151 बैतालों के मंत्रोच्चार के साथ यहां दुर्गा अष्टमी की मध्यरात्रि को निकलते हैं खप्पर, सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवित

माता की सेवा में लगे पण्डों द्वारा परंपरानुसार 7 काल, 182 देवी-देवता और 151 वीर बैतालों की मंत्रोच्चारणों के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्जवलित मिट्टी के पात्र(खप्पर) में विराजमान किया जाता है।

By: Dakshi Sahu

Published: 13 Oct 2021, 05:09 PM IST

कवर्धा. खप्पर की परंपरा कायम रहे इसलिए धारा 144 अंतर्गत लागू कफ्र्यू के दौरान भी महाष्टमी की मध्य रात्रि को शहर के तीन देवी मंदिरों से खप्पर निकाली जाएगी। हालांकि इस दौरान आम लोग खप्पर के दर्शन नहीं कर सकते। पुलिस की सुरक्षा के बीच केवल मंदिर समिति के सदस्यों की उपस्थिति खप्पर निकाली जाएगी। भारतवर्ष में संभवत: केवल कवर्धा शहर में ही नवरात्रि के दुर्गा अष्टमी पर देवी मंदिरों से खप्पर निकालने की परंपरा कायम है। लेकिन इसमेंं भी साल दर साल अड़चने आ रही है। बीते वर्ष कोरोना के चलते भी धारा 144 लागू रहा। वहीं इस वर्ष शहर में विवाद के चलते कफ्र्यू की स्थिति है। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से खप्पर निकालने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए।

प्रशासन ने लगाया है कफ्र्यू
प्रशासन द्वारा निर्देश जारी कर दिए है कि कवर्धा शहर में नवरात्री के अष्टमी की अर्धरात्रि को मां परमेश्वरी मंदिर, मां दन्तेश्वरी मंदिर और मां चण्डी मंदिर से खप्पर निकालने की परंपरा है। इसमें शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बहुत अधिक संख्या में जनमानस कवर्धा शहर में एकत्रित होते हंै। कवर्धा शहर के अंदर अत्यधिक संख्या में जन मानस एकत्रित होने से कवर्धा शहर में कानून व शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इसके चलते धारा 144 अंतर्गत कफ्र्यू जारी रहेगा और आम लोगों के घर से निकलना प्रतिबंधित है।

कई सदियों पुरानी है परंपरा
देवी का आह्वान कर खप्पर निकालने की धार्मिक परंपरा कई सदी पुरानी है। कवर्धा के तीन देवी मंदिरों में यह परंपरा को आज भी कायम है। शारदीय नवरात्रि में नगर के मां दंतेश्वरी मंदिर, मां चण्डी मंदिर और मां परमेश्वरी मंदिर से मध्यरात्रि को खप्पर निकाली जाती है, जबकि क्वांर नवरात्रि में दो ही मंदिरों से खप्पर निकाली जाती है। मध्यरात्रि 12.15 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर से पहला खप्पर अगुवान की सुरक्षा में निकलेगा। इसके 10 मिनट बाद ही मां चण्डी से और फिर 10 मिनट के अंतराल में मां परमेश्वरी से खप्पर निकाली जाएगी, जो नगर भ्रमण करेगी। विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए मोहल्लों में स्थापित 18 मंदिरों के देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाता है।

सर्वे भवन्तु सुखिन: आपदाओं से मुक्ति दिलाने
खप्पर धार्मिक आपदाओं से मुक्ति दिलाने व नगर मेंं विराजमान देवी-देवताओं का रीति रिवाज के अनुरूप मान मनौव्वल कर सर्वे भवन्तु सुखिन: की भावना स्थापित करना है। प्रत्येक नवरात्रि पक्ष के अष्टमी की रात्रि करीब लगभग 10.30 बजे से ही माता की सेवा में लगे पण्डों द्वारा परंपरानुसार 7 काल, 182 देवी-देवता और 151 वीर बैतालों की मंत्रोच्चारणों के साथ आमंत्रित कर अग्नि से प्रज्जवलित मिट्टी के पात्र(खप्पर) में विराजमान किया जाता है। पूर्व की परंपरा में थोड़ा पृथक कर 108 नींबू काटकर रस्में पूरी की जाती है। मध्य रात्रि ठीक 12 बजे दैविक शक्ति से प्रभावित होते ही समीपस्थ बह रही सकरी नदी के नियत घाट पर स्नान के बाद दु्रतगति से पुन: वापस आकर स्थापित आदिशक्ति देवी की मूर्ति के समक्ष बैठकर उपस्थित पंडों से श्रृंगार करवाया जाता है। इसके बाद खप्पर मंदिर से निकाली जाती है।

लोगों का घरों से निकलना पूर्णत: प्रतिबंधित
जिला प्रशासन से जारी आदेश अनुसार कवर्धा की सीमा क्षेत्र में प्रवेश, सड़कों पर आवाजाही, उपस्थिति और घरों से बाहर निकलना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। खप्पर व खप्पर समिति में अधिकतम 10 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे। उपरोक्त आदेश के उल्लंघन करते हुए पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति, संस्थान, आयोजक आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 से 60 भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 एपिडेमिक एक्ट 1897 तथा अन्य सुसंगत विधिक प्रावधानों जैसे लागू हों के अंतर्गत कार्रवाई के भागी होंगे।

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