कोरोना वायरस पर भारी भूख, लॉक डाउन में सड़कों की सफाई

पीएम से मांगा ईएमआई में तीन माह की छूट.

भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर जाने वाले सभी प्रमुख रास्ते की सफाई का काम मजदूर करते हैं। इसमें महिला और पुरुष दोनों ही शामिल हैं। देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए २१ दिनों तक लॉक डाउन की बात कही। इन मजदूरों ने भी पीएम को सुना। लेकिन वे सुबह हर दिन की तरह झाड़ू पकड़कर सफाई का काम करने निकल पड़े। हर दिन अगर वे काम नहीं करेंगे, तो घर का चुल्हा कैसे जलेगा। यह चिंता उनके चेहरे में साफ देखी जा सकती है।

मजदूरों के बैंक खाता में कोई वेतन डालने वाला नहीं

मजदूरों के बैंक खाता में कोई वेतन डालने वाला नहीं है। ऐसे में वे कोरोना से ज्यादा पेट के भूख से डरकर काम पर निकले हैं। दिल्ली सरकार ने मजदूरों के खातों में 5-5 हजार रुपए डालने की बात कही है।

बंद कार में मास्क, खुले सड़क पर झाड़ू
जब पूरा देश बिना काम के बाहर निकलने से गुरेज कर रहा है। कार में सफर करने वाले भी मास्क लगाकर चल रहे हैं। तब यह मजदूर सड़क की सफाई सुबह से शाम तक कर रहे हैं। दोपहर में खाना खाने के बाद कुछ देर वे सुस्ता लेते हैं। इसके बाद फिर काम में जुट जाता हैं।

बिना काम के नहीं मिलेगा रोजी
मजदूरों को बिना काम के रोजी मिलना आसान नहीं है। ठेकेदार मजदूरों को सुरक्षा के सारे उपकरण नहीं देता। अगर वे एक दिन काम में नहीं आएगें, तो ठेकेदार उसका पैसा नहीं देगा।

मजदूरों के साथ नहीं होता है इंसाफ
बीएसपी प्रबंधन जब भी मजदूरों के नाम से कोई रकम देता है, तो वह ठेकेदार के हाथ में दिया जाता है। ठेकेदार वह राशि मजदूरों को नहीं देता। प्रबंधन अगर सीधे रकम मजदूरों के खाता में देना शुरू करे, तो बेहतर होगा। लॉक डाउन में मजदूरों के नाम से कोई भी रकम प्रबंधन या शासन की ओर से दी जाएगी, तो वह ठेकेदार हजम कर लेगा।

पीएम से मांगा ईएमआई में तीन माह की छूट

इधर समाजिक संगठन के पदाधिकारी कोला राजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है कि ईएमआई की छूट कम से कम दो माह की हर व्यक्ति को मिलती चाहिए. घर में बंद लोगों से बैंक प्रबंधन अगर ईएमआई की रकम मांगता है, तो वे कहां से लाकर देंगे. कोरोना वायरस की वजह से प्रायवेट कर्मचारियों के सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है।

Abdul Salam Reporting
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