scriptManagement's negligence exposed in Rastogi Hostel investigation | रस्तोगी हॉस्टल जांच में प्रबंधन की लापरवाही हुई उजागर | Patrika News

रस्तोगी हॉस्टल जांच में प्रबंधन की लापरवाही हुई उजागर

एक छात्रा की मौत,

भिलाई

Updated: August 02, 2022 12:06:06 am

भिलाई. रस्तोगी कॉलेज, नेहरू नगर दीनदयाल ग्रामीण कौशल योजना के तहत प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण के लिए आने वाले छात्राओं को यहां करीब 13 हॉस्टल में संस्था रख रही है। जिसमें से 39 से अधिक बच्चे पिछले सप्ताहभर के भीतर उल्टी होने की शिकायत लेकर निजी हॉस्पिटल में दाखिल किए गए हैं। इसमें से एक छात्रा को परिजन बीमार हालत में इलाज कराने अपने गांव लेकर चले गए। जहां उसकी मौत हो गई। यह खबर सुनकर हॉस्टल और अस्पताल में छात्र-छात्राओं के मध्य शोक की लहर है।

रस्तोगी हॉस्टल जांच में प्रबंधन की लापरवाही हुई उजागर
रस्तोगी हॉस्टल जांच में प्रबंधन की लापरवाही हुई उजागर

जांच में हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही हुई उजागर
रस्तोगी कॉलेज में आवासीय छात्रावास में कुछ छात्राओं की उल्टी दस्त होने की शिकायत के बाद हाईटेक अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलने पर कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा व एसपी डॉ अभिषेक पल्लव हाइटेक हॉस्पिटल पहुंचे। इससे पहले अस्पताल प्रबंधन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी जानकारी दी थी। उनकी टीम ने भी मौके पर पहुंच कर छात्राओं की तबीयत की स्थिति जानी थी। कलेक्टर ने हॉस्पिटल में व्यवस्थाओं की जांच के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि वाटर कूलर और आरओ खराब थे, जिसकी वजह से पानी खराब था और छात्राओं की तबीयत खराब हुई। जांच में पाया गया कि पानी खराब होने की वजह से छात्राओं की तबीयत खराब हुई। कलेक्टर ने बताया कि इस संबंध में हॉस्टल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। एक छात्रा की मृत्यु भी हुई है। इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

उल्टी-दस्त की आ रही शिकायत
चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग, डॉक्टर जेपी मेश्राम ने बताया कि रस्तोगी कॉलेज, भिलाई में स्किल कोर्स वाले आवासीय छात्राओं के उल्टी-दस्त होने की सूचना हाईटेक हॉस्पिटल से मिली। कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ की टीम जिसमें सीएमएचओ, दुर्ग डॉक्टर जेपी मेश्राम, जिला सर्वेंलेंस आईडीएसपी, अधिकारी डॉक्टर सीबीएस बंजारे, डॉक्टर मनोज दानी, एमडी, मेडिसिन स्पेशलिस्ट, जिला चिकित्सालय, दुर्ग, एपिडेमोलॉजिस्ट, दुर्ग रितीका सोनवानी, भिलाई रेपिड रिस्पांस टीम से तुषार वर्मा, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक, भिलाई शामिल है। टीम ने हाईटेक अस्पताल में जायजा लिया, जिसमें 39 छात्राओं को उल्टी-दस्त से संक्रमित पाया।

पानी का लिया सेंपल
रस्तोगी कॉलेज के महिला छात्रावास (वी-1) में 200 छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिसके तहत जांच में छात्रावास का भी निरीक्षण किया गया। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी व उनकी टीम ने आरओ के पानी और वाटर कूलर के पानी को क्लिनिकल जांच के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, दुर्ग सैंपल लेकर भेजा गया है। अस्पताल में दाखिल 39 मरीज उपचाररत है। सभी स्वस्थ है । गंभीर स्थिति नहीं है।

एक संस्था में 1000 से अधिक छात्र-छात्राएं
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत दुर्ग जिला में एक संस्था 1,000 से अधिक छात्र-छात्राओं को हॉस्टल में रखकर प्रशिक्षण दे रही है। योजना के मुताबिक प्रशिक्षण ले रहे बच्चों के लिए रहने के साथ खाना, पानी सबकुछ की व्यवस्था मुफ्त की जानी है। इसके एवज में सरकार से संस्था को रकम दी जाती है। जिला में इस तरह के प्रशिक्षण अलग-अलग संस्था दे रही है। बच्चों के लिए ढेर सारी संस्थाओं ने 50 से अधिक हॉस्टल की व्यवस्था कर रखी है।

जिला प्रशासन देता ध्यान तो नहीं होते बच्चे बीमार
हॉस्पिटल में छात्राएं पहली बार बीमार नहीं हो रही है। नेहरू नगर के हॉस्टल से पिछले साल भी इस तरह की शिकायत लेकर कई बच्चे पहले सरकारी फिर निजी अस्पताल में दाखिल होते रहे। प्रशासन को जानकारी मिली तो जांच करने टीम गई और सबकुछ दुरुस्त है कहकर लौट गई। अब इस साल मामला और बढ़ गया है। बीमार एक छात्रा को परिवार गांव लेकर गया, जहां उसकी मौत हो गई।

6 माह तक का दिया जा रहा प्रशिक्षण
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) गरीब ग्रामीण युवाओं को नौकरियों में नियमित रूप से न्यूनतम मजदूरी के बराबर या उससे ऊपर मासिक मजदूरी देने का लक्ष्य रखता है। यह ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलों में से एक है। योजना के तहत बीपीएल कार्डधारी परिवारों के बच्चों को चुने हुए ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण देने के बाद जहां मांग होती है, वहां इनको रोजगार भी दिया जा रहा है। लगातार योजना के तहत जिला में सैकड़ों बच्चे हर छह माह में प्रशिक्षण लेकर निकल रहे हैं। एक बेच में 35 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाना है।

छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्य के बच्चे ले रहे प्रशिक्षण
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग गांव से छात्राएं प्रशिक्षण लेने के लिए दुर्ग में पहुंची हुई हैं। अस्पताल में दाखिल छात्राओं ने बताया कि कोर्स के तहत पढ़ाई बेहतर हो रही है। तबीयत बिगड़ जाने से प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है। खाने की व्यवस्था को घर जैसा साफ रखने की जरूरत है। पानी की भी प्रबंधन जांच कर ले तो बेहतर होगा।

अलग-अलग कारण बता रहे बच्चे :-
- उल्टी होने की वजह को लेकर जब अस्पताल में दाखिल बच्चों से चर्चा किया गया। तब उन्होंने बताया कि पानी साफ नहीं आ रहा है। इसकी शिकायत भी किए थे, पानी की जांच अगर की जाए तो बीमार पडऩे की वजह साफ हो जाएगी।
- हॉस्टल का किचन जिस स्थान पर है, उसके पीछे नाला है। जिससे मक्खी व मच्छर भीतर आते हैं। मक्खी जो खाद्य सामग्री तैयार की जा रही है, उसमें बैठती है और बाद में उसका सेवन बच्चे करते हैं। बारिश के वक्त गंदगी और मक्खी बढ़ जाती है।
- संचालक दे रहे अच्छा चांवल, सब्जी पर बनाने वाले जब बच्चों को देते हैं तो वह खाया नहीं जाता। अस्पताल में दाखिल बच्चों ने बताया कि रात से वे कुछ खाए तक नहीं है।
- एक कमरे में 8-8 बच्चों को रखा जा रहा है, मौसम बदला है, उससे उमस हो रही और दिक्कत हो रहा है। नए बच्चों के दाखिल किया जा रहा है, तब यह परेशानी शुरू हुई है।

39 बच्चों को किए हैं दाखिल
डॉक्टर जेपी मेश्राम, चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, दुर्ग सुसाइडल ने बताया कि डीडीयू-जीकेवाई के तहत नेहरू नगर में छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां के करीब 39 युवाओं को उल्टी की शिकायत के बाद हाईटेक हॉस्पिटल में दाखिल किया गया है। बच्चों ने बताया कि पानी साफ नहीं आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग पानी समेत सभी बिन्दुओं में जांच कर रही है।

युवाओं की तबियत में अभी सुधार

ध्रुव रस्तोगी, डायरेक्टर, रस्तोगी एजुकेशन सोसाइटी ने बताया कि युवाओं की तबियत में अभी सुधार है। पानी की जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। रिपोर्ट आना बाकी है। हो सकता है कि पानी के स्त्रोत में कहीं लीकेज हुआ हो जिससे ये स्तिथि बानी।

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