बिना पार्किंग के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कैसे मिल गया लाइसेंस

विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल.

By: Abdul Salam

Updated: 13 Sep 2021, 09:58 PM IST

भिलाई. निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को लाइसेंस देते वक्त तमाम नियम शर्तों को पूरा किया जाना है। अस्पताल या नर्सिंग होम शुरू करने से पहले विभाग की टीम को मौके पर पार्किंग दिखाना होता है। आखिर वे अस्पताल जो संचालित हो रहे हैं, लेकिन उनके पास पार्किंग व्यवस्था नहीं है। उनको स्वस्थ विभाग ने किस तरह से लाइसेंस जारी कर दिया। अब अस्पतालों के सामने वाहनों को खड़ा किया जा रहा है, जिससे सड़क जाम हो रही है। आम जनता इससे खासी परेशान है।

मित्तल हॉस्पिटल के सामने वाहनों का जमावड़ा
नेहरू नगर में मित्तल हॉस्पिटल के सामने वाहनों का जमावड़ा हर वक्त देखने को मिल रहा है। इससे यहां यातायात व्यवस्था बाधित हो रही है। अस्पताल शुरू करने से पहले नियम के मुताबिक पार्किंग व्यवस्था किया जाना है। यहां पार्किंग व्यवस्था नहीं होने की वजह से लोग सड़क पर ही वाहन खड़ी कर अस्पताल के भीतर जा रहे हैं। वे जब तक नहीं लौटते सड़क में वाहन कतार में खड़ी रहती है। दूसरे अस्पतालों को लाइसेंस जारी करने से पहले विभाग ने उनके पार्किंग का जाकर जायजा लिया। तब ऐसा ही तमाम निजी अस्पतालों के साथ क्यों नहीं हुआ।

बिना पार्किंग के नहीं जारी करते लाइसेंस
बिना पार्किंग की सुविधा देखे स्वस्थ विभाग लाइसेंस जारी नहीं करता। लाइसेंस जारी करने से पहले चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के निर्देश पर एक टीम मौके का जायजा लेती है। पार्किंग समेत तमाम व्यवस्था देखने के बाद ही लाइसेंस जारी की जाती है। दुर्ग जिला में स्वस्थ विभाग ने लाइसेंस जारी करते वक्त इन नियमों व शर्तों की अनदेखी की है या और कोई वजह से लाइसेंस जारी कर दिया। अब यह सवाल उठ रहे हैं।

पर्यावरण का एनओसी देखा
स्वस्थ विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण विभाग से मिलने वाले एनओसी को तो जांच लिया, लेकिन अस्पताल और नर्सिंग होम में पार्किंग व्यवस्था को नजर अंदाज किया। अगर पार्किंग की व्यवस्था न हो तो लाइसेंस देने से पहले व्यवस्था करने निर्देश देना है। व्यवस्था होने के बाद लाइसेंस जारी करना था। हॉस्पिटल के सामने सड़कों पर वाहनों को खड़ा किया जा रहा है। स्वस्थ विभाग की अनदेखी के कारण नेहरू नगर में यातायात व्यवस्था चरमरा रही है। इस मामले में मित्तल अस्पताल की डॉक्टर रुचि वर्मा से पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

यहां उठ रहे सवाल
- विभाग की कार्य शैली पर यहां सवाल उठना लाजमी है। इस निजी अस्पताल में पार्किंग नहीं होने के बाद भी कैसे लाइसेंस जारी हुआ।
- विभाग के किस अधिकारी के हस्ताक्षर से लाइसेंस जारी किए।
- लाइसेंस जारी करने से पहले किसके नेतृत्व में अस्पताल का जायजा लेने टीम पहुंची थी। टीम में कौन-कौन सदस्य थे।
- पार्किंग व्यवस्था नहीं है यह जानते हुए भी लाइसेंस जारी करने वाले जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

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