Breaking news रिसाली निगम के नामांकित पार्षदों की छुट्टी, दस माह पहले किए थे मनोनीत

भिलाई निगम को भी मिला गाइड लाइन.

By: Abdul Salam

Updated: 29 Jul 2021, 11:11 PM IST

भिलाई. नगर पालिक निगम, रिसाली के आठ एल्डरमेन के मनोनयन को लेकर तमाम सवाल उठ रहे थे। पत्रिका ने इन खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद शासन ने एक आदेश जारी कर नामांकित पार्षदों के मनोनयन को नियम विरूद्ध बताते हुए रद्द कर दिया है। शासन ने कहा है कि नियम के मुताबिक जब सदन का गठन किया जाएगा, उसके बाद नामांकित पार्षदों का मनोनयन किया जाएगा। अब सवाल उठ रहा है कि दस माह तक जो मानदेय नामांकित पार्षदों को दी गई है, उसकी रिकवरी किससे की जाएगी।

इनको किए थे मनोनीत
राज्य सरकार की ओर से नगर पालिक निगम, रिसाली के लिए विलास बोरकर, प्रेम साहू, फकीर राम ठाकुर, तरुण बंजारे, अनुप डे, किर्ती लता वर्मा, संगीता सिंह, डोमार देशमुख को मनोनीत किए हैं। वे सितंबर 2020 से अब तक नामांकित पार्षद (एल्डरमेन) के तौर पर काम कर रहे थे। वहीं रिसाली जिस निगम से अलग हुआ है, वहां के एल्डरमेन को किसी तरह से मानदेय अब नहीं मिल रहा। इतना ही नहीं 26 दिसंबर 2019 को जब रिसाली नगर पालिक निगम अस्तत्व में आया तब से ही रिसाली के तमाम पार्षदों को शून्य घोषित कर दिए। उन्हें माह में 7500 रुपए मानदेय दिया जाता था, वह मिलना बंद हो चुका है।

दस माह की रिकवरी किससे
नगर पालिक निगम, रिसाली के सदन का गठन ही नहीं हुआ है। इसके बाद भी यहां आठ एल्डरमेन को मनोनीत कर पिछले दस माह से मानदेय दिया जा रहा था। अब उनके मनोनयन को रद्द कर दिए हैं। सवाल उठता है कि आखिर अधिकारी इसको लेकर उस वक्त चुप क्यों थे। अब जो रकम नामांकित पार्षदों को दी गई है, उसकी भरपाई कौन करेगा। जनता का पैसा इस तरह से मनोनीत कर दिया जा सकता है क्या।

भिलाई निगम को भी मिला दिशा निर्देश
रिसाली में बिना सदन का गठन हुए नामांकित पार्षदों के मनोनयन को देख भिलाई के नामांकित पार्षद भी निगम आयुक्त के माध्यम से शासन से इस संबंध में गाइड लाइन मांग रहे थे। नगर पालिक निगम, भिलाई को गाइड लाइन मिली है कि सदन का गठन होने के बाद ही नियमानुसार नामांकित पार्षदों का मनोनयन किया जाएगा। उसके बाद ही मानदेय समेत तमाम सुविधा दी जाएगी। नगर पालिक निगम, भिलाई का कार्यकाल पूरा होने के बाद जनवरी 2021 से मनोनीत किए गए एल्डरमेन को मानदेय मिलना बंद हो चुका है। उनका मनोनयन शून्य कर दिया गया।

मंत्री ने कहा था सही, पूर्व विस अध्यक्ष ने कहा था गलत
नगरीय निकाय मंत्री शिव डहरिया ने कहा था कि नामांकित पार्षदों का मनोनयन शासन कर सकता है। इस मामले में कांग्रेस के प्रवक्त व विधायक देवेंद्र यादव ने भी मनोनयन को सही ठहराया था। वहीं पूर्व विस अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने कहा था कि बिना सदन का गठन हुए नामांकित पार्षदों का मनोनयन नहीं किया जा सकता।

एमपी और सीजी में अब तक इसके तहत ही किए हैं मनोनीत
अधिनियम के नगर पालिक निगम की संरचना के लिए नगर पालिक निगम, रिसाली में सबसे पहले मेयर, पार्षदों का चुनाव किया जाना है। इसके बाद ही राज्य सरकार की ओर से एल्डरमेन की नियुक्ति की जानी है। अब तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में ऐसा ही होता आया है।

क्या कहता है अधिनियम
नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा - 9 के मुताबिक नगर पालिक निगम की संरचना निम्न लिखित से मिलकर बनेगा :-
(क) नगर पालिक वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित महापौर अर्थात सभापति (चेयरपर्सन)
(ख) वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित पार्षद,
(ग) नगर पालिक प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले छह से अनधिक ऐसे व्यक्ति जिन्हें राज्य सरकार ने नामनिर्दिष्ट किया गया हो।

नियम के मुताबिक नामांकित पार्षद हो जाते हैं शून्य

एसके दुबे, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन, दुर्ग ने बताया कि नगर पालिक निगम का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, तब खुद ही नामांकित पार्षद (एल्डरमेन) अपने आप शून्य हो जाते हैं। इस वजह से भिलाई के जो एल्डमेन थे उनको मानदेय नहीं दिया जा सकता।

शासन से नामांकित पार्षदों के मनोनयन को रद्द करने आया निर्देश

नगर पालिक निगम, रिसाली आयुक्त, प्रकाश कुमार सर्वे ने बताया कि शासन से निर्देश आया है कि सदन गठन के बाद ही नामांकित पार्षदों का मनोनयन किया जाना है। मनोनीत किए गए नामांकित पार्षदों की नियुक्ति को रद्द कर दिए हैं। चुनाव के बाद मनोनयन होगा।

नामांकित पार्षदों को नहीं मिलेगा मानदेय
अशोक द्विवेदी, उपायुक्त, नगर पालिक निगम, भिलाई ने बताया कि शासन से गाइड लाइन मांगा गया था, वहां से नियम के मुताबिक सदन गठन होने के बाद ही नामांकित पार्षदों का मनोनयन करने की बात कही गई है। वर्तमान में नामांकित पार्षदों को मानदेय नहीं दिया जाएगा।

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