कल्याण महाविद्यालय में घोटाला, 30 साल से नहीं काटा प्रोफेसरों का पीएफ, समन जारी, २२ मई को है सुनवाई

कल्याण महाविद्यालय में घोटाला, 30 साल से नहीं काटा प्रोफेसरों का पीएफ, समन जारी, २२ मई को है सुनवाई
kalyan college

Mohammed Javed | Publish: May, 15 2019 01:47:57 PM (IST) Bhilai, Durg, Chhattisgarh, India

 

डॉ. वाइआर कटरे,प्राचार्य, कल्याण पीजी कॉलेज - इपीएफ कार्यालय से समन जारी हुआ है। मैनेजमेंट से चर्चा करेंगे।

 

भिलाई . शहर का कल्याण महाविद्यालय इपीएफ घोटाले में फंस गया है। इस संस्थान ने पिछले ३० साल से कार्यरत ६५ कर्मचारियों का इपीएफ ही नहीं काटा। १२ फीसदी के हिसाब से यह राशि करोड़ों रुपए बताई गई है। इस घोटाले के बारे में कॉलेज के ही एक मानसेवी प्रोफेसर ने प्रदेश इपीएफ क्षेत्रीय कार्यालय को लिखित में शिकायत की है। यही नहीं मामले में केंद्रीय मानव अधिकार आयोग को भी शिकायत का पत्र भेजा गया है, जिसमें मानसेवी प्रोफेसर ने कॉलेज मैनेजमेंट के खिलाफ लगातार प्रताडि़त किए जाने के अरोप लगाए हैं।

इपीएफ कार्यालय ने जारी किया समन
पीएफ घोटाले की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से कॉलेज मैनेजमेंट को समन जारी किया गया है। इस मामले में मैनेजमेंट को चेतावनी दी गई है कि यदि वह पेशी में हाजिर नहीं होते हैं, तो इसे कानूनी तौर पर कार्रवाई करने के लिए प्रेशित कर दिया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई २२ मई को होनी है। प्रोफेसरों से मिली जानकारी के तहत कॉलेज में शुरुआत से ही मानसेवी प्रोफेसर कार्यरत हैं, इस तरह जब कभी भी प्रोफेसरों ने इपीएफ और इएसआइ के लाभ के लिए मैनेजमेंट से बात की, उन्हें नौकरी से निकाल दिए जाने का रास्ता दिखा दिया गया। इससे हलाकात होकर प्रोफेसरों ने हमेशा के लिए चुप्पी साध ली। अब जाकर एक प्रोफेसर ने प्रदेश से लेकर दिल्ली तक कॉलेज के खिलाफ शिकायत का हल्ला बोल दिया है।

मैनेजमेंट बोला, तुम सब अधिकृत नहीं
इपीएफ और इएसआइसी का लाभ देने के लिए जब प्रोफेसर मैनेजमेंट से मिले, तो उन्हें इन लाभों के लिए अधिकृत नहीं हो कह दिया गया। नियुक्ति के समय मिले पत्र में इनका कोई जिक्र नहीं है, बताकर मामले को रफादफा कर दिया गया। सबसे बड़ी बात जो शिकायतकर्ता ने मानव अधिकार आयोग को लिखी है, उसमें कहा गया है कि मैनेजमेंट ने प्रोफेसर पर शिकायत लेने का दवाब बनाया।

...तो देना होगा हर प्रोफेसर को बकाया
इपीएफ की पेशी में यदि मामला मानसेवी प्रोफेसरों के पक्ष में आता है, तो इस स्थिति में हर एक प्रोफेसर को नियुक्ति से अब तक का बकाया इपीएफ राशि भुगतान करनी होगी। शिकायतकर्ता ने बकाया भुगतान दिलाने की मांग की है। इस पूरे मामले में जब कॉलेज मैनेजमेंट से पूछा गया कि इतने साल में पीएफ क्यों नहीं काटा, तो उन्होंने शर्त में ही इसे शामिल होने का हवाला दे दिया। इपीएफ के नियम है कि जिस संस्थान में १६ से अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे, वहां हर एक कर्मचारी की भविष्य निधि काटना अनिवार्य होगा, बावजूद इसके मानसेवी प्रोफेसरों को दायरे से बाहर रखकर मैनेजमेंट ने करोड़ों रुपए बचाए

 

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