scriptFilariasis free in 3 years, efforts going on in Durg for 18 years | दवा देने से 3 साल में जिला हो जाता फाइलेरिया से मुक्त, 18 साल से दुर्ग में चल रहा प्रयास | Patrika News

दवा देने से 3 साल में जिला हो जाता फाइलेरिया से मुक्त, 18 साल से दुर्ग में चल रहा प्रयास

लोगों में जागरूकता का अभाव.

भिलाई

Published: January 13, 2022 10:01:45 pm

भिलाई. फाइलेरिया की दवा 3 साल तक अगर जिला की कुल आबादी के 65 फीसदी लोग सेवन कर लें, तो जिला फाइलेरिया से मुक्त हो जाता है। दुर्ग जिला में 18 साल से प्रयास चल रहा है। इस दरमियान दस से अधिक राउंड में दवा बांटी जा चुकी है। बावजूद इसके अभी भी फाइलेरिया के ट्रांसमिशन के केस टॉस्क में मिल रहे हैं। इसके पीछे सबसे अहम वजह लोगों में जागरूकता की कमी है। यह मर्ज तुरंत असर नहीं दिखाता, हाथी पांव की परेशानी मरीज को करीब 5 से 7 साल बाद नजर आती है। इस वजह से जब दवा बांटी जाती है लोग लेकर खिड़की के कोने में रख देते हैं। यह बात बच्चों का ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे करने दौरान सामने आ रही है।

दवा देने से 3 साल में जिला हो जाता फाइलेरिया से मुक्त, 18 साल से दुर्ग में चल रहा प्रयास
दवा देने से 3 साल में जिला हो जाता फाइलेरिया से मुक्त, 18 साल से दुर्ग में चल रहा प्रयास

सर्वे में 52 से अधिक मिले मामले
जिला में ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे स्कूलों में शुरू किया गया था। इसके साथ-साथ कम्प्यूनिटी सर्वे भी किया गया। जिसमें करीब 52 से अधिक मामले सामने आए। इस बीच कोरोना के केस बढ़े और टास्क को रोक दिया गया।

बांटना होगा 14 लाख लोगों को फाइलेरिया की दवा
फाइलेरिया की दवा 8, 9, 10 फरवरी 2019 को आखिरी बार बांटने का काम किया गया था। अब फिर एक बार 14 लाख लोगों तक दवा पहुंचाने का काम विभाग के जिम्मे आने वाला है। कुल आबादी के 85 फीसदी तक दवा पहुंचाना है जिसमें से 65 फीसदी तक को दवा खिलाने का लक्ष्य होता है। यह काम आसान नहीं है। इसके बाद भी विभाग हर बार कोशिश कर रहा है।

सबसे बड़ी भूमिका आम लोगों की
जिला को फाइलेरिया से मुक्त करना कोई आसान काम नहीं है। विभाग की टीम अगर 14 लाख लोगों तक दवा पहुंचा भी देती है तो उसको खाने का काम आम लोगों का ही है। अगर वे दवा को लेकर किसी कोने में रख देंगे तो फाइलेरिया इसी तरह से हमारे बीच मौजूद रहेगा। 18 क्या 28 साल में भी दुर्ग जिला फाइलेरिया से मुक्त नहीं हो पाएगा।

नाइट सर्वे का काम करने पर मंथन
विभाग फिर एक बार नाइट सर्वे की ओर कदम बढ़ाने के लिए मंथन कर रहा है। रात 9 से 12 बजे के मध्य घर-घर जाकर लोगों के रक्त का स्लाइड बनाया जाता है और देखा जाता है कि पॉजिटिव तो नहीं है। यह वक्त ही होता है जब फाइलेरिया की मौजूदगी शरीर में साफ तौर पर स्लाइड में नजर आ सकती है। इस वजह से नाइट सर्वे किया जाता है। वर्तमान में कोरोना के जिस तरह से मामले बढ़ रहे हैं, तब लोग किसी को रात में अपने घर के दरवाजे के भीतर प्रवेश करने देंगे, यह उम्मीद कम ही है।

दूसरे प्रदेशों जैसी व्यवस्था की दरकार
देश के दूसरे प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश में फाइलेरिया का अलग से विभाग है। उसके कर्मचारी अलग से है। छत्तीसगढ़ में ऐसा नहीं है। दुर्ग जिला में मलेरिया विभाग के पास एक चिकित्सक और 12 कर्मी है। इनके कांधों में माह बदलने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बदलती जाती है। एक विभाग को पहले डेंगू फिर मलेरिया, इसके बाद चिकनगुनिया, जापानी एनसेटेलाइथिम (मस्तिष्क ज्वर), काला जार, फाइलेरिया से निपटना पड़ता है। तब किसी एक काम को योजना बनाकर पूरा फोकस करके टीम किस तरह से अमलीजामा पहना सकती है। बावजूद इसके विभाग के जिम्मेदार हर काम को कर रहे हैं। अब कोरोना की दवा की पैंकिग का काम भी इनके हाथ में थमा दिया गया है।

दी जाती है फाइलेरिया दवा
डॉक्टर आलोक शुक्ला, सचिव, स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने बताया कि योजना के तहत रेड जोन में फाइलेरिया की दवा का वितरण किया जाता है। जब तक जिला फाइलेरिया मुक्त न हो जाए। दुर्ग में भी दवा का वितरण किया जाता रहेगा।

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