महाशिवरात्रि 2019 : इस स्वयं-भू शिवलिंग का अंतिम छोर आज तक नहीं ढ़ूंढ पाए श्रद्धालु

ब्लाक मुख्यालय पाटन से 12 किमी की दूर रानीतराई से लगे ग्राम कौही स्थित आनंदमठ में स्थापित शिवलिंग स्वयं-भू हैं। खुदाई में मिले इस शिवलिंग की गोलाई और ऊंचाई आज भी बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां स्थापित मंदिर को शिवलिंग के आकार को देख विशाल बनाया गया।

By: Satya Narayan Shukla

Updated: 03 Mar 2019, 08:41 PM IST

भिलाई/रानीतराई@Patrika. ब्लाक मुख्यालय पाटन से 12 किमी की दूर रानीतराई से लगे ग्राम कौही स्थित आनंदमठ में स्थापित शिवलिंग स्वयं-भू हैं। महाशिवरात्रि और सावन माह में भगवान शिव के दर्शन करने श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। खुदाई में मिले इस शिवलिंग की गोलाई और ऊंचाई आज भी बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां स्थापित मंदिर को शिवलिंग के आकार को देख विशाल बनाया गया। लगभग 15 एकड़ क्षेत्रफल में फैले आनंद मठ की नैसर्गिक सुंदरता भी मनमोहक है।

यह शिवलिंग खुदाई के वक्त मिला

खारुन नदी के किनारे बसा यह शिवमंदिर अंचल में काफी ख्यातिप्राप्त है। ग्रामीणों की मानें तो यह शिवलिंग जागीरदार विशाल प्रसाद तिवारी के पुत्र स्वामी मोहनानंद को खुदाई के वक्त मिला। खुदाई के दौरान शिवलिंग खंडित हो गया था जिसके निशान आज भी मौजूद है।@Patrika. उस समय लगभग 20 से 25 फीट खुदाई की गई लेकिन इस शिवलिंग का अंतिम छोर का पता नहीं चला। इसके बाद सभी की सहमति और भगवान की इच्छा मान कर मंदिर की स्थापना की गई। इस स्वयंभू शिवलिंग का आकार भी निरंतर बढ़ रहा है। इसकी उंचाई लगभग छह फीट व परिधि पांच मीटर है।

 

Bhilai patrika

मां काली को किया प्रसन्न
गांव के बुजुर्ग बताते है कि ग्राम कौही के ही जागीरदार विशाल प्रसाद तिवारी के पुत्र थे स्वामी मोहनानंद, जो तांत्रिक विद्या भी जानते थे। मोहनानंद ने ही यहां महाकाली के मंदिर की स्थापना की। @Patrika. कहा जाता है कि 100 वर्ष पूर्व स्वामी मोहनानंद ने कोलकाता से महाकाली को प्रसन्न कर उन्हें सूक्ष्म रूप में नदी के किनारे स्थित पठारी मैदान पर स्थापित किया था। शिवरात्रि पर यहां लोग विशेष पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं और खारुन के जल से महादेव का जलाभिषेक करते हैं।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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