बिना अनुमति के एनएच के किनारे ग्रीन लैंड पर गड़ा रहे बिजली के खंभे

बिना अनुमति के एनएच के किनारे ग्रीन लैंड पर गड़ा रहे बिजली के खंभे

Naresh Verma | Publish: Dec, 09 2018 12:21:56 AM (IST) | Updated: Dec, 09 2018 12:21:57 AM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

जिला और निगम प्रशासन की नाक नीचे पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित जगह (ग्रीन लैंड) पर बिजली के खंभे खड़े किए जा रहे हैं। नगर निगम प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय ठेकेदार को मौन सहमति दे रहा है।

भिलाई. जिला और निगम प्रशासन की नाक नीचे पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित जगह (ग्रीन लैंड) पर बिजली के खंभे खड़े किए जा रहे हैं। नगर निगम प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय ठेकेदार को मौन सहमति दे रहा है। आगे भी यही आलम रहा तो बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर की वजह से नेशनल हाइवे के किनारे का पूरा ग्रीन लैंड ही खत्म हो जाएगा। रोड के किनारे हरियाली के लिए जगह भी नहीं बचेगी। ठेकेदार ने अवैध तरीके से नेशनल हाइवे (एनएच)के मेन कॅरिज-वे और सर्विस रोड के बीच खाली जमीन पर खड़े बिजली के खंभों को ग्रीन लैंड पर शिफ्ट करने की योजना बनाई है। सुपेला से चंद्रा मौर्या चौक के बीच आरक्षित ग्रीन लैंड के बीचोबीच खंभे खड़े कर ३३ केवीए के तार खींचने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
ठेकेदारों की मनमानी व अफसरों की लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को पर्यावरण प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ेगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए आरक्षित जगह पर नियम विरुद्ध खंभे खड़े कर तार खींच देने से बड़े-बड़े पेड़ों को काटना पड़ेगा। जहां से तार गुजरेगा उसके नीचे छायादार पौधे लगाना भी मुश्किल हो जाएगा। जो अभी पौधे हैं, वे बढ़ेंगे और उनकी शाखाएं फैलेंगी तब विद्युत विभाग शार्ट सर्किट का हवाला देकर टहनियों को काट देगा। पौधों को बढऩे का मौका ही नहीं मिलेगा। यही हाल नेहरू नगर चौक से प्रियदर्शनी परिसर सुपेला के ग्रीन लैंड का है। जहां २०१० में क्वींस बैंटन रिले की अगुवाई में रोपे गए पौधे, अब बड़े हो गए हैं। तार से टकराने पर विद्युत कंपनी के कर्मचारी ५०-६० दिन के अंतराल में पेड़ों की टहनियों को काटते रहते हैं।

नगर निगम और पर्यावरण संरक्षण मंडल दोनों जिम्मेदार

शहर की सभी प्रमुख सड़कों के किनारे २५-३५ फीट चौड़ा ग्रीन लैंड है, लेकिन कहीं पर भी आरक्षित जमीन का सही उपयोग नहीं हुआ है। आरक्षित जमीन पर हरियाली रहे, यह तय करना पर्यावरण संरक्षण मंडल की जिम्मेदारी है। पौधे लगाना, उसकी देखभाल करना और अनुमति के बगैर किसी भी प्रकार से कोई कार्य न हो, यह नगर पालिक निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षण विभाग ने कभी निगम प्रशासन को नोटिस जारी नहीं किया। निगम प्रशासन ने भी नियम विरुद्ध कार्य करने वाले ठेकेदार या कब्जाधारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की है।

विद्युत कंपनी ने जिस एजेंसी को ठेका दिया, उसने की लापरवाही

दरअसल में नेशनल हाइवे (एनएच) मेन कॅरिज वे और सर्विस रोड के किनारे के खंभों को सर्विस रोड के बाहर शिफ्ट किया जाना है। ताकि फ्लाई ओवर के निर्माण के दौरान वाहनों की आवाजाही में दिक्कत न हो, लेकिन विद्युत वितरण कंपनी ने जिस एजेंसी को ठेका दिया है, उसने निगम प्रशासन से एनओसी लिए बिना ही काम शुरू कर दिया है। सर्विस रोड के बाद आरक्षित ग्रीन लैंड के बीचोबीच खंभे खड़े करने के लिए गड्ढे की खुदाई कर रहे हैं।

सामंजस्य बनाकर करें काम तो बच सकते हैं सैंकड़ों हरे-भरे पेड़

आपसी सामंजस्य बनाकर काम करे तो पोल को शिफ्ट करने में दिक्कत नहीं आएगी। नेहरू नगर चौक से संजय नगर सुपेला तक और सुपेला स्थित हनुमान मंदिर से सड़क नंबर १८ तक पर्याप्त जमीन है। होर्र्डिंग्स और अतिक्रमण को हटाकर एक किनारे पर पोल को शिफ्ट किया जा सकता है। ट्रांसफार्मर को सुरक्षित किया जा सकता है। ठेकेदार ने बिना अनुमति के ही काम शुरू कर दिया। निगम के अधिकारियों ने भी ध्यान नहंीं दिया।

सड़कों के किनारे आरक्षित है जमीन

करुणा हॉस्पिटल पॉवर हाउस नंदनी रोड से टाउनशिप चौक अहिवारा चौक तक रोड के किनारे पौधे लगाने के लिए जमीन आरक्षित है, लेकिन आरक्षित जमीन पर होटल, ढाबा और मकान बन गए हैं।
साक्षरता चौक से सड़क-१८ तक जमीन है। यहां पर भी लोगों ने कब्जा कर लिया है। जमीन का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में करते हैं।
कोसा नाला से संजय नगर सुपेला में रोड के किनारे जमीन है। निगम या नेशनल हाइवे ने यहां कभी पौधे लगाया ही नहीं।
शहीद किरण देशमुख रोड से शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल रिसाली तक रोड के पूर्व दिशा में ३०-३५ फीट जमीन खाली है। निगम प्रशासन ने डेढ़ साल पहले कुछ स्थानों की फैसिंग कर पौधे रोपे हैं।
जुनवानी चौक से रानी अंवती बाई कोहका चौक तक रोड के दोनों तरफ हरियाली के लिए जमीन आरक्षित है। लोक निर्माण विभाग या निगम ने पौधे-लगाने की दिशा में कोई प्रयास नहंीं किया।

इस संबंध में निगम कमिश्नर एसके सुंदरानी का कहना है कि पोल शिफ्टिंग के लिए एनओसी जारी नहीं किया है। मुझे कार्य की जानकारी भी नहीं है। यदि कोई बिना अनुमति के पोल को शिफ्ट कर रहा है तो यह अवैध है। उसे तत्काल रुकवाया जाएगा।

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