केंद्र सरकार आयात को कम करने के पक्ष में, घरेलू इस्पात का उपयोग करने दी सलाह

आत्मनिर्भर भारत पीएम की मंशा.

By: Abdul Salam

Published: 17 Jun 2020, 06:56 PM IST

भिलाई. केंद्र सरकार ने नई राष्ट्रीय इस्पात नीति को ध्यान में रखते हुए आयात में कमी लाने की बात कह रही है। वहीं घरेलू इस्पात के उपयोग को बढ़ाने और तेल और गैस क्षेत्र की इस्पात आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात निर्भरता को कम करने पर जोर दिया है। केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि स्टील और ऑयल एंड गैस सेक्टर में घनिष्ठ संबंध हैं और इसे एक नए मुकाम पर ले जाने का समय आ गया है। इसका लाभ सेल के तमाम इकाईयों को भी होगा।

आत्मनिर्भर भारत पीएम की मंशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी मंशा है कि आत्मनिर्भर भारत एक मजबूत निर्माण क्षेत्र के साथ एक मजबूत भारत है। निर्माण, तेल और गैस, ऑटोमोबाइल, मशीनरी जैसे अन्य क्षेत्रों के साथ मजबूत संबंध होने के कारण, भारतीय इस्पात क्षेत्र को भारत के स्वंयभू भारत बनने के सपने को साकार करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है।

स्थानीय स्टील उद्योग से खरीदें सामान
केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा है कि तेल और गैस क्षेत्र पर पिछले 6 साल में निवेश-समर्थक नीतियों के पीछे बदलाव देखा जा रहा है। इसमें खासा विकास हो रहा है, रिफाइनरियों, पाइपलाइनों, गैस टर्मिनलों, भंडारण क्षमता, गैस सिलेंडरों, खुदरा दुकानों में हो, और इन सभी के लिए बड़ी मात्रा में स्टील की जरूरत होती है। तेल और गैस क्षेत्र स्टील पाइप और ट्यूब के सबसे बड़े उपयोगकर्ता हैं। आने वाले समय में 10,000 सीएनजी स्टेशनों को स्थापित करने की योजना हैं। आने वाले समय में स्टील की मांग को बढ़ाएंगी।

स्टील का आयात न करें
स्टील मिनिस्टर ने साफ कहा है कि इन सारे कामों के लिए स्टील का आयात दूसरे देशों से न किया जाए। देश के ही स्टील का उपयोग करें। इससे देश के शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राष्ट्रीय इस्पात नीति में भी यह बात
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय उद्योग नीति में भी इस बात को प्रमुखता से रखा है। जिसमें आयात को घटाने व निर्यात को बढ़ाने का फैसला किया गया है। भिलाई इस्पात संयंत्र उत्पादन के दौरान कोक, आयरन ओर समेत अन्य सामग्री विदेशों से आयात करता है। अब इस पर कंट्रोल करना होगा। राष्ट्रीय इस्पात नीति में इस्पात क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रूपए का निवेश करने के साथ ही कच्चे माल के आयात पर निर्भरता खत्म कर इसे और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

पचास फीसदी घटाना है कोक का आयात
कमजोर मांग और महंगे होते कच्चे माल के कारण मंदी के दौर से गुजर रहे देश के इस्पात क्षेत्र में नई जान फूंकने के नजरिए से सरकार की ओर से लिया गए फैसला अहम माने जा रहे हैं। नई नीति के जरिए 2030-31 तक कोकिंग कोल का आयात 50 फीसदी घटाकर घरेलू स्तर पर इसकी आपूर्ति बढ़ाकर 30 करोड़ टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रति व्यक्ति इस्पात का खपत 158 किलोग्राम
इसके साथ ही साल 2030-31 तक देश में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत बढ़ाकर औसतन 158 किलोग्राम करने का लक्ष्य भी रखा गया है। इसमें गुणवत्ता सुधार के लिए भी मानक तय किए गए हैं।

लाइम स्टोन किया जाता है आयात
भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान लाइम स्टोन के आयात में कटौती की, इससे संयंत्र प्रबंधन 15.३६ करोड़ रुपए बचाने में सफल रहा है। यह प्रबंधन के हाथ में आई एक बड़ी उपलब्धी रही है। प्रबंधन लाइम स्टोन की आयात में और कटौती करना चाहता है, लेकिन अधिकारी तर्क देते हैं, कि बीएसपी प्रबंधन क्वालिटी से कहीं भी समझौता नहीं करता है। नंदिनी माइंस के लाइम स्टोन में पहले वाली बात नहीं है, अब जो लाइम स्टोन आ रहे हैं, उसमें सिलिका की मात्रा 7 फीसदी से अधिक है। वहीं आयात किए जाने वाले लाइम स्टोन में सिलिका 1 से 4 फीसदी के आसपास होता है।

कोकिंग कोल का आयात
कोकिंग कोल की खदान भारत में भी है, लेकिन यहां के कोयले में राख अधिक होने की वजह से इसका अधिक उपयोग करने से बड़े स्टील प्लांट कतराते हैं। पूर्व में भिलाई इस्पात संयंत्र में विदेश से आयात किए जाने वाले कोयले को 80 फीसदी और भारत के कोयले को 20 फीसदी मिश्रित कर उपयोग किया जाता था। अब बीएसपी 70 फीसदी विदेश कोयला और 30 फीसदी भारत का कोयला उपयोग किया जा रहा है। इसमें अब कटौती करने की तैयारी है।

Show More
Abdul Salam
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned