हुनरमंद छात्रों के बनाए प्रोडक्ट बेचेगी छत्तीसगढ़ की ये यूनिवर्सिटी, पढ़ाई के साथ-साथ मिलेगा पैसा कमाने का मौका

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अपने हुनरमंद छात्रों को स्वरोजगार से जोड़कर कमाई का जमाई देने जा रहा है। दुर्ग संभाग के कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र अब हस्त निर्मित प्रोडक्ट्स हेमचंद विवि में बेच सकेंगे।

By: Dakshi Sahu

Updated: 20 Jan 2021, 02:01 PM IST

भिलाई. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय अपने हुनरमंद छात्रों को स्वरोजगार से जोड़कर कमाई का जमाई देने जा रहा है। दुर्ग संभाग के कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र अब हस्त निर्मित प्रोडक्ट्स हेमचंद विवि में बेच सकेंगे। ऐसे बहुत से छात्र हैं जो अपने हाथों से कलाकृतियां, सजावटी सामान, मिट्टी के दीए सरीखे हजारों आइटम बनाने में महारत रखते हैं, मगर इस हुनरमंदी के बाद भी कमाई से दूर है। ऐसे विद्यार्थियों को अब हेमचंद विवि बाजार देगा। हेमचंद विश्वविद्यालय परिसर में 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद बोस उत्पादन केंद्र की शुरुआत होने जा रही है, जिसमें विवि हुनरमंद विद्यार्थियों के प्रोडक्ट्स को रखकर बेचेगा। प्रोडक्ट बिकने के बाद इससे हुई कमाई का पूरा हिस्सा उक्त विद्यार्थी को मिलेगा। हेमचंद विवि नो प्रॉफिट नो लॉस के पैटर्न पर चलकर सिर्फ छात्रों के लिए माध्यम का काम करेगा। विवि अपने वेबसाइट पर भी हुनरमंद छात्रों के अनोखे बाजार की जानकारी देगा, जिससे उनके प्रोडक्ट्स लाखों छात्रों तक पहुंचेंगे।

कुलपति करेंगी उद्घाटन
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस विवि उत्पादन केन्द्र का उद्घाटन 23 जनवरी को दोपहर 12बजे विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा करेंगी। छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के निर्देशानुसार सुभाष चन्द्र बोस की जंयती के मौके पर विवि आधारित रोजगार और प्रशिक्षण पहल प्रारंभ होगी। विवि यहां सिर्फ प्रोडक्ट्स को रखकर बेचेगा नहीं बल्कि हुनर को और भी तराशने के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था भी समय समय पर करता रहेगा, ताकि विद्यार्थी मोटिवेट होते रहे।

प्रोडक्ट रखने होगी पर्मानेंट व्यवस्था
हस्त निर्मित आइटम, कलाकृतियां सरीखे तमाम प्रोडक्ट्स विवि में भी रहेंगे। इन्हें बेचने के लिए विवि पर्मानेंट व्यवस्था करेगा। अभी विवि में लाइब्रेरी नहीं है, जिसके हॉल को इन छात्रों के प्रोडक्ट्स की बिक्री के लिए एक शानदान दुकान की तरह सजाकर पेश किया जाएगा। विवि ने अपने कॉलेजों को सूचना दे दी है कि जितने भी ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके पास हस्तनिर्मित कलाकृतियां या अन्य सामान हैं तो वे जल्द इसे विवि में लगने वाली प्रदर्शन के लिए भेज दें।

ये लोग खरीदेंगे पहले प्रोडक्ट्स
कुलपति डॉ. पल्टा ने बताया कि इस केन्द्र की स्थापना से नवोदित उद्यमी न केवल उत्पाद बनाने की बारिकियों को समझेंगे बल्कि उन्हें इकाई लागत गणना का भी ज्ञान होगा। दूसरे चरण में विवि उत्पादन केन्द्र राज्य में निजी व्यवसायों के लिए एक परामर्श निकाय के रूप में कार्य कर सकेंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय भी होगी। तीसरे चरण में ऐसे केन्द्र विभिन्न युवा समूहों, स्वसहायता समूहों, ग्रामीण औद्योगिक पार्क आदि से जुड़कर कार्य करने में सक्षम हो सकेंगे। केंद्र के उद्घाटन अवसर पर एनएसएस ईकाइयों के स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेट्स, विवि के कर्मचारियों द्वारा हस्त निर्मित वस्तुए एवं कलाकृतियों को खरीदा जाएगा। डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, डीएसडब्ल्यू, दुर्ग विवि ने बताया कि हमारे युवा हुनरमंद है। उन्हें स्वरोजगार से जोडऩे के लिए ही विवि में उत्पादन व विक्रय केंद्र की शुरुआत होने जा रही है। इससे विद्यार्थी अपने बनाए प्रोडक्ट विवि के माध्यम से बेच सकेंगे। उन्हें प्रोडक्ट की पूरी कीमत मिलेगी। इस शुरुआत के बाद वे अपने स्टार्टअप की दिशा में भी बढ़ सकेंगे।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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