... इस घर से हर दिन उठ रही बीएसपी कर्मी कार्तिक राम ठाकुर की अर्थी

इंसानियत को शर्मसार कर रहा यह दृश्य.

By: Abdul Salam

Published: 18 Jan 2021, 11:13 PM IST

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारी कार्तिक राम ठाकुर के घर में सिर्फ एक उनकी ही मौत हुई है, लेकिन पिछले 15 दिनों से हर दिन परिवार अंतिम संस्कार के दर्द को झेल रहा है। घर के आंगन पर नजर दौड़ाने पर शव को मुक्तिधाम लेकर जाने के लिए अर्थी का सारा सामान तैयार रखा हुआ है। मामला बीएसपी प्रबंधन और परिवार के बीच अब तक सुलह नहीं होने की वजह से अटका हुआ है। परिवार मेडिकल ग्राउंड पर बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर प्रबंधन का कहना है कि मरीज के जीवित रहते मेडिकल बोर्ड बैठता और फैसला करता है। इस बात पर ही वह अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज कर रहा है।

बीएसपी कर्मी का प्रबंधन के नाम आखिरी पत्र
निवेदन है कि लगभग दो माह से मेरी तबीयत खराब होने के कारण मेरा इलाज भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-9 अस्पताल में चल रहा है। जिसके कारण ड्यूटी करने में असमर्थ हूं जांच से पता चला है कि मेरी दोनों किडनी खराब है। अत: आपसे निवेदन है कि मुझे चिकित्सीय अयोग्य घोषित करके मेरे आश्रित मेरे पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने की कृपा करेंगे। यह पत्र भिलाई इस्पात संयंत्र में अटेंडेंट पद पर कार्यरत कार्तिक राम ठाकुर ने प्रबंधन के नाम 2 जनवरी 2021 को लिखा। इसके बाद वे सोमवार की शाम को सेक्टर-9 अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस लिए।

बेटे को दिया जाए अनुकंपा नियुक्ति
पत्नी आशन ठाकुर ने मांग किया है कि अनुकंपा नियुक्ति बच्चों को दी जाए, इसके बाद ही शव को अंतिम संस्कार के लिए लिया जाएगा। आवेदन भी दे दिए थे, लेकिन बोर्ड की बैठक नहीं हुई है तो इसमें परिवार कहां से दोषी है। बोर्ड की बैठक तो प्रबंधन तय करता है। लंबे समय से पति सेक्टर-9 में दाखिल थे, उनका किडनी खराब हो गया था, उसका ही इलाज किया जा रहा था।

परिवार के साथ खड़ा है समाज
गोंणवाना गोड़ महासभा के जिलाध्यक्ष व रिसाली के पार्षद चंद्रभान सिंह ठाकुर ने कहा कि पीडि़त परिवार को बीएसपी प्रबंधन जल्द अनुकंपा नियुक्ति दे। जिसके बाद समाज अंतिम संस्कार करेगा। परिवार के साथ समाज हर स्तर पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

सेल-बीएसपी तीन तरह की बीमारियों पर देता है अनुकंपा नियुक्ति
भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारियों को तीन तरह की बीमारी होने पर प्रबंधन उसके आवेदन पर अनफिट घोषित करता है। इसके बाद कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जानी है। बीमारी तय होने के बाद भी अगर कर्मचारी की स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य घोषित का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता, इस दौरान कर्मचारी की उपचार के दौरान मौत हो जाती है, तो उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाती है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने एडवांस कैंसर, किडनी व न्यूरो के गंभीर मरीजों को पॉलिसी में नौकरी देने का प्रावधान रखा है। इसके लिए बीमार को आवेदन देना होगा और मरीज की जांच के बाद उसे मेडिकल बोर्ड स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य घोषित करेगा, तब आश्रित को अनुकंपा के तहत नौकरी दी जाएगी।

इंतजार में खत्म हो जाते हैं मरीज
सेल की यह पॉलिसी सुनने में जितनी आसान है, अपनाने में उतनी ही मुश्किल है। इस जटिल प्रक्रिया से गुजरने के दौरान कई मरीज की मौत हो जाती है। गंभीर बीमार से ग्रसित मरीज मेडिकल अनफिट घोषित होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। इस तरह से उनके आश्रितों को जो अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है, वह नहीं मिल पाती।

यह है मेडिकल अनफिट प्रोसेस
बीएसपी कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार होने के बाद अपने को मेडिकल अनफिट (स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य) घोषित करने के लिए विभाग प्रमुख को आवेदन देता है।
- विभाग प्रमुख इस आवेदन को कार्मिक विभाग के माध्यम से व्यवसायिक स्वास्थ्य सेवा केन्द्र भेजता है।
- व्यवसायिक स्वास्थ्य केन्द्र आवेदन को प्राथमिक परीक्षण के बाद बीमार कार्मिक को वापस जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सेक्टर-9 भेज देता है।
- बीमार कर्मचारी संबंधित चिकित्सक से एपाइंटमेंट लेकर परीक्षण करवाता है।
- जांच रिपोर्ट के आधार पर बीमार कर्मी को मेडिकल बोर्ड में उपस्थित होने का आर्डर जारी किया जाता है।
- माह में एक बार होने वाले मेडिकल बोर्ड की बैठक में उस प्रस्ताव को रखा जाता है। जहां पर भी बीमार को मौजूद रहना होता है।
- इस पूरी प्रक्रिया में उसे करीब एक से दो माह का समय लग जाता है। बीमार कर्मचारी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मानसिक व शारीरक पीड़ा से गुजरता है।
- इस बीच अगर बीमार की मौत हो जाती है और उसके परिवार के हाथ स्थायी चिकित्सकीय अयोग्य घोषित वाला प्रमाण पत्र नहीं है, तो दस्तावेज पूरा नहीं होने की बात कहते हुए अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाती है।

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