scriptLost mother in Corona, eyes have become moist on Chhath festival | Bhilai कोरोना महामारी में मां को खोया, 20 साल में पहली बार छठ महापर्व पर नम हुई आंखे | Patrika News

Bhilai कोरोना महामारी में मां को खोया, 20 साल में पहली बार छठ महापर्व पर नम हुई आंखे

संतान की सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए मां 36 घंटे का रहती थी निर्जल उपवास. दादा, दादी, पिता और चाचा के जाने से छिन गई खुशियां,

भिलाई

Updated: November 08, 2021 10:49:01 pm

भिलाई. खुर्सीपार में रहने वाले सचिन कुमार दुबे छठ महापर्व के करीब सप्ताहभर पहले ही तालाब के किनारे हर साल जाकर वेदी सजा आते थे। 8 अप्रैल 2021 को कोरोना महामारी के दौरान सुगंधी दुबे (57 साल) का निधन हो गया। जिसकी वजह से इस साल वेदी सजाने तालाब तक जाने की हिम्मत नहीं हुई। मां के बिना यह त्योहार पूरी तरह से अधूरा लग रहा है। घर में सभी के आंख उनकी याद में नम है। हर साल दीपावली के पहले ही घर के रंग-रोगन का काम पूरा हो जाता था। इस साल न तो दीपावली का पता चला और न छठ पर्व को लेकर वैसी कोई तैयारी है।

Bhilai कोरोना महामारी में मां को खोया, 20 साल में पहली बार छठ महापर्व पर नम हो गई है आंखे
Bhilai कोरोना महामारी में मां को खोया, 20 साल में पहली बार छठ महापर्व पर नम हो गई है आंखे

मन्नत मांगती थी मां
छठी मइया और सूर्य देव के लिए मां घर में ठेकुआ समेत अन्य पकवान तैयार करती थी। घर में इस दौरान डाभ फल जिसे पवित्र फल माना जाता है, लेकर आते थे। इसके अलावा केला, गन्ना, सुपारी और सिंघाड़ा लेकर आते थे। इसे कोसी में रखते थे। मां बच्चों और परिवार के लिए मन्नत मांगती थी और कठोर 36 घंटे का निर्जल व्रत रहती थी। वह बच्चों के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती थी। परिवार को सहेज कर रखने वाली वही थी, पिता भी उनके जाने के बाद से मायूस हो गए हैं।

दादा, दादी, पिता और चाचा के जाने से छिन गई खुशियां,
टाउनशिप के सेक्टर-4 में रहने वाले एक परिवार से कोरोना ने एक या दो नहीं बल्कि पूरे चार सदस्य छीन लिए थे। परिवार के सदस्यों ने इस साल दीपावली का त्योहार नहीं मनाया। वे पिछले साल किस तरह से नए कपड़ों के साथ-साथ पटाखों को फोड़ त्योहार में इंज्वाय किया था, उसे याद करते रहे। इस दौरान परिवार के सदस्यों की आंखे नम हो गई। यह पहली दीपावली थी जो पिता के बिना गुजर रही थी।

पिछले साल पापा के साथ फोड़े थे पटाखे
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पढ़ रही बेटी ने बताया कि पिछले साल पापा के साथ पटाखे फोड़े थे। उनके जाने से त्योहार का रंग फीका लगने लगा है। एक संयुक्त परिवार के चार सदस्य जब एक साथ दुनिया से चले जाते हैं तब उस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है।

हर कोने में पसरी होती थी खुशियां
बेटी ने बताया कि त्योहार के मौके पर हर घर की तरह पापा और मम्मी के साथ पहले से तैयारियां करते थे। उसकी जगह अब मातम पसरा है। परिवार के सदस्य इस सदमें से अब तक उभर नहीं पा रहे हैं।

सिर से छिन गया पिता का साया
बेटी ने बताया कि उनके पापा (51 साल) की कोरोना से निजी हॉस्पिटल में दाखिल किए। वहां तबीयत नहीं सुधरी तो एम्स, रायपुर में शिफ्ट किए। जहां 21 मार्च 2021 को उन्होंने दम तोड़ दिया। घर को वे ही चला रहे थे। उनके जाने के बाद सबकुछ खत्म सा हो गया है। इसी तरह से दादा, दादी, चाचा की भी इस दौरान मौत हो गई। खुशियां जैसे परिवार से रूठ गई है।

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