लीज पर आवास मिलने की आस में बीएसपी के हजारों पूर्व कार्मिकों ने नहीं बनाया आशियाना

20 दिसंबर को नगर सेवा विभाग के सामने करेंगे धरना प्रदर्शन.

By: Abdul Salam

Published: 08 Dec 2019, 09:19 PM IST

भिलाई. बीएसपी के हजारों कार्मिकों ने रिटायर्ड होने के बाद भी अपना आशियाना तैयार नहीं किया। वे टाउनशिप में रहते-रहते जैसे यहां के ही होकर रह गए। अब वे चाहकर भी यहां से जाना नहीं चाहते। इसी वजह से रिटायर्ड होने के बाद मकान खरीदकर शिफ्ट होने की जगह, इंतजार कर रहे हैं कि कब छठवें चरण का लीज आएगा। लीज संघर्ष कमेटी की बैठक में पांच साल से आने वालों की संख्या भले ही बहुत अधिक न हो, लेकिन इस मांग के समर्थन में हजारों हैं। वे चाहते हैं कि जल्द हाऊस लीज आए, जिससे वे जिस आवास में रह रहे हैं, उस आवास को लीज पर ले सके। अब कमेटी 20 दिसंबर 2019 को आंदोलन करने की तैयारी कर रही है।

288 वीं सप्ताहिक बैठक
सेक्टर-2 के शक्ति सदन में रविवार को हाउस लीज संयुक्त संघर्ष कमेटी की 288 वीं सप्ताहिक बैठक हुई। जिसमें संचालक मंडल ने सदस्यों को हाउस लीज आंदोलन के साढ़े पांच साल पूरे होने के मौके पर आंदोलन के शुरुआती दौर के बारे में जनकारी दी। उन्होंने बताया की 4 अप्रेल 1958 को सोवियत संघ के सहयोग से बीएसपी की स्थापना हुई थी, जिससे भिलाई एक आधुनिक छत्तीसगढ़ का शिल्पी शहर बना। देश के कोने कोने से लोगों को लाकर बसाने वाले बीएसपी के पूर्व कार्मिक खुद मकान के लिए तरस रहे हैं। वे लीज पर मकान मिलने की आस में पिछले साढ़े पांच साल से आंदोलन कर रहे हैं.

5 जून 2014 से शुरू किए आंदोलन
हाउस लीज संयुक्त संघर्ष समिति ने 5 जून 2014 को सिंटरिंग प्लांट क्रमांक- 2 भिलाई के कार्मिकों ने मिलकर भिलाई में हाउस लीज लागू कराने के लिए पहली बार विचार कर एक समिति बनाने की योजना बनाई। इसके लिए निरंतर हर रविवार को साप्ताहिक बैठक कर उसे एक आंदोलन का रूप दिए।

हजारों शामिल हुए रैली में
ग्यारह सदस्यों से शुरू हुई इस समिति ने जो विश्वास अर्जित किया, जिससे समिति की पहली रैली में करीब 3 हजार लोगों ने मिलकर 17 अगस्त 2014 को बीएसपी के तात्कालीन सीईओ सीएस चंद्रशेखरन तक अपना ज्ञापन पहुंचाया। इस बीच मार्ग दर्शक वरिष्ठ नागरिक मंच जो हाउस लीज योजना के लिए पहले से ही प्रयासरत थे। उन्होंने भी अपना समर्थन संघर्ष समिति को दे दिया।

यह थे मौजूद
इस मौके पर बैठक में अध्यक्ष राजेंद्र परगनिहा, पीआर वर्मा, पीसी शर्मा, राजेंद्र शर्मा, बीपी राजपूत, टीकम वर्मा, बीपी चौरसिया, शत्रुघन धनकर, नारद साहू, धनाऊ मंडावी, केआर साहू, पुनाराम, तेनसिंग राजपूत, नंदकुमार वर्मा, हरेंद्र पांडेय, अनिल साहू, लियाकत अली, चेतन यादव, सत्यदेव प्रसाद, रमेश पाल, एसएल चंद्रवंसी, गजानंद, तुलसी साहू, शंकर साहू, सुरेंद्र मोहंती, आरके चौबे, बोरकर, जीएल देवदास, एमआर अनंत, रमेश पेंढारकर मौजूद थे।

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