ये है डॉक्टर संगीता, इन्होंने सड़क किनारे रहने वाले बंजारों के लिए फ्री कर दिया OPD, कहती हैं मानवता से बड़ा कुछ नहीं

उपचार और मूलभूत चिकित्सा सुविधा से दूर इनकी दीन-हीन दशा देखकर डॉ. संगीता ने न सिर्फ इनकी सुध ली बल्कि कुम्हारी के एक निजी अस्पताल में ओपीडी भी मुफ्त कराया।

By: Dakshi Sahu

Published: 20 Feb 2021, 04:02 PM IST

भिलाई. कहते हैं जिनका कोई देखने वाला नहीं होता उनका भगवान होता है पर यहां डॉक्टर दीदी है। चरोदा, कुम्हारी नेशनल हाइवे के किनारे मूर्ति, साफ्ट टॉयज की दुकान लगाने वाले गरीब बंजारे जब बीमार होते तो पैसों की कमी के कारण अपना ठीक से इलाज भी नहीं करा पाते थे। ऐसे में डॉक्टर के रूप में भगवान बनकर भिलाई की युवा स्त्री रोग विशेषज्ञ ने मदद का हाथ बढ़ाया। उपचार और मूलभूत चिकित्सा सुविधा से दूर इनकी दीन-हीन दशा देखकर डॉ. संगीता ने न सिर्फ इनकी सुध ली बल्कि कुम्हारी के एक निजी अस्पताल में ओपीडी भी मुफ्त कराया। अब इन बंजारों को बिना इलाज मरने का डर नहीं सताता। साथ ही इनके परिवार में रहने वाली महिलाओं और बच्चियों को डॉक्टर दीदी का सहारा मिल गया है। राजस्थान में अपने घर से सैकड़ों किमी. दूर सिर्फ पेट की खातिर यहां झोपड़ी में रहने वाले इन प्रवासियों के लिए डॉ. संगीता किसी फरिश्ते से कम नहीं है। इसलिए प्यार से ये बंजारे संगीता को डॉक्टर दीदी कहते हंै।

दयनीय दशा देखकर होती थी पीड़ा
डॉ. संगीता ने बताया कि जब भी वो किसी काम से रायपुर जाती तो सड़क किनारे झोपिडय़ों में बंजारों की दयनीय दशा देखकर व्यथित हो जाती। इसी बीच कुम्हारी के एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस का मौका मिला। वहां कई बंजारा परिवार आते लेकिन पैसों की कमी के कारण ठीक से इलाज नहीं करवा पाते थे। ऐसे में मैंने उनकी बस्ती जाने का निर्णय लिया, वहां गंदगी और लाचार जिंदगी देख मन भर आया। उनसे कहा कि वो किसी भी वक्त हॉस्पिटल आकर मुझसे नि:शुल्क परामर्श ले सकते हैं। तब से ये सिलसिला शुरू हो गया। अब बंजारे बेझिझक अस्पताल में आकर अपना उपचार करवाते हैं। ओपीडी शुल्क उनके लिए फ्री रखा गया है। एक डॉक्टर के रूप में इससे अच्छा क्या हो सकता है कि हर जरूरतमंद को समय पर उपचार मिल सके।

पिता ने सिखाया जिस शहर ने दिया उसे लौटाने की बारी है....
दुर्ग जिले की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञों में एक डॉ. संगीता बचपन से डॉक्टर बनाना चाहती थी। उन्होंने बताया कि जब वो बचपन में अपने मां के साथ अस्पताल जाती तो वहां लेडी डॉक्टर को देखकर बड़ा खुश हो जाती थी। इसलिए 12 वीं बोर्ड के बाद बीएससी में एडमिशन लेकर साथ-साथ सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज से मेडिकल एंट्रेस की तैयारी की। सीजी पीएमटी में टॉप टेन में जगह बनाकर पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फिर कानपुर मेडिकल कॉलेज से पीजी की पढ़ाई की। जब स्पेशलिस्ट के रूप में प्रैक्टिस शुरू किया तब पिता जी ने कहा कि जिस शहर ने तुम्हें डॉक्टर बनाया अब उस शहर को सेवा देने की बारी तुम्हारी है। इसलिए प्रैक्टिस के लिए बाहर जाने की बजाय अपने शहर को चुना। विषम आर्थिक परिस्थिति में सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मदद का हाथ बढ़ाकर मुझे हिम्मत दी थी। वही मदद का हाथ मैंने डॉक्टर बनकर इन बंजारों के लिए बढ़ाया है।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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