छत्तीसगढ़ गोबर इकोनॉमिक्स: डेढ़ रुपए में खरीदी तो पशुपालकों को सालाना मिलेंगे 30 अरब रुपए, कैसे यहां पढि़ए खास रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना इसी महीने हरेली के दिन से शुरू हो जाएगी। जिस गोबर को बिना काम का बताकर छोड़ दिया जाता है, उससे किसानों के घर समृद्धि आएगी। (Godhan nyay yojna in chhattisgarh)

By: Dakshi Sahu

Updated: 07 Jul 2020, 05:26 PM IST

पुनीत कौशिक/भूवन साहू@ भिलाई. छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना इसी महीने हरेली के दिन से शुरू हो जाएगी। जिस गोबर को बिना काम का बताकर छोड़ दिया जाता है, उससे किसानों के घर समृद्धि आएगी। साथ ही इससे प्रदेश में जैविक कृषि की क्रांति आ सकती है। पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार इसका सालाना कारोबार अरबों में होगा। मंत्रिमंडल की उपसमिति ने गोबर खरीदी के लिए प्रति किलो दर डेढ़ रुपए रखने का सुझाव दिया है।

छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा दुर्ग के प्राध्यापकों ने बताया कि यह लोगों के जीवन पर चौतरफा असर डालने वाले होगा। अपने स्तर पर गोबर पर शोध करने वाले गांधीवादी विचारधारा के किसान विजय साहू का अनुमान है कि योजना का बेहतर क्रियान्वयन हुआ तो इसका कारोबार सालाना 80 अरब रुपए से अधिक का होगा। गोबर गोठानों में रखा जाएगा औैर वर्मी कंपोस्ट बनाकर बेचा जाएगा। प्रदेश में 3509 गोठान बन चुके हैं। इनमें से 1659 गोठानों में कृषि, वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम महिला समूहों के माध्यम से चल रहा है। प्रदेश की 5409 ग्रामपंचायतों में गोठान बनने हैं।

इस तरह समझें गोबर का गणित-
सालाना 2 करोड़ 3 लाख 65 हजार टन गोबर मिलेगा : पशुपालन विभाग की 2019 की गणना के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ 11 लाख 59 हजार पशुधन हंै। इनमें 99.84 लाख गाय और 11.75 लाख भैंस हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अच्छी सेहत वाले पशु दिनभर में 10 से 15 किलो तक गोबर देते हैं। सामान्य तौर पर एक पशु से औसतन एक दिन में पांच किलो गोबर भी मिलेगा तो पूरे प्रदेश में हर रोज 5 करोड़ 57 लाख 95 हजार किलोग्राम गोबर प्राप्त होगा। यह सालाना 2 करोड़ 3 लाख 65 हजार 175 टन होगा।

गोबर का सालाना 30 अरब 54 करोड़ 77 लाख मिलेगा : सरकार ने गोबर खरीदी की दर अभी तय नहीं की लेकिन उपसमिति ने डेढ़ रुपए का सुझाव दिया है। अगर इसी दर से गोबर की खरीदी होती है तो हर साल लगभग 30 अरब 54 करोड़ 77 लाख 72 हजार 500 रुपए का भुगतान पशुपालकों को होगा। विशेषज्ञों के अनुसार दो किलो गोबर से एक किलो वर्मी कंपोस्ट तैयार होता है। इस तरह 2 करोड़ 3 लाख 65 हजार 175 टन गोबर से सालाना 1 करोड़ 1 लाख 82 हजार 587 टन वर्मी कंपोस्ट का निर्माण होगा।

सालाना 50 अरब 91 करोड़ 29 लाख का वर्मी कंपोस्ट: बाजार में वर्मी कंपोस्ट की कीमत 10 रुपए से लेकर 15 रुपए तक है। कामधेनु विश्वविद्यालय में किसानों को 10 रुपए प्रति किलो की दर से वर्मी कंपोस्ट उपलब्ध कराया जाता है। सरकार की ओर से अभी इसकी दर तय नहीं हुई है। माना जा रहा है कि यह पांच रुपए किलो के आसपास होगी। अगर पांच रुपए किलो की दर उत्पादकों को मिलती है तो सालाना इसका कारोबार 50 अरब 91 करोड़ 29 लाख 35 हजार 500 रुपए होता है।

प्रदेश में 37 लाख 46 हजार किसान : कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में लघु, सीमांत एवं दीर्घ मिलकर लगभग 37 लाख 46 हजार किसान हैं। कृषि भूमि का रकबा 50 लाख 84 हजार 49 हेक्टेयर है। जैविक खेती करने वाले किसानों के अनुसार धान की खेती के लिए प्रति एकड़ 100 किलो वर्मी कंपोस्ट की जरूरत पड़ती है। सब्जी आदि के उत्पादन में इससे कुछ ज्यादा मात्रा की जरूरत होती है।

विशेषज्ञों ने ये कहा
गोबर में फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटाश, मैग्नीज, लोहा आदि खनिज अंश हैं। जैविक खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। सरकार गोबर खरीदती है तो इसका बहुत असर होगा। यह बड़ा कारोबार हो जाएगा। वृहद रूप में भंडारण की बजाय बेहतर होगा पशुपालक व किसनों की पहुंच में ही भंडारण किया जाए। वहीं वर्मी कंपोस्ट बनाकर और मूल्य सूची चस्पा कर खरीदी बिक्री केंद्र खोला जाए।
डॉ.आर.पी. तिवारी,
निदेशक, पंचगव्य संस्थान, छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय

सरकार के इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी। उर्वरक का उपयोग कम करने से कृषि लागत घटेगी। जैविक खाद के उपयोग से धरती की उर्वरा शक्ति अच्छी हो जाएगी। जनमानस को रासायनविहिन खाद पदार्थों की प्राप्ति होगी। सनातनी व्यवस्था में पूजा कार्य में गौरी एवं गणेश का (प्राकृत) निर्माण गोबर से होता है। इसे पवित्र माना गया है।
विजय साहू, जैविक खेती कृषक

अभी रासायनिक खाद का कारोबार 12 अरब 73 करोड़ का : कृषि विभाग के मुताबिक प्रदेश में खरीफ एवं रबी फसलों के लिए रसायनिक खाद यूरिया, सुपरफॉस्फेट, डीएपी एवं पोटाश की लगभग 10 लाख 10 हजार 366 टन खपत हो रहा है। इसका बाजार 12 अरब 73 करोड़ 16 लाख 8 हजार रुपए है। वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से यह राशि बचेगी।

बदलेगी तस्वीर....
छत्तीसगढ़ में है 1 करोड़ 11 लाख पशुधन
मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने गोबर का रेट प्रति किलो डेढ़ रु. सुझाया
वर्मी कंपोस्ट का रेट औसतन 10 रु. प्रति किलो, अगर 5 रु. किलो भी बेचें तो 50 अरब की कमाई
वार्षिक कारोबार 81 अरब का
गोबर का कारोबार 30 अरब 54 करोड़ 77 लाख 72 हजार 500 रु.
वर्मी कंपोस्ट का 50 अरब 91 करोड़ 29 लाख 35 हजार 500 रु.
कुल कोरोबार 81 अरब 46 करोड़ 7 लाख 8 हजार रुपए
योजना से यह भी फायदा
आमदनी होगी तो पशुपालक मवेशियों को सड़कों पर नहीं छोड़ेंगे जिससे हादसों में कमी आएगी
गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो पलायन बंद होगा
वर्मी कंपोस्ट से रासायनिक खाद का उपयोग बंद होगा

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