OMG देश की खुफिया एजेंसी स्क्रीय, पता लगाने जिला में हर घंटे कोरोना से हो रही कितनी मौत

बड़े अफसरों के माथे पर खिंची लकीरें.

By: Abdul Salam

Published: 12 Apr 2021, 11:35 PM IST

भिलाई. जिला में कोरोना संक्रमितों की हर घंटे कितने मौत हो रही है। यह जानने के लिए मुक्तिधाम तक सेंट्रल की खुफिया एजेंसी दौड़ लगा रही है। वे जानना चाहते हैं कि हर घंटे में कितनी मौत जिला में महज कोरोना से हो रही है। जिला प्रशासन की ओर से जो जानकारी दी जा रही है, वह मुकम्मल है या नहीं। सेंट्रल की एजेंसी में बैठे अफसरों का भी इसके लिए फोन आ रहा है। यह सुनकर जिला के आला अफसरों के माथे की लकीर गहरा रही है।

आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो हरकत में
इंटेलिजेंस ब्यूरो, भारत की आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसे आईबी कहा जाता है। जिला में इस वक्त इस एजेंसी के अफसर हरकत में हैं। वे कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों को जानना चाहते हैं। इसके लिए जो भी जवाबदार है उनके फोन खडख़ड़ाए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ मुक्तिधाम में पहुंचकर वहां जितने अंतिम संस्कार हुए हैं उसे भी काउंट कर रहे हैं। मुक्तिधाम से उन्हें लौटाया गया तो वे अफसरों से जानकारी लेने की कोशिश में जुट गए।

सामान्य कपड़ों में पहुंच रहे हैं मुक्तिधाम
आईबी के लोग सामान्य कपड़ों में मुक्तिधाम पहुंच रहे हैं। वे वहां के कर्मियों से किसी तरह यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि एक दिन में कितने शव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। इसी के साथ-साथ मार्च 2020 से अब तक माहवार रिकार्ड भी मांग रहे हैं। जिससे कोरोना से होने वाली मौत के संबंध में सही जानकारी हासिल किया जा सके। मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार का काम करने वाले कर्मी एक दिन की जानकारी दे रहे हैं। वहीं शेष जानकारी उनको आसानी से नहीं मिल रही है।

हकीकत छुपाए जाने की आशंका
जिला में कोरोना संक्रमितों की शुरू में जब मौत हो रही थी, तब जिला प्रशासन मृतकों की पूरी जानकारी दे रहा था। इसके बाद मौत की संख्या बढऩे लगी तो विभाग ने सिर्फ संख्या देना शुरू कर दिया। अस्पतालों में जितनी मौत हो रही थी, उससे कम आंकड़े बताए जा रहे थे। इस मामले में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिनके नाम नहीं है उनको जोड़ दिया जाएगा।

मौत के आंकड़े चौकाने वाले
जिला के मुक्तिधामों में माहभर में जितने अंतिम संस्कार होते हैं, उतनी मौत अप्रैल 2021 के पहले सप्ताह में हो चुकी थी। जिसकी वजह से लकड़ी कम पड़ गई। यही हालात रिसाली में भी रहा। वहां जब एक साथ 12-12 शव ट्रक में पहुंचे तो साथ में एक-एक ट्रैक्टर लकड़ी भी लानी पड़ी। वहां माहभर में जितनी मौत होती है, उससे अधिक शव दो दिन में पहुंच चुका था। जिसकी वजह से मुक्तिधाम के बाजू खाली मैदान में अंतिम संस्कार की रस्म अदा की गई। ऐसे ही हालात शिवनाथ नदी, मुक्तिधाम, दुर्ग में देखने को मिले। दुर्ग के मुक्तिधाम में 8 से 10 शवों को अलग-अलग सजाकर अंतिम संस्कार किया गया। रामनगर मुक्तिधाम, भिलाई में भी हालात वैसे ही रहे। यहां दुर्ग के साथ-साथ दूसरे जिलों से भी शव पहुंचने की बात कही गई। शेड के बाहर बड़ी संख्या में शवों का अंतिम संस्कार रामनगर में भी किया गया। जामुल के मुक्तिधाम में एक साथ जब १५ शव लाकर अंतिम संस्कार किए तो दूसरे दिन से मोहल्ले के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया।

हर घंटे में हो रही 6 से अधिक मौत
जिला में हर घंटे करीब 6 से अधिक लोगों की मौत हो रही है। मुक्तिधाम और कब्रिस्तानन में किए जा रहे अंतिम संस्कार के आंकड़ों पर नजर डाले तो यह साफ होता है। इसमें कोरोना संक्रमित और सामान्य दोनों ही मामले शामिल हैं। कोरोना से होने वाली मौत के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक शव वाहन भेजा जा रहा है, जिसमें तीन-तीन शव मुक्तिधाम के लिए भेज रहे हैं। इसी तरह से ट्रक भेज रहे हैं तो उसमें 12-12 शव तक लेकर जा रहे हैं।

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