पत्रिका इम्पैक्ट : पढ़ाई के लिए पानी में कमर तक डूब कर जाने की मजबूरी जल्द होगी खत्म, पढ़ें खबर

स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों की दशकों पुरानी मांग अब जल्द पूरी होने वाली है। बच्चों को नदी पार कर स्कूल जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 25 Jan 2018, 12:29 AM IST

बालोद. स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों की दशकों पुरानी मांग अब जल्द पूरी होने वाली है। खासकर यहां के बच्चों को नदी पार कर स्कूल जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। यह फैसला शासन-प्रशासन ने लिया है। इसमें पत्रिका की मुहीम रंग लाई है। इस गांव के नाले पर बड़ा पुल का निर्माण होने वाला है।

बच्चों से लेकर बड़ों को भी कमर तक पानी में उतरकर नाला पार करने की मजबूरी

यह मामला जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पीपरखार का आश्रित ग्राम दूटामारदी का, जहां टापू जैसी स्थिति है। उस गांव तक पहुंचना टेढ़ी खीर मानी जाती है। जहां गांव के बच्चों से लेकर बड़ों को भी कमर तक पानी में उतरकर नाला पार करने की मजबूरी है। लोग अपनी रोजी-रोटी से लेकर हर काम के लिए इसी मार्ग से जाने को मजबूर हैं, पर अब जल्द ही इस गांव के नाले में बड़ा पुल का निर्माण होने वाला है।

आरईएस विभाग खनिल न्यास से करवाएगा निर्माण
जानकारी अनुसार यहां पुल का निर्माण आरईएस विभाग द्वारा कराया जाएगा। आरईएस विभाग की मानें तो आने वाले 15 दिनों के भीतर पुल निर्माण के लिए नींव की खुदाई शुरू हो जाएगी, क्योंकि जिला प्रशासन ने खनिज न्यास निधि के जरिए 50 लाख की लागत से यह पुल का निर्माण करवा रहा है।

इस तस्वीर ने पूरे प्रदेश को झकझोरा था...
यहां की मजबूरी ये है कि स्कूली बच्चों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने स्कूल जाना पड़ता है। बता दें कि पूर्व कलक्टर ने यहां की परेशानी को देखते हुए पुल बनाने के लिए स्वीकृति दी थी। इस गांव का विकास और बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई में आ रही दिक्कत का सिर्फ एक ही कारण है गांव को मुख्य मार्ग से जोडने वाला खरखरा नाले पर सालों से पुल नहीं होना है। गांव व नई पीढ़ी के विकास में ये ही बड़ी बाधा है जिससे इस गांव के लोगों को परेशानी होती है, पर अब यह समस्या भी जल्द दूर हो जाएगी।
नहीं पहुंच पाती संजीवनी भी

इस गांव में पुल नहीं होने के कारण संजीवनी भी नहीं पहुंच पाती। समय पर इलाज नहीं हो पाने के कारण कुछ सालों में 5 लोगों की मौत भी हो चुकी है। बीते साल गांव की स्थिति देखने गए पूर्व कलक्टर राजेश सिंह राणा ने गंभीर समस्या को देखते हुए पुल के लिए 50 लाख रुपए की स्वीकृति दी थी, पर अब स्वीकृति के डेढ़ साल बाद पुल निर्माण का काम शुरू होगा।

साल के 8 माह तक नदी में रहता है पानी
प्राथमिक तक पढ़ाई के बाद माध्यमिक व हाई तथा हाइयर सेकंडरी में पढ़ाई के लिए बच्चों को नाला पार करने की मजबूरी हो जाती है। बच्चे नदी पार कर कोडेकसा स्कूल जाते हैं। जब लगातार बारिश होती है तो गांव टापू बन जाता है। बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो जाता है। बता दें कि यहां साल के 4 माह को छोड़ दें तो 8 माह तक नदी में पानी रहता है।

इलाज के अभाव में चली गई 5 की जान
ग्रामीण जैत लाल ने बताया नदी के कारण उनके जन्म से लेकर अभी तक वे इलाज के अभाव में 5 लोगों की मौत देख चुके हैं। उससे पहले का कोई पता नहीं कि पहले कितने लोगों की मौत हो चुकी होगी। यह गांव जाने के लिए खरखरा नाला पार करना जरूरी है क्योंकि इस नाले में पुल ही नहीं है। किसी की तबीयत बिगड़ी तो इलाज के लिए तीन किमी दूर ग्राम पंचायत पीपरखार लाना पड़ता है। राशन व अन्य घरेलु सामान के लिए भी नदी पार कर ही डौंडीलोहारा या फिर अन्य गांव जाना पड़ता है। पर अब राह आसान हो जाएगा।पुल निर्माण के लिए अब इस नाले में साफ-सफाई शुरू हो गई, दो सप्ताह बाद पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा।

आरईएस विभाग के ईई संतोष ठाकुर ने बताया कि पुल निर्माण का कार्य दो सप्ताह में शुरू हो जाएगा। नाले की साफ-सफाई की जा रही है। अप्रैल, मार्च तक पुल निर्माण का कार्य पूर्ण हो जाएगा।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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