Breaking news कोरोना की ड्यूटी करते जिन स्वास्थ्य कर्मियों की गई जान, उनके आश्रितों को अब मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

शासन ने किया रास्ता साफ.

By: Abdul Salam

Published: 23 May 2021, 11:53 PM IST

भिलाई. जिला में 6 स्वास्थ्य कर्मियों की जान कोरोना महामारी के दौरान जा चुकी है। इनके आश्रितों के अनुकंपा नियुक्ति के मामले में बार-बार सारे नियमों को शिथिल करने की मांग उठ रही थी। अब छत्तीसगढ़ सरकार ने पीडि़तों के अनुकंपा नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। जिससे इन सभी परिवार के एक-एक सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इसमें से कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके घर छोटे-छोटे बच्चे हैं और घर के मुखिया की कोरोना काल में ड्यूटी करते-करते संक्रमित होकर मौत हो गई। पीडि़तों को बिना अधिक चक्कर कटवाए अगर अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है तब उनको कुछ राहत मिलेगी।

एक साल से लगा रहे थे चक्कर अब मिली राहत भरी खबर
कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी मजदूरों के नमूना लेने का काम पाटन क्षेत्र में रहने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्राम झीट के दयाराम साहू (३२ साल) को दिए थे। ड्यूटी कर वे 16 मई 2020 को घर लौटे। दरमियानी रात में पत्नी से कहा सांस लेने में तकलीफ हो रही है और अलसुबह करीब 3 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। पत्नी अनामिका साहू ने बताया कि एक साल से वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन देने के बाद चक्कर काट रही है। उनका बेटा अभी सिर्फ 6 साल का ही है और उसके सिर से पिता का साया उठ गया। घर के मुखिया के चले जाने से सब कुछ खत्म हो गया है। अब आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर रास्ता साफ हो जाने की खबर से कुछ उम्मीद जागी है।

नगपुरा के ड्रेसर की भी कोरोना से गई जान
कोविड-19 महामारी के दौरान नगपुरा में ड्यूटी कर रहे ड्रेसर विजय कुमार यादव की 25 अगस्त 2020 को कोविड-19 से मौत हो गई। इनके भी आश्रितों को भी अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की मांग की जा रही है। इस मामले में संगठन का तर्क है कि जिस वक्त लोग अपने परिवार के सदस्यों से हाथ नहीं मिला रहे थे, तब रिस्क लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने काम किया। ऐसे में किसी स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत हुई है तो उनको जरूर अनुकंपा नियुक्ति बिना विलंब किए दिया जाना चाहिए। शासन ने एक साल बाद सही पर इस दिशा में पहल किया है।

भरत की भी हुई मौत
कोविड-19 महामारी के दौरान जिला अस्पताल में कार्यरत वार्ड ब्वाय भरत धेवरिया की भी मौत हुई। जिससे परिवार परेशान है। यूनियन से हर परिवार लिखित में मांग कर रहा था कि विपरीत समय में कोरोना मरीजों की सेवा करते जिनकी जान गई है कम से कम उनके परिवार को हक तो दिलाया जाए। इसी तरह से जिला अस्पताल में कार्यरत दुलाई बाई की भी मौत हुई थी। उनके परिवार के एक सदस्य को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जानी है। अब इन परिवारों को भी कम से कम आर्थिक तंगी से निजात मिलेगी।

बिना इलाज के चल बसे
उप स्वास्थ्य केंद्र, जंजगिरी के स्वास्थ्य कार्यकर्ता जी शंकर राव का तो बिना इलाज के ही मौत हो गया। उन्होंने इसको लेकर गुहार लगाना वीडियो भी सोशल मीडिया में डाला। जिसके बाद जांच की बात भी कही गई। अब कम से कम उनके परिवार को अगर अनुकंपा नियुक्ति मिल जाती है तो राहत मिलेगी।

विशेष प्रकरण का दिया जाए दर्जा
यूनियन ने लिखित में राज्य सरकार से मांग किया है कि कोविड-19 महामारी में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले कर्मियों के इन 6 मामलों को विशेष प्रकरण का दर्जा दिया जाए। छत्तीसगढ़ में संबंधित विभाग में रिक्त पद खाली होने पर अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान है। अगर पद रिक्त नहीं है तब दूसरे विभाग में जहां पद खाली है वहां अनुकंपा नियुक्ति दिया जाए। अब शासन ने आदेश जारी कर आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने संबंधित नियमों में शिथिलता बरती है।

बिना चक्कर कटवाए परिवारों को दिया जाए अनुकंपा नियुक्ति
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सैयद असल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस मांग को सबसे पहले उठाया था, जिसके बाद कर्मियों के पक्ष में यह अहम फैसला आया है। छत्तीसगढ़ शासन के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों पर दस फीसदी के शिथिलीकरण का आदेश दिया, इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार। सरकार की मंशा तब पूरी होगी जब बिना चक्कर कटवाए पीडि़त परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति दिया जाए।

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