निभाने को तैयार है। क्योंकि फोर्स में आने के बाद डॉक्टर्स को केवल मरीजों का इलाज ही नहीं बल्कि गोलियों से दुश्मनों का भी इलाज करना सीखना पड़ता है।

यूनिफार्म सर्विस के सपने को किया साकार-डॉ. दीपक ठाकुर
मनेन्द्रगढ़ के रहने वाले डॉ. दीपक ठाकुर को यूनिफार्म सर्विस का सपना आईटीबीपी तक ले आया। दसवीं के बाद वे तो आर्मी में जाना चाहते थे, लेकिन उस वक्त वह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने अपना एमबीबीएस पूरा किया और उन्हें आईटीबीपी के जरिए अपने सपनों को पंख देने का मौका मिल गया। स्काउटिंग में राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से अवार्ड लेने वाले डॉ. दीपक ठाकुर ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उन्हें देश के सबसे बड़े कोविड हॉस्पिटल में काम करने का मौका मिल रहा है तो उन्होंने यहां पहुंचने जरा सी भी देर नहीं लगाई। क्योंकि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है।

देशसेवा के लिए छोड़ा एम्स-डॉ. अरूण कुमार
आंध्रप्रदेश के निवासी डॉ. अरूण कुमार पिछले डेढ़ साल से एम्स रायपुर में अपनी सेवाएं दे रहे थे। डॉ अरूण बताते हैं कि उन्हें लग रहा था कि वे केवल नौकरी ही कर रहे हैं। मन को संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी। उन्हें लगता था वे कुछ ऐसा करें जिससे मरीजों की सेवा भी हो और देश के लिए भी काम आ सकें। तीन महीने पहले ही उन्होंने आईटीबीपी में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सर्विस शुरू की। वे भी 38 बटालियन में ही सेवा दे रहे थे। उन्हें गर्व है कि कोविड 19 में कोरोना मरीजों की सेवा के लिए उन्हें चुना गया।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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