... जरा बचकर रहना, मैत्रीबाग के इस बुजुर्ग को पसंद है कलेजा

भिलाई के मैत्रीबाग का मगर उम्र दराज हो चुका है, इसके बाद भी वह खुराक को लेकर चूजी है.

By: Abdul Salam

Published: 05 Sep 2019, 04:23 PM IST

Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

भिलाई. विश्व की सबसे लंबी रेलपांत का निर्माण करने में महारथ हासिल करने में भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन कामयाब रहा है। वहीं अपने ही सहेजे हुए गुलदस्ते मैत्रीबाग को वह अब नजरअंदाज कर रहा है। इसका ही परिणाम है कि मैत्रीबाग के एक्सपांशन प्रोजेक्ट के विस्तार में पिछले दो साल से मुहर लगने के बाद भी विराम लगा हुआ है।

45 साल का हुआ मगर
मैत्रीबाग में मगर एक बाड़े में अकेला ही है। उसका जोड़ा 2016 में दुनिया से जा चुका है। तब से यह अकेले ही इस बाड़े में बने पानी के कुंड में रहता है। यह कभी-कभी ही नजर आता है। पर्यटक अक्सर इसे बिना देखे ही लौट जाते हैं। अब प्रबंधन मगर का एक पेयर लखनऊ जू से लाने प्रयास कर रहा है। जहां पहले ही सफेद बाघ प्रबंधन ने दे रखा है। अब एक्सचेंज में वहां से दूसरे वन्य प्राणी लाए जाने हैं। इस बुजुर्ग मगरमच्छ को कलेजा बहुत पसंद है, जिसका ध्यान प्रबंधन हमेशा ही रखता है।

देश के कोने-कोने से आते हैं पर्यटक
मैत्रीबाग टाउनशिप में रहने वालों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ व देश के कोने-कोने से आने वालों के लिए यह मनोरंजन का साधन है। इसको लेकर प्रबंधन जिस तरह से पूर्व में खास तवज्जो दे रहा था, वर्तमान में वह नजर नहीं आता। जिसकी वजह से जू का पहले जैसा एट्रेक्शन भी नहीं रह गया है। मैत्रीबाग में हर साल कम से कम १२ लाख पर्यटक पहुंचते हैं। जिसमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

जंगल की रानी काट रही तन्हाई की सजा
जंगल के राजा एसियेटिक लॉयन (नील) का 29 जून, 2015 को कार्डिएक अटैक के कारण मौत हो गई थी। तब से इस बाड़ा में दो-दो मादा लॉयन अलग-अलग केज में कैद हैं। जंगल में रानी के तौर पर रहने वाली लॉयन यहां एकांत का जीवन जीने को मजबूर है। एक छोटे से पिंजरे में रखकर मादा लॉयन को प्रबंधन हर दिन खुराक दे रहा है। यह बाड़ा में खुला नहीं रखा गया है, जिसकी वजह से पर्यटकों की नजरों से भी दूर है। प्रबंधन प्रयास कर रहा है कि राजकोट से कम से कम एक नर लॉयन लाया जा सके।

भोंकने वाले हिरण को नहीं मिला साथी
मैत्रीबाग में भोंकने वाला हिरण (बार्किंग डियर) का जोड़ा प्रबंधन ने मंगवाया था। इस पेयर में से एक की मौत हो गई। तब से एक बार्किंग डियर अकेले ही बाड़े में भोंकते रहती है। अब प्रबंधन इसका पेयर लखनऊ जू से एक्सचेंज के तहत लाने पहल कर रहा है।

तेंदुआ के केज में पसरा है सन्नाटा
तेंदुआ के पेयर में से नर की मौत पिछले साल हो गई। जिसके बाद से अकेले तेंदुआ मादा यहां रह रही है। वह अक्सर सीमेंट के बेड में पड़ी रहती है। प्रबंधन एक पेयर तेंदुआ बोकारो जू से लाने की योजना बना रहा है। जहां पहले ही सफेद बाघ मैत्रीबाग से दिए थे।

एक्सचेंज मामले में सुस्त प्रबंधन
मैत्रीबाग प्रबंधन ने 2008 से 10 के बीच बहुत ही तेजी से वन्य प्राणियों को एक्सचेंज किया। जू के अधिकारी तब टीएस क्षत्रीय थे। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी, कि दूसरे जू में जिस तरह वन्य प्राणी दिए हैं। वैसे ही जल्दी-जल्दी लेकर आएंगे। इसके बाद प्रबंधन सुस्त पड़ गया। जिन जू में एक्सचेंज के तहत सफेद बाघ दिए गए। वहां से बदले में वन्य प्राणी लाने की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।

मास्टर प्लान के नाम पर सिर्फ घेरा जवाहर उद्यान को
मैत्रीबाग प्रबंधन ने मास्टर प्लान को मंजूरी मिलने के बाद सिर्फ जवाहर उद्यान को घेरा है। इसके बाद हर माह नए पिंजरे का निर्माण किया जाना था, दो साल से अब तक वह ठंडे बस्ते में है। जवाहर उद्यान वर्तमान में सेवानिवृत कर्मिकों के पौधरोपण की जगह बन कर रह गया है।

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