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Father’s Day 2024: एक हजार पेड़ों के पिता देवचरण बेटे की तरह करते हैं देखभाल

Father’s Day 2024: देवचरण का कहना है कि वे उक्त जमीन पर 50 प्रजाति के पौधे रोपकर बड़ा करना चाहते हैं। वहीं कम से कम 108 चंदन के पेड़ लगाने की भी इच्छा है।

भिलाईJun 16, 2024 / 12:33 pm

Shrishti Singh

Father's Day 2024

Father’s Day 2024: पर्यावरण और पेड़-पौधों की अनदेखी की इस दौर में पाटन ब्लाक के ग्राम पंचायत बड़े औंरी निवासी देवचरण साहू एक हजार से अधिक पेड़ पौधों के लिए पिता के सामान है। देवचरण का पेड़-पौधों से लगाव ऐसा है कि वे न सिर्फ सालों से लगातार पौधे रोप रहे हैं, बल्कि उनकी बेटों की तरह देखभाल भी कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि गांव के एक एकड़ बंजर भूमि पर एक हजार से ज्यादा पौधों को सींचकर उन्होंने विशाल पेड़ों में तब्दील कर लिया है। इनके अलावा उनके लगाए कई बरगद और पीपल के विशालकाय पेड़ गांव में हरियाली बिखेर रहे हैं।

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देवचरण साहू ने पौधरोपण मुहिम की शुरुआत वर्ष 2001 में की। इस बीच मुफलिसी का जीवन और पेड़ों को नुकसान पहुचाने वाले भी देवचरण का हौसला डिगा नहीं पाए हैं। देवचरण बताते हैं कि उन्हें स्कूली जीवन से पेड़ पौधों के प्रति लगाव रहा है। कई जगहों पर पौध लगाए हैं, जो आज बड़े होकर हरियाली बिखेर रहे हैं।

इनमें कई बरगद और पीपल के पेड़ भी शामिल हैं। 65 वर्षीय देवचरण के इस कार्य में उनकी पत्नी यशोदा साहू व परिवार के बच्चे भी पूरे मनोयोग से सहयोग करते हैं। वे लगभग हर दिन कोई न कोई पौधा लगाते हैं और इसके अलावा पहले से लगाए गए पौधों की सिंचाई व देखभाल में पूरा दिन लगा देते हैं। उन्होंने बंजर जमीन में लगभग जंगल खड़ा कर लिया है।

तंगहाली के बाद भी नहीं डिगा हौसला

देवचरण का जीवन बेहद तंगहाली में चलता है, इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं डिगने दिया है। वे कहते हैं कि एक दिन उनकी मेहनत को जरूर पहचान मिलेगी, इस उमीद में मुहिम में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि जब कोई पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है तो उन्हें बेहद दुख होता है। जब पेड़ों को काट दिया गया था तो पति-पत्नी दोनों का कई दिन उदासी में बीता। फिर पेड़ों को दोबारा सींचकर तैयार करने का फैसला किया।

उनका कहना है कि इस बाग में छोटे बच्चे खेलते कूदते हैं, तो उन्हें अच्छा लगता है। वे चाहते हैं कि एक एकड़ में रोपे गए पेड़ों की सुरक्षा के लिए एक दीवाल बन जाए तो पेड़ सुरक्षित रहेंगे। उनकी माली हालत ऐसी नहीं है कि चारदीवारी खड़ा कर सके। शासन स्तर पर मदद की कई बार गुहार लगा चुके हैं। देवचरण बताते हैं कि वर्ष 2012-13 में वे किसी काम से गांव से बाहर चले गए। इस दौरान अवांछित तत्वों ने उनके नर्सरी के करीब 500 पेड़ों को नुकसान पहुंचाया।

कई पेड़ों को काट दिया वहीं छोटे पौधों को तहस-नहस कर दिया। यहां तक कि नर्सरी के उपयोगी औजारों को भी फेंक दिया, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। उन्होंने भरी गर्मी में आधा किमी दूर नाले से कांवर में पानी लाकर ठूंठ की सिंचाई की। अब ठूंठ भी हरे-भरे पेड़ों में तब्दील हो गए हैं।

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Father’s Day 2024: चंदन के 108 के साथ 50 प्रजाति के पौधों की इच्छा

देवचरण ने एक एकड़ से अधिक बंजर भूमि में हरियाली फैला दिया है। यहां अभी सीताफल, जामुन, रामफल, आंवला, करौंदा, नीबू, कटहल, बेल, नारियल, करंज, बरगद, पीपल सहित 35 प्रजाति के पौधे रोप चुके हैं। इनमें से एक हजार से ज्यादा पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। देवचरण का कहना है कि वे उक्त जमीन पर 50 प्रजाति के पौधे रोपकर बड़ा करना चाहते हैं। वहीं कम से कम 108 चंदन के पेड़ लगाने की भी इच्छा है।

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