हेमचंद विवि की पहली महिला कुलपति डॉ. अरूणा ने ग्रहण किया पदभार, कहा अब नहीं चलेगी लेटलतीफी, नियमित स्टाफ की जल्द होगी भर्ती

हेमचंद विवि की पहली महिला कुलपति डॉ. अरूणा ने ग्रहण किया पदभार, कहा अब नहीं चलेगी लेटलतीफी, नियमित स्टाफ की जल्द होगी भर्ती
हेमचंद विवि की पहली महिला कुलपति डॉ. अरूणा ने ग्रहण किया पदभार, कहा अब नहीं चलेगी लेटलतीफी, नियमित स्टाफ की जल्द होगी भर्ती

Dakshi Sahu | Updated: 13 Sep 2019, 04:34:53 PM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

डॉ. अरुणा ने शुक्रवार को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय पहुंचकर कुलपति का प्रभार लिया। अभी तक यह जिम्मेदारी संभागयुक्त दिलीप वासनीकर संभाल रहे थे। वासनीकर का कार्यकाल 6 सितंबर को समाप्त हो गया है।

भिलाई . हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (Durg University ) को आखिरकार नया कुलपति मिल गया। गुरुवार को राजभवन ने कुलपति पद के लिए डॉ. अरुणा पल्टा के नाम पर मुहर लगा दी है। जिसके बाद शुक्रवार को डॉ. पल्टा ने पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने के कहा कि बड़ी जिम्मेदारी के साथ अब विश्वविद्यालय के लिए बड़ा काम करना है। डॉ. पल्टा वही शख्सियत है, जिन्होंने बतौर प्राचार्य शानदार नेतृत्व से रायपुर के राधाबाई शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय को सिर्फ 3 साल में ही संभाग के सर्वश्रेष्ठ कॉलेज का अवॉर्ड दिलाया। यह कॉलेज उनकी ही लीडरशिप में 219 विद्यार्थियों के साथ शासकीय स्कूल के भवन में शुरू हुआ था। कुलपति चयन के लिए पहली बार लिए गए साक्षात्कार में डॉ. अरुणा इकलौती महिला उम्मीदवार थीं।

इनके पढ़ाए आज दुर्ग के कॉलेज में प्रोफेसर
डॉ. अरुणा पल्टा होम साइंस विषय की वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। वह 2009 में पदोन्नति पश्चात प्राचार्य बनीं। डाइट को लेकर उनके कई लेख अखबारों व पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपते आ रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि उनके पढ़ाए या पीएचडी करने वाली छात्राएं आज प्रोफेसर के रूप में कई शासकीय कॉलेजों का हिस्सा हैं। दुर्ग संभाग के कई प्रोफेसरों ने इनके मार्गदर्शन में पीएचडी की है।

कुलपति के लिए आए थे 33 आवेदन
डॉ. अरुणा शुक्रवार को विवि पहुंचकर कुलपति का प्रभार लिया। अभी तक यह जिम्मेदारी संभागयुक्त दिलीप वासनीकर संभाल रहे थे। वासनीकर का कार्यकाल 6 सितंबर को समाप्त हो गया है। राजभवन में कुलपति चयन समिति की बैठक 22 अगस्त को हुई थी, लेकिन इसमें कुलपति के नाम पर मुहर नहीं लग पाई थी। कुलपति पद के लिए आए 33 आवेदनों में से 17 और फिर 10 को शॉर्टलिस्ट कर कुलाधिपति को सौंपा गया था।

नए कुलपति ने पत्रिका से साझा किए अपने विजन
डॉ. अरुणा ने कहा विवि में शैक्षणिक कैलेंडर सबसे अहम होता है। इसमें लेटलतीफी अब नहीं चलेगी। विद्यार्थियों की परीक्षा समय पर हो, उनके रिजल्ट समय पर निकल जाए, इस पर विशेष फोकस होगा।
विवि की परिधि में आने वाले कॉलेजों में विद्यार्थियों की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ विवि का यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट्स (यूटीडी) शुरू करना पहली प्राथमिकता होगी।

विवि का संचालन बेहतर तरीके से हो सके, इसलिए सबसे बेस्ट हैंड्स (अनुभवी कर्मचारी, अधिकारी) साथ लाने उच्च शिक्षा विभाग से चर्चा करेंगी। विवि में नियमित स्टाफ जरूरी अंग होता है। स्टाफ भर्ती के लिए भी कोशिश रहेगी।
अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठकर सिर्फ मीटिंग करने से कुछ नहीं होगा। विवि जो निर्णय लेगा, उसे तत्काल अमल में लाया जाएगा। कमजोर रिजल्ट वाले कॉलेजों का निरीक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए नए फैसले होंगे।

14 फरवरी को प्रो. सराफ ने दिया था इस्तीफा
डॉ. शैलेंद्र सराफ हेमचंद विवि के दूसरे कुलपति थे।उन्होंने 2 अप्रेल 2018 को पदभार संभाला था। उनके नाम की घोषणा 28 मार्च को हुई थी। उनके पहले साइंस कॉलेज के प्रोफेसर व विवि के डीन डॉ. ओपी गुप्ता अस्थाई कुलपति थे। डॉ. सराफ ने उनसे ही प्रभार लिया था। इस तरह वे विवि के दूसरे कुलपति के तौर नियुक्त किए गए थे। इसके बाद कुछ महीने कुलपति का पद संभालने के बाद प्रो. सराफ ने 14 फरवरी 2019 को अपना इस्तीफा दे दिया था। उनके बाद संभागायुक्त दिलीप वासनीकर को प्रभारी कुलपति बनाया गया था।

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