scriptHon'ble don't do politics, we just want cheap electricity | माननीयों पॉलिटिक्स मत कीजिए, हमें तो बस सस्ती बिजली चाहिए | Patrika News

माननीयों पॉलिटिक्स मत कीजिए, हमें तो बस सस्ती बिजली चाहिए

टाउनशिप के 34356 उपभोक्ता चाहते हैं कि छग सरकार की बिजली बिल हाफ योजना का लाभ उन्हें भी मिले। सस्ती बिजली चाहे भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन दे या फिर छग सरकार अपनी बिजली कंपनी के माध्यम से, एजेंसी कौन होगी, उनको इससे मतलब नहीं है। लोगोंं का कहना है कि अगर पूरे छत्तीसगढ़ में बिजली बिल आधा हो रहा है, तो उनको भी रियायत मिलनी चाहिए

भिलाई

Updated: May 20, 2022 08:25:08 pm

Bhilai News भिलाई. टाउनशिप के 34356 उपभोक्ता चाहते हैं कि छग सरकार की बिजली बिल हाफ योजना का लाभ उन्हें भी मिले। सस्ती बिजली चाहे भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन दे या फिर छग सरकार अपनी बिजली कंपनी के माध्यम से, एजेंसी कौन होगी, उनको इससे मतलब नहीं है। लोगोंं का कहना है कि अगर पूरे छत्तीसगढ़ में बिजली बिल आधा हो रहा है, तो उनको भी रियायत मिलनी चाहिए।
टाउनशिप में बिजली बिल हाफ को लेकर इन दिनों राजनीति हो रही है। सत्ता पक्ष का कहना है कि अगर संयंत्र प्रबंधन अपनी समूची बिजली आपूर्ति व्यवस्था छग राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) को सौंप दे, तो राज्य के शेष उपभोक्ताओं की तरह ही टाउनशिपवासियों को भी बिल में रियायत मिल जाएगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री सर्वसक्षम है। उन्हें भिलाई टाउनशिप की जनता को बिजली बिल में छूट देने का पूरा अधिकार है जो व्यक्ति राज्य की बाकी जनता का बिजली बिल आधा कर सकता है, उन्हें टाउनशिप की जनता का बिल आधा करने में क्या दिक्कत हो सकती है? पत्रिका ने पांच सवालों के जरिए टाउनशिप की जनता के मन को टटोलने की कोशिश की। सभी चाहते हैं कि इस्पात नगरी की जनता से भेदभाव न हो। पॉलिटिक्स नहीं, नेता साझा प्रयास करे।
माननीयों पॉलिटिक्स मत कीजिए, हमें तो बस सस्ती बिजली चाहिए
माननीयों पॉलिटिक्स मत कीजिए, हमें तो बस सस्ती बिजली चाहिए
80 फीसदी लोगों का मानना है कि-
सचमुच बिजली बिल को लेकर राजनीति हो रही है। ईमानदारी से राजनीतिक कोशिश नहीं की जा रही है। पक्ष- विपक्ष दोनों अपनी राजनीति कर रहे हैं।

50 फीसदी लोगों की राय है कि-
सत्ता पक्ष ने निगम चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए अपने घोषणा पत्र में इसे शामिल किया। टाउनशिप की जनता का भला चाहते तो निगम चुनाव से पहले योजना लागू हो जाती।
30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि -
विपक्ष अब अपने सियासी लाभ के लिए अब इस मुद्दे को तूल दे रहा है। नीयत ठीक है तो अपने केंद्र की सरकार से फाइल आगे बढ़वाए। हस्तांतरण की फाइल इस्पात मंत्रालय में अटकी है।
85 फीसदी का अभिमत है कि-
आगामी विधानसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा होगा। अगर जनता को बिल में रियायत मिल गई तो कांग्रेस इसे भुनाएगी। नहीं तो भाजपा को एक बड़ा सियासी मुद्दा हाथ लग ही जाएगा।
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60 फीसदी लोगों को सरकार की नीयत पर संदेह..
कहा कि अभी तक ईमानदारी से राजनीतिक कोशिश नहीं की गई, नहीं तो नतीजा सामने होता। मुख्यमंत्री सर्वसक्षम है। वे चाहे तो जैसे राज्य के बाकी उपभोक्ताओं का पैसा सीधे कंपनी के खाते में जमा की जा रही है, टाउनशिप के मामले में भी ऐसा ही किया जा सकता है।
40 प्रतिशत लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार अड़ंगा डाल रही है...
कहा कि टाउनशिप की बिजली आपूर्ति व्यवस्था सीएसपीडीसीएल को हस्तांतरित करने संबंधी फाइल दो साल से सेल मुख्यालय व इस्पात मंत्रालय में अटकी है। केंद्र की भाजपा सरकार नहीं चाहती कि राज्य की केंद्र सरकार को इसका श्रेय मिले।
पांच सवाल और जनता की राय
1. टाउनशिप की बिजली आपूर्ति बीएसपी के हाथ में रहनी चाहिए कि सीएसपीडीसीएल?
45 फीसदी- बीएसपी के नगर विद्यतु यांत्रिकी विभाग।
25 फीसदी-सीएसपीडीसीएल क्योंकि बिल में तभी छूट मिलेगी।
30 फीसदी- किसी के हाथ में रहे हमें तो बिल में रियायत से मतलब है।
2. टाउनशिप में बिजली बिल को लेकर क्या राजनीति हो रही है?
60 फीसदी- सिर्फ राजनीति हो रही है, कोशिश नहीं।
30 फीसदी- ईमानदारी से प्रयास जारी है, नतीजे आएंगे।
10 फीसदी- कुछ समझ नहीं आ रहा है।
3. बिजली बिल क्या चुनावी लाभ के लिए नेताओं को मुद्दा मिल गया है?

50 फीसदी-और नहीं तो क्या, निगम चुनाव में घोषणा पत्र में इसीलिए शामिल किया।
30 प्रतिशत- हां, विपक्ष भी सियासी लाभ के लिए ही तो अब इस मुद्दे को तूल दे रहा है।
20 प्रतिशत- ऐसा नहीं है, कोशिश हो रही है हस्तांतरण की तकनीकी अड़चन है।
4. क्या छग सरकार जैसे ाकी उपभोक्ताओं को लाभ दे रही है, वैसे ही टाउनशिप की जनता को भी दे सकती है?
80 प्रतिशत- सरकार चाहे तो सब कुछ कर सकती है। ऐसा नहीं है तो टाउनशिप में निगम अरबों रुपए क्यों फंूक रहा है?
10 प्रतिशत- हस्तांतरण की तकनीकी अड़चन को सुलझाए बगैर सरकार कुछ नहीं कर सकती।
10 प्रतिशत-- दोनों सरकार टाउनशिप की जनता के बारे में नहीं सोच रही है।
5. टाउनशिप की बिजली सीएसपीडीसीएल को सौंपने से क्या फर्क पड़ेगा?
50 प्रतिशत-- टाउनशिप में सीएसपीडीसीएल के एंट्री से पॉवर कट शुरू हो जाएगा।
30 प्रतिशत- बिजली सस्ती होगी, प्रॉपर मेंटनेंस होगा।
20 प्रतिशत-- बीएसपी कर्मियों की सब्सिडी बंद हो जाएगी। एक समय बाद बिजली महंगी पड़ेगी
बिजली के उलझे तार को ऐसे समझें
पेच यहां फंस गया है- हस्तांतरण नहीं हो पा रहा
टाउनशिप की बिजली सप्लाई अपने हाथों में लेने छग सीएसपीडीसीएल ने बीएसपी प्रबंधन सब स्टेशनों के लिए जमीन और 116 करोड़ रुपए की मांग की है।
फाइल सेल मुख्यालय व इस्पात मंत्रालय में दो साल से विचाराधीन है। पिछले दिनों आए इस्पात सचिव से स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस संबंध में चर्चा की।
एक तर्क यह भी- जरूरत ही नहीं, सीधे लाभ दें
विपक्ष के मुताबिक आदेश में स्पष्ट है कि राज्य के सभी घरेलु उपभोक्ताओं को 1 मार्च 2019 से प्रति माह खपत की गई 400 यूनिट तक की बिजली पर प्रभावशील विद्युत् दरों के आधार पर आकलित बिल की राशि को आधा किया जाएगा। राज्य शासन का उक्त आदेश भिलाई टाउनशिप में रह रहे घरेलु विद्युत् उपभोक्ताओं पर भी लागू होता है। ऐसे में हस्तांतरण की जरूरत ही नहीं है।

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