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फरवरी में इस तारीख से शुरु हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानिए क्यों कहा जाता है इसे तंत्र-मंत्र, साधना का महापर्व

Gupta Navratri 2022: ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार गुप्त नवरात्रि में रवि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। जिससे मां दुर्गा की पूजा-उपासना का कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा।

भिलाई

Updated: January 29, 2022 12:59:59 pm

भिलाई. नए साल में पहली गुप्त नवरात्रि फरवरी माह में शुरु होने वाली है। देवी अराधना करने वालों के लिए यह गुप्त नवरात्रि बहुत शुभफलकारी होती है। गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 2 फरवरी बुधवार से हो रहा है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूप मां शैल पुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इसके साथ ही गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या देवियां तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुनेश्वरी, छिन्नमस्ता, काली, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी की भी गुप्त तरीके से पूजा-उपासना की जाती है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस बार गुप्त नवरात्रि में रवि योग व सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। जिससे मां दुर्गा की पूजा-उपासना का कई गुना अधिक फल प्राप्त होगा।
फरवरी में इस तारीख से शुरु हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानिए क्यों कहा जाता है इसे तंत्र-मंत्र, साधना का महापर्व
फरवरी में इस तारीख से शुरु हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानिए क्यों कहा जाता है इसे तंत्र-मंत्र, साधना का महापर्व
तंत्र-मंत्र, साधना का है महापर्व
गुप्त नवरात्रि साधना की नवरात्रि मानी जाती है उत्सव की नहीं। इसलिए इसे खास तरह की पूजा और साधना का विशेष पर्व माना जाता है। यह नवरात्रि विशेष कामना हेतु तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए संपन्न की जाती है। गुप्त नवरात्रि मे विशेष पूजा से कई प्रकार के दु:खों से मुक्ति मिलती है।
माघ गुप्त नवरात्रि
घट स्थापना मुहूर्त -2 फरवरी 2022 दिन बुधवार
घट स्थापना शुभ मुहूर्त- सुबह 7 बजकर 10 मिनट से सुबह 8 बजकर 2 मिनट तक

गुप्त नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की गुप्त तरीके से पूजा करने का विधान है। गुप्त नवरात्रि में विशेष तरह की इच्छापूर्ति और सिद्धि प्राप्त करने के लिए पूजा और अनुष्ठान किया जाता है। गुप्त नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्त करने का विषेश महत्व माना गया है। गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक, साधक या अघोरी तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्त करने के लिए मां दुर्गा की साधना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में हर कोई मां दुर्गा की पूजा अराधना कर सकता है। मां की पूजा करने से आपके जीवन के सभी संकटों का नाश होता है।
गुप्त नवरात्र और तंत्र साधना
गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं के पूजन को प्रमुखता दी जाती है। भागवत के अनुसार महाकाली के उग्र और सौम्य दो रुपों में अनेक रुप धारण करने वाली दस महा-विद्याएं हुई हैं। भगवान शिव की यह महाविद्याएं सिद्धियां प्रदान करने वाली होती हैं। दस महाविद्या देवी दुर्गा के दस रूप कहे जाते हैं। प्रत्येक महाविद्या अद्वितीय रुप लिए हुए प्राणियों के समस्त संकटों का हरण करने वाली होती हैं। इन दस महाविद्याओं को तंत्र साधना में बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण माना जाता है।
देवी काली- दस महाविद्याओं मे से एक मानी जाती हैं। तंत्र साधना में तांत्रिक देवी काली के रूप की उपासना किया करते हैं।

देवी तारा- दस महाविद्याओं में से मां तारा की उपासना तंत्र साधकों के लिए सर्व सिद्धिकारक मानी जाती है। मां तारा परारूपा हैं एवं महासुन्दरी कला-स्वरूपा हैं तथा देवी तारा सबकी मुक्ति का विधान रचती हैं।
मां ललिता- मां ललिता की पूजा से समृद्धि की प्राप्त होती है। दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है।

मां भुवनेश्वरी - माता भुवनेश्वरी सृष्टि के ऐश्वर्य की स्वामिनी हैं। भुवनेश्वरी माता सर्वोच्च सत्ता की प्रतीक हैं। इनके मंत्र को समस्त देवी देवताओं की आराधना में विशेष शक्ति दायक माना जाता है।
त्रिपुर भैरवी - मां त्रिपुर भैरवी तमोगुण एवं रजोगुण से परिपूर्ण हैं।

माता छिन्नमस्तिका -मां छिन्नमस्तिका को मां चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है। मां भक्तों के सभी कष्टों को मुक्त कर देने वाली है।
मां धूमावती - मां धूमावती के दर्शन पूजन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। मां धूमावती जी का रूप अत्यंत भयंकर हैं। इन्होंने ऐसा रूप शत्रुओं के संहार के लिए ही धारण किया है।
मां बगलामुखी - मां बगलामुखी स्तंभन की अधिष्ठात्री हैं। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है।

देवी मातंगी - यह वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी कही जाती हैं। इनमें संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश हैं। भगवती मातंगी अपने भक्तों को अभय का फल प्रदान करती हैं।
माता कमला - मां कमला सुख संपदा की प्रतीक हैं। धन संपदा की आधिष्ठात्री देवी है, भौतिक सुख की इच्छा रखने वालों के लिए इनकी अराधना सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं।

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