बारिश का पानी धरती में नहीं सहेजा तो लगेगा जुर्माना

बारिश का पानी धरती में नहीं सहेजा तो लगेगा जुर्माना

Tara Chand Sinha | Updated: 11 Jul 2019, 12:10:09 PM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

0. निगम के नोटिस की अवहेलना करने वालों को इसी साल से देनी होगी पेनाल्टी

0. राजस्व विभाग संपत्तिकर के साथ वसूलेगा वर्षा जल संचय शुल्क

0. जुर्माना तब तक देना पड़ेगा जब तक कि वाटर घर में बारिश के पानी को सहजने का उपाय नहीं कर लेते।

 

 

भिलाई.घर में बारिश के पानी को सहजने का उपाय नहीं करना अब मकान मालिकों को भारी पड़ेगा। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने पर जुर्माना भरना पड़ेगा। जुर्माना हर साल तब तक देना पड़ेगा जब तक कि वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बना लेते। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के बाद उसे निगम प्रशासन से सत्यापित भी कराना पड़ेगा। शासन ने गिरते हुए जलस्तर और जलसंकट की समस्या से निपटने एक हजार वर्गफीट के मकानों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। निकायों को आदेश का सख्ती से पालन करने कहा है। साथ ही चेतावनी देने के बावजूद अब तक घर, कॉलोनी, व्यावासयिक कॉम्प्लेक्स में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया है, उनसे से संपत्त्तिकर के साथ जल संचय शुल्क वसूल करने निर्देश दिए हैं।

प्रति वर्गफीट एक रुपए पेनाल्टी

प्रति वगफीट एक रुपए से पेनाल्टी तय की गई है। यह पेनाल्टी एक हजार वर्गफीट वाले ऐसे भूखंडधारी जिन्होंने अब तक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया है, उन्हें एक हजार रुपए जुर्माना भरना पड़ेगा। पहले 1350 वर्गफीट के भूखंड पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य था। जिसे शासन ने घटाकर एक हजार वर्गफीट कर दिया है। अब हजार वर्गफीट के भूखंड पर मकान बनाने की अनुमति लेने पर 15 हजार रुपए अमानत राशि जमा करनी पड़ेगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनवाना पड़ेगा।

1735 पुराना आवास चिन्हित
निगम प्रशासन ने बस्ती का सर्वे कर एक हजार वर्गफीट से अधिक वाले 1735 मकानों को चिन्हित किया था। उन्हें नोटिस भेजकर बारिश के पानी को सहेजने के उपाय करने कहा गया था। बावजूद मकान मालिकों ने निगम प्रशासन के नोटिस का जवाब नहीं दिया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी नहंीं बनाया।

3000 लोगों का 45 करोड़ निगम के कोष में

शहर में 3 हजार का लोगों का 45 करोड़ रुपए निगम को कोष में जमा है। निगम ने यह राशि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की एवज में जमा कराया है, लेकिन न तो लोगों ने सिस्टम बनाया और निगम प्रशासन भी पैसे जमाकर चुप बैठ गया। जब शासन ने सख्ती बरती, भवन पूर्णता प्रमाण पत्र पर रोक लगाया तब प्राइवेट एजेंसी और महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना शुरू किया। तब कहीं जाकर जून 2019 में आंकड़े आधी हुई। 2013-14 की स्थिति में भवन अनुज्ञा विभाग के कोष में 7 हजार लोगों का 45 करोड़ रुपए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के एफडीआर के रूप में बैंकों में जमा था, जो 31 जून की रिपोर्ट में घटकर आधी हुई है। अभी भी 3 हजार लोगों ने अपने मकान में बारिश के पानी को सहेजने का उपाय नहीं किया है। अब उन्हें संपत्त्तिकर के साथ वाटर हार्वेस्टिंग का जुर्माना भरना पड़ेगा।

वर्गफीट के हिसाब जुर्माना
राजस्व अधिकारी अशोक द्विवेदी का कहना है कि एक हजार वर्गफीट वाले भूखंड मालिक, जिन्होंने जल संचय का उपाय नहंीं किया है, शासन ने उनसे जुर्माना वसूलने के निर्देश दिए हैं। शासन के निर्देश के मुताबिक एक रुपए प्रति वर्गफीट के हिसाब जुर्माना की गणना की जा रही है।

निजी एजेंसी की मदद से

भवन अनुज्ञा अधिकारी सुनील जैन का कहना है कि 3 हजार मकान मालिकों ने अब तक रेन वाटर हार्वेस्टिंग बनवाने का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे मकानों में निजी एजेंसी की मदद से हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवा रहे हैं। उम्मीद है कि अगस्त तक लक्ष्य को पूरा कर लेंगे।

 

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